नरेंद्र मोदी को मेडिकल शिक्षा में नये प्रयोग करने के लिए पुरस्कार

इस वर्ष का इगनोबल नोबेल पुरस्कार

नरेंद्र मोदी
पंकज प्रसून

इस वर्ष  18 सितंबर को 30 वें इगनोबल नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गयी है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ब्राजील, ब्रिटेन, अमेरिका, मेक्सिको, तुर्की, रूस , तुर्कमेनिस्तान और बेलारूस के राज्याध्यक्षों के साथ मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए पुरस्कृत किया है।

कहा गया है कि इन नेताओं ने कोरोना महामारी का इस्तेमाल संसार को यह शिक्षा देने में किया है कि वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की अपेक्षा नेताओं का इंसान के जीवन और मृत्यु पर तुरंत और पुरअसर प्रभाव पड़ता है।

मोदी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें यह पुरस्कार मिला है।

उनके पहले सन्1998 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के साथ भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आक्रामक रूप से शांतिपूर्ण तरीके से परमाणु विस्फोट करने से लिए शांति का आई जी नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।

इस पुरस्कार के हर विजेता ने कुछ ऐसा काम किया   होता है जिसकी जानकारी होने पर बेसाख्ता हंसी छूट जाते हैं।

इगनोबल का हिंदी में मतलब होता है अधम।

इन पुरस्कारों को देने का क्रम  अमेरिका की मशहूर हास्य व्यंग्य पत्रिका इंप्रोबेब्ल रिसर्च ने 1991से शुरू किया है।

हर पुरस्कार विजेता को  पुरस्कार स्वीकारने का भाषण देने के लिये सिर्फ 60 सेकंड का समय मिलता है।

इस वर्ष पुरस्कार की राशि दस खरब ज़िंबाब्वे डालर है जिसका मूल्य 40 अमरीकी सेंट यानी भारतीय मुद्रा में रुपये 4.432 है।

इस वर्ष के विजेताओं और उनके कार्यों का विवरण भी जान लें।

सन् 2009 में ज़िंबाब्वे रिजर्व बैंक के तत्कालीन प्रमुख गिडियन गोनो को गणित का पुरस्कार इस आविष्कार के लिए मिला कि उन्होंने ज़िंबाब्वे के लोगों को रोज़मर्रे की जिंदगी में बड़ी संख्या का हिसाब जोड़ना सिखाया।

ध्वनि विज्ञान

स्टीफन रेबेर, ताकेशी निशिमूरा ,जुडिथ जानिश, मार्क रॉबर्टसन, और तेकुमसेह फित्स्क को इस रिसर्च के लिये कि चीनी मादा मगरमच्छ को एक हीलियम गैस से भरे वायुरुद्ध चैंबर में डकार लेने की कैसी आवाज़ होती है।

 मनोविज्ञान

भौंहों की जांच कर के किसी व्यक्ति के बारे में पता लगाना कि वह narcissist यानी आत्ममुग्ध टाइप का इंसान है।

इस खोज के लिए कनाडा की मिरांडा गियाकोमिन और अमरीका के निकोलस रूल को पुरस्कृत किया गया है।

 शांति

इस वर्ष का शांति पुरस्कार भारत और पाकिस्तान  की सरकारों को संयुक्त रूप से दिया गया है।

क्योंकि इन दोनों देशों के कूटनीतिज्ञ दिल्ली और इस्लामाबाद में मध्य रात्रि में एक दूसरे के दरवाज़े की घंटी बजा कर  उसके खुलने का  इंतजार किये बग़ैर भाग जाते हैं। 

भौतिक शास्त्र

इ्वान माक्सीमौफ और आंदराई पोटोटोसकी को प्रयोग द्वारा निर्धारित करना कि उच्च फ्रीक्वेंसी पर केंचुए को कंपित करने से उसकी शक्ल पर कैसा असर पड़ता है ।

चिकित्सा

तीन लोगों को दिया गया है। उनके नाम हैं नाइनके वुलनिक ,दामियान देनिस और आमुद फौन लून जिन्होंने मीजोफोनिया नामक एक विरल रोग का निदान ढूंढा।

इस रोग से पीड़ित रोगी को किसी व्यक्ति के चबाने की आवाज़ से भी परेशानी होती है ।

अर्थशास्त्र

सात अर्थशास्त्रियों को इस बात का निर्धारण करने के लिए कि विभिन्न देशों की राष्ट्रीय आमदनी और मुख चुंबन की औसत  संख्या में कोई समानता है।

इन  पुरस्कृत लोगों ने संसार के तेरह देशों के 3,109 लोगों पर अपना शोध कार्य ऑनलाइन किया।

उन्होंने पाया कि युवाओं में  रूमानी संबंध के अंतिम चरणों में चुंबनों की संख्या बढ़ जाती है।

इन विद्वानों का निष्कर्ष है कि चुंबन तो चुंबन ही होता है।

प्रबंधन विज्ञान

चीन के क्वांग शी के पांच भाड़े के हत्यारों को। जिनके नाम हैं शी क्वांग-आन्, मो थ्येन-श्यांग, यांग खांग-शंग, यांग क्वांग-शंग और लिंग श्येन-स्स ।‌

किस्सा कुछ इस प्रकार है। वेई नामक शख्स ने दो रियल एस्टेट कंपनियों पर मुकदमा दायर किया।

उन कंपनियों में थान योउ ह्वेइ नामक व्यक्ति का पैसा लगा हुआ था।

उसने शी क्वांग-आन नामक भाड़े के हत्यारे को वेई की हत्या करने की सुपारी दी।

जिसने पैसे लेने के बाद मो थ्येन-श्यांग नामक हत्यारे को इस काम का ठीका दे दिया।

उसने यांग खांग-शंग को यह काम दे दिया। उसने लिंग श्येन-स्स को इस काम का ठीका दे दिया ।

मो को इस काम के लिए बीस लाख युआन मिलना तय हुआ था।

इस काम को अंजाम देने वाले लिंग श्येन – स्स तक पहुंचते पहुंचते सिर्फ एक लाख युआन रह गया।

लिंग ने सोचा कि इतनी कम रकम में इतना जोखिम भरा काम नहीं किया जा सकता।

लिहाजा उसने वेई से संपर्क साधा और उसे सारी बातें बतायी।

उसने बिना वेई की हत्या किये ही एक लाख युआन हासिल करने की योजना बनायी।

उससे कहा कि एक गठरी में तुम्हें बांध कर उसकी तस्वीर ले लूंगा और तुम दस दिनों के लिए गायब हो जाओ।

लेकिन यह योजना लीक हो गयी और सारे अपराधी पकड़े गये। 

 कीट शास्त्र

रिचर्ड वेटर को इस काम के लिए कि उन्होंने इस बात की खोज की कि कई कीटशास्त्री मकड़ी से डरते हैं जो कि कीट नहीं है।

इसका प्रयोग करने के लिए उन्होंने पानी से भरे एक गड्ढे में तरंगें उत्पन्न की।

एक खास फ्रीक्वेंसी के ऊपर पानी की सतह पर खड़ी तरंगें बनती हैं, जिन्हें फैराडे तरंग कहा जाता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि कई  जीव जंतु ओं  के शरीर में अधिकतर पानी होता है, इसलिए सही स्थिति में जंतु खड़ी तरंगों को महसूस करेंगे।

इन वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग के लिए केंचुए को चुना क्योंकि उनके शरीर में काफ़ी पानी भरा होता है और वे सस्ते में सुलभ हैं।

सामग्री विज्ञान

मेतिन ईरेन, मिशेल बेबेर, जेम्स नौरिस,   एलिसा  पेरोनी,, माइकल विल्सन, ऐश्ली रटकोस्की  और मैरी ऐन रेगेंटी को यह दिखाने के लिए कि इंसान के मल को हिमीकृत  करके उससे बनी छुरी  बेकार होती है।

support media swaraj

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

twenty − 13 =

Related Articles

Back to top button