कई बड़े नाम शामिल हैं असम के प्रश्नपत्र घोटाले में

प्रभाकर मणि तिवारी

असम में पुलिस अफसरों की नियुक्ति की परीक्षा के पेपर लीक होने के मुद्दे पर घमासान तेज हो गया है।

20 सितंबर को शुरू होने के कुछ देर बाद ही इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।

लगभग 66 हजार परीक्षार्थी इसमें शामिल हुए थे।

विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पर्चा लीक कराया था ताकि अपने लोगों को पुलिस में भर सके।

अब पुलिस नियुक्ति बोर्ड के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने इस्तीफा दे दिया है।

इस मामले में अब तक बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिबान डेका समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इस मामले के तार असम पुलिस के एक पूर्व डीआईजी के अलावा बीजेपी नेताओं से जुड़े होने की खबरें सामने आई हैं।

इसे मध्यप्रदेश के व्यापम से भी बड़ा घोटाला बताया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हालांकि मामले की पूरी तहकीकात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

लेकिन बावजूद इसके इस मामले में पूरी सरकार कठघरे में खड़ी नजर आ रही है।

असम में 20 सितंबर को राज्य पुलिस में 597 पदों पर सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था।

इसके चलते असम राज्य स्तर पुलिस भर्ती बोर्ड (एसएलपीआरबी) ने परीक्षा शुरू होने के बाद उसे रद्द कर दिया था। दरअसल परीक्षा तो 20 सितंबर को होनी थी।

लेकिन उससे एक दिन पहले यानी 19 सितंबर को ही सरकार की नाक के नीचे असम विधानसभा और सचिवालय के पास एक लॉज में 50 परीक्षार्थी यह परीक्षा दे दी थी।

बाद में खुफिया विभाग की एक टीम ने जब उस लॉज में छापा मारा तो वहां से हाथ से लिखे प्रश्नपत्र बरामद किए गए।

इसके अलावा कंप्यूटकर की हार्ड डिस्क और परीक्षा से संबंधित अन्य सामग्री भी जब्त की गई।

सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री सोनोवाल ने 20 सितंबर को इस मामले की जांच का एलान किया।

उसके बाद छापेमारी का जो सिलसिला हुआ उसमें कई चौंकाने वाले नाम और तथ्य सामने आए हैं।

इनमें राज्य पुलिस के पूर्व डीआईजी पी.के. दत्त का नाम भी शामिल है।

छापे के दौरान पूर्व डीआईजी दत्त की करोड़ों की अवैध संपत्ति का भी पता चला है।

बीजेपी नेता दिबान ने अपनी गिरफ्तारी से पहले भूमिगत रहने के दौरान सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट में कहा था कि कुछ प्रभावशाली लोग उनकी हत्या का प्रयास कर सकते हैं।

उनका दावा है कि इस घोटाले में असम पुलिस के कई बड़े और भ्रष्ट अधिकारी शामिल है।

जांच दल ने डेका का लैपटॉप, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं।

डेका की पत्नी से आवास पर ही कई घंटे तक पूछताछ की गई. इस बीच जेल में बंद किसान नेता अखिल गोगोई ने कहा है कि प्रश्नपत्र लीक घोटाला मध्य प्रदेश में हुए व्यापम घोटाले से भी ज्यादा बड़ा है।

इस मामले में एक अभियुक्त हीरक ज्योति बरुआ ने पुलिस की पूछताछ में बताया है कि उसने नौकरी के लिए पूर्व डीआईजी दत्त को पांच लाख रुपए दिए थे।

जांच एजंसियों का कहना है कि पूर्व डीआईजी दत्त के आवास और दूसरे परिसरों में छापेमारी के दौरान पांच किलो सोने के अलावा करोड़ों की अवैध संपत्ति के बारे में पता चला है जो उनकी वैध आय से मेल नहीं खाती।

दत्ता के गुवाहाटी में कई लक्जरी होटल और अन्य शहरों में कई अपार्टमेंट हैं. फिलहाल दत्त भी फरार हैं।

इसबीच, प्रश्नपत्र लीक होने की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए (एसएलपीआरबी) के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। कुमार ने इसके लिए परीक्षार्थियों व उनके परिवारों से माफी भी मांगी है।

यह आरोप लग रहे हैं कि वह प्रश्नपत्र प्रदीप कुमार की पत्नी ने ही तैयार किया था। लेकिन प्रदीप ने इसका खंडन किया है।

दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा है कि असम पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक घोटाले में बीजेपी एक वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

उसका दावा है कि इसके पीछे आरएसएस का हाथ है।

पार्टी ने आरोप लगाया है कि आरएसएस अपने काडर को राज्य पुलिस बल में प्रवेश दिलाने की योजना बना रहा है।

पार्टी ने हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से इस मामले की पूरी तहकीकात कराने की मांग की है।

राज्यसभा सदस्य और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा कहते हैं, “असम पुलिस मुख्यमंत्री के अधीन आती है।

पुलिस के खिलाफ पुलिस विभाग की जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है? हम हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।

यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पुलिस बल में अपने काडर को प्रवेश कराने की योजना थी. इसलिए बीजेपी के नेता इस प्रक्रिया में शामिल है।”

उधऱ, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने भी जगह-जगह प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के पुतले जलाए हैं।

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