क्या है  मोदी सरकार का मिशन कश्मीर !

जम्मू कश्मीर से लौट कर चंद्र प्रकाश झा * 

जम्मू कश्मीर विधानसभा अभी भंग है और वहाँ लागू राष्ट्रपति शासन की अवधि संसद के मानसून सत्र में बढ़ाने की संभावना है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने मिशन कश्मीर के तहत विधानसभा चुनाव से पहले वहाँ निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन कराने के काम में लगे थे। उन्होंने इस पर सचिवों और कुछेक केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक कर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सतपाल मालिक से भी बातचीत की। वह इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक और गृह सचिव से विमर्श कर चुके थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने परिसीमन के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया है। जानकार लोगों का कहना है कि अमित शाह के मिशन कश्मीर में राज्य में कश्मीर का राजनीतिक प्रभुत्व कम करने का इरादा है। भाजपा के असर वाले जम्मू में परिसीमन की मांग अर्से से उठती रही है. नए परिसीमन से क्षेत्रफल तथा मतदाता के आधार पर सीटें जम्मू संभाग में बढ़ने और कश्मीर में कम होने की पहले से आशंका थी।

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह

विरोध

पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ़्ती ने परिसीमन का विरोध किया है. पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला का कहना है कि जब भाजपा पूरे देश में एकसमान क़ानून लागू करने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए को हटाने की बात कहती है तो उसकी सरकार को राज्य में परिसीमन भी तभी करनी चाहिए जब वह पूरे देश में हो। ओमार अब्दुल्ला 2008 के विधानसभा चुनाव बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार में जनवरी 2009 से 1914 के पिछले विधानसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री रहे थे। वह पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला के पुत्र हैं और 2002 में उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष बन चुके हैं। फारूख अब्दुल्ला अभी श्रीनगर से लोकसभा सदस्य हैं।

फारूख अब्दुल्ला

ओमार अब्दुल्ला 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार में जनवरी 2009 से 2014 के पिछले विधान सभा चुनाव तक मुख्यमंत्री रहे थे। वह पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला के पुत्र हैं और 2002 में उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष बने थे। किसी भी राज्य में पुत्र, पिता और पितामह के मुख्यमंत्री बनने का गौरव अब्दुल्ला परिवार को ही है

मिशन कश्मीर मतलब हिन्दू मुख्यमंत्री

भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कश्मीर से धारा 370 और 35एहटाने के मुद्दे को शामिल किया। वह इन्हें समाप्त करने की मांग अरसे से करती रही थी। राज्य की क्षेत्रीय पार्टियां इसके खिलाफ रही हैं। भाजपा 2014 के आम चुनाव की तरह 2019 में भी लोकसभा की जम्मूउधमपुर और लद्दाख की तीन सीटें जीत लेने के बाद उत्साहित हो गई। अनंतनाग , बारामुला और श्रीनगर की तीन अन्य सीटें नेशनल कांफ्रेंस ने जीती। बताया जाता है भाजपा इस मुस्लिम बहुल राज्य में हिन्दू मुख्यमंत्री बनाने का अपना पुराना सपना साकार करना चाहती है। मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा के दावेदारों में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और विधानसभा स्पीकर निर्मल सिंह शामिल हैं।विधानसभा भंग होने पर भी उसके अध्यक्ष तबतक बना रहता है जबतक अगला अध्यक्ष पदासीन न हो जाए। उधमपुर से निर्वाचित जितेंद्र सिंह, जम्मू-कश्मीर संविधान बदलने के हिमायती हैं जिनमें विधानसभा कार्यकाल घटा कर पांच वर्ष करने का भी प्रस्ताव है। वह मोदी जी की पिछली सरकार में भी मंत्री थे। उनकी बात अमित शाह के मिशन कश्मीर का हिस्सा है। मौजूदा विधानसभा अभी भंग नहीं की गई है. विधान सभा के मौजूदा अध्यक्ष बीजेपी के ही निर्मल सिंह हैं।

पिछला चुनाव 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के नवम्बर-दिसंबर 2014 में हुए चुनाव में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। तब भाजपा ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी के साथ मिल सरकार बनाई। मुफ़्ती साहब के निधन के बाद उनकी पुत्री महबूबा मुफ़्ती चार अप्रैल 2016 को उस गठबंधन की सरकार की दूसरी मुख्यमंत्री बनीं। दोनों दलों में कभी चुनावी गठबंधन नहीं रहा। उन्होंने सत्ता में आने के लिए चुनाव के बाद गठबंधन किया जो अगले चुनाव के पहले ही टूट गया। भाजपा इस गठबंधन की सरकार के रहते 2019 का आम चुनाव नहीं कराना चाहती थी क्योंकि यह मतदाताओं के बीच धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ाने के उसके मंसूबों में रोड़ा बन गई थी। ऐसे में ने अपनी ही सांझा सरकार गिरा दी। महबूबा मुफ़्ती सरकार का 19 जून 2018 को पतन हो गया। यह सरकार गिरने के बाद जम्मू-कश्मीर के विशेष संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत गवर्नर रूल लागू किया गया।उसके बाद 19 दिसंबर 2018 की मध्य रात्रि से राष्ट्रपति शासन लागू है। 

राज्यपाल की अनुशंसा पर विधानसभा तब भंग की गई जब महबूबा मुफ्ती ने ओमार अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के भी समर्थन से नई सरकार बनाने का दावा पेश करने हस्ताक्षरित पत्र राजभवन को फैक्स से भेज दिया।राजभवन ने कहा उसे ऐसा फैक्स नहीं मिला। दो विधायकों की पार्टी, पीपुल्स कांफ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने भी भाजपा और कुछे अन्य विधायकों का समर्थन प्राप्त होने का दावा कर नई सरकार बनाने की कोशिश शुरू कर दीथी। राज्यपाल मलिक ने नई सरकार बनाने की प्रक्रिया में विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका में विधानसभा भंग कर दी।

उस वक़्त 89 सीटों की विधानसभा में पीडीपी के 29भाजपा के 25नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15कॉंग्रेस के 12 , जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस दो विधायक के अलावा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के एक-एक सदस्य थे। तीन अन्य सदस्य निर्दलीय थे। सदन में दो सीट मनोनीत महिला सदस्यों की है।

राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने के जो कारण माने उन्हें राजभवन को लिखित रूप से सार्वजनिक करने में देरी नहीं लगी। सबसे प्रमुख वजह सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका बताई गई। इन कारणों में परस्पर विरोधी राजनीतिक विचारधारा के दलों के प्रस्तावित गठबंधन से बनने वाली सरकार के टिकने में आशंका भी गिनाई गई।  

महबूबा मुफ़्ती ने राज्यपाल को सम्बोधित अपना पत्र फैक्स से राजभवन को भेजने के बाद ट्वीट में लिखा कि विधानसभा में पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके 29 सदस्य हैं. आपको मीडिया की खबरों से पता चला होगा कि कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस ने भी राज्य में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है. नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों की संख्या 15 है और कांग्रेस के 12 विधायक हैं.इससे हमारी सामूहिक संख्या 56 हो जाती है.विधानसभा भंग होने के बाद महबूबा मुफ़्ती ने कहा प्रदेश में महागठबंधन की सोच ने ही भाजपा को बेचैन कर दिया. उन्होंने कहा ‘आज तकनीक के दौर में यह अजीब बात है कि राज्यपाल आवास पर फैक्स मशीन ने हमारा फैक्स प्राप्त नहीं किया। लेकिन विधानसभा भंग किये जाने के बारे में तेजी से बयान जारी किया गया.’

फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों की अचानक बढ़ी सियासी गतिविधियों के बीच आम अवाम के बीच इस आरोप की चर्चा है कि मोदी सरकार ने कश्मीर को 5 अगस्त 2019 से दुनिया की सबसे बड़ी खुली जेल बना दिया है जिसकी वजह से स्थिति भारत में 26 जून 1975 को इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए आंतरिक आपातकालसे भी बदतर लगती है।

सीपी झा

 • सीपी, यूनाईटेड न्यूज ऑफ इंडिया मुम्बई ब्यूरो से दिसंबर 2017 में रिटायर होने के बाद बिहार के अपने गांव में खेतीबाडी करने और स्कूल चलाने के अलावा पुस्तक लेखन और स्वतंत्र पत्रकारिता करते हैं.

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