माले ने की पार्टी नेता की गिरफ्तारी व लखनऊ पुलिस के रवैये की कड़ी निंदा

लखनऊ। भाकपा (माले) ने राज्य स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के सदस्य व लखनऊ जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर की गिरफ्तारी व लखनऊ पुलिस के रवैये की कड़ी निंदा की है।

शनिवार को राज्य सचिव सुधाकर यादव की ओर से जारी बयान में कहा कि कामरेड रमेश को बीती रात दो बजे लालकुआं स्थित जिला कार्यालय से उठा लिया गया। तब कामरेड रमेश कार्यालय में सो रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस की वर्दी और सादे वस्त्रों में लगभग 50 व्यक्तियों का  जत्था दरवाजा खुलवाकर उन्हें अपने साथ गाड़ी में बैठा कर रहस्यमय तरीके से ले गया। कोई जानकारी भी नहीं दी कि कहां से आये हैं और कहां ले जा रहे हैं। उनके खिलाफ गिरफ्तारी का न तो कोई वारंट जारी हुआ था, न ही ऐसा कोई मुकदमा था।

राज्य सचिव ने कहा कि घटना के बाद दिन भर पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारियों, कई थानाध्यक्षों को फोन करने और थानों में जा-जा कर पूछने के बावजूद लखनऊ पुलिस यह बताने से बचती रही कि कामरेड रमेश कहां हैं। इसके अलावा, लखनऊ पुलिस के अधिकारी उनकी गिरफ्तारी या पुलिस द्वारा उन्हें ले जाये जाने को भी नहीं स्वीकार रहे थे।

ऐसे में पार्टी ने अपने नेता का पता लगाने के लिए कैसरबाग कोतवाली में तहरीर दी। हालांकि पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की, न ही कोई कार्रवाई की। इसे लेकर पूरे दिन पार्टी सर्किल और लोकतांत्रिक हलकों भारी चिंता की स्थिति बनी रही।

राज्य सचिव ने कहा कि यह कैसी सरकार है, जिसमें पार्टी नेता को कार्यालय से उठा लिया जाता है और तमाम कोशिशों के बावजूद यह जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई जाती है कि उनका क्या हुआ?

कामरेड सुधाकर ने कहा कि शनिवार को चिनहट थानाक्षेत्र की हरदासी खेड़ा मजदूर बस्ती में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ माले का एकदिवसीय भूख हड़ताल का कार्यक्रम था।

इस मजदूर बस्ती में भाजपाइयों ने अपना कार्यालय स्थापित करने के बहाने एक महिला भाजपा नेत्री व भूमाफिया के नेतृत्व में इस साल जून के महीने में कुछ मजदूरों की झोपड़ियों पर अपना झंडा-बैनर लगाकर जबरिया कब्जा करने की कोशिश की थी, जिसे मजदूरों ने विफल कर दिया था।

इसके बाद चिनहट पुलिस ने भाजपाइयों के इशारे पर मजदूर परिवारों का उत्पीड़न शुरू कर दिया। पुलिस ने एकतरफा दो-दो एफआईआर मजदूरों के खिलाफ लिख ली। इसके अलावा इनमें से दलित व गरीब वर्ग के मेहनत-मजदूरी करके पेट पालने वाले तीन व्यक्तियों – 65 वर्षीय जगत राम, रामपाल व मनोज – के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई शुरू कर नोटिसें भेज दीं। माले ने योगी सरकार में दलितों-गरीबों के हो रहे इस दमन व नाइन्साफी के खिलाफ मजदूरों को गोलबंद कर उनकी अगुवाई की।

शनिवार को हरदासी खेड़ा में कार्यक्रम स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी। इसके बावजूद माले कार्यकर्ता जुटे और अपनी मांगे उठाते हुए पुलिस अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन भेजा।

राज्य सचिव ने कहा कि अन्ततः देर शाम का. रमेश के रिहा होने से संदेह, संशय व असमंजस का वातावरण छटां। पुलिस ने संभवतः भूख हड़ताल के कार्यक्रम को रोकने के उद्देश्य से आधी रात बाद उन्हें उठाया और उनकी गिरफ्तारी को रहस्य बनाकर रखा। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी या हिरासत में रखकर उसे छुपाना और पार्टी को अंधेरे में रखना अनुचित है।

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