मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ आम जनमानस की बातें

मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ अत्यंत सरल ढंग से और सरल भाषा में कहीं गई आम जनमानस की बातें हैं, जो लोगों को अपनी और आकर्षित करती हैं, और यही वजह है कि वह कहानियां जन – जन तक पहुंचकर अपना स्थान बनाने में सफल रही है। मुंशी प्रेमचंद की स्मृति में प्रयागराज में एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर सविता कुमारी श्रीवास्तव ने ये विचार व्यक्त किए.

प्रयागराज शहर समता विचार मंच के तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद की 141 वीं जयंती का आयोजन किया गया, जिसमें प्रयागराज के और सुदूर राज्यों से जुड़े साहित्यानुरागियों ने वर्तमान परिपेक्ष में मुंशी प्रेमचंद की विचारधारा विषय पर संगोष्ठी / काव्य गोष्ठी के माध्यम से उपन्यास सम्राट प्रेमचंद को नमन किया।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ रवि मिश्रा ने प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक सरोकार पर अपने विचार व्यक्त किए। अनेक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों ने जनमानस के बीच की संवेदना को बहुत ही संजीदगी के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया है।

विशिष्ट अतिथि के रुप डॉ पूर्णिमा मालवीय ने प्रेमचंद की कहानियों के कथानक को जमीन से जुड़ा हुआ बताया। विशिष्ट वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए कवियत्री एवं कहानीकार मीरा सिन्हा ने प्रेमचंद के कहानियों को सामाजिक पृष्ठभूमि पर मजबूती के साथ खड़ा, भाषा और प्रवाह में सरलता और रोचकता से पूर्ण बताया।

शहर समता के उमेश श्रीवास्तव ने प्रेमचंद की लघु कथा बंद दरवाजा का वाचन करने के साथ ही उनके साहित्य के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए। कवियत्री रचना सक्सेना ने गीत के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद को नमन किया।

चर्चा में शामिल साहित्यकार


कार्यक्रम में वरिष्ठ कवियत्री जया मोहन, संतोष मिश्रा’दामिनी ‘विभा कुमारिया शर्मा, क्षमा लाल गुप्ता, नीना मोहन श्रीवास्तव, सरिता श्रीवास्तव, श्रद्धा शुक्ला, चंद्रकला भागीरथी, मंजू गुप्ता,बिजनौर, डाॅ नीलिमा मिश्रा,उमा मिश्रा प्रीत जी, प्रीति शर्मा और वी के तिवारी ने अपने विचारों और काव्यात्मक प्रस्तुतियों से मुंशी प्रेमचंद को नमन किया।सरस्वती वंदना नीना मोहन श्रीवास्तव, कार्यक्रम का संचालन , संयोजन उर्वशी उपाध्याय और आभार ज्ञापन श्रीमती सरिता श्रीवास्तव ने किया।

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