22 दिसंबर को सूरजकुंड रोड में होगा महा स्वर्ण प्राशन

आयुष ग्राम ट्रस्ट, कई वर्षों से प्रति माह पुष्य नक्षत्र के दिन, आयुष ग्राम ट्रस्ट परिसर में बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन शिविर आयोजित करता आ रहा है। इसी श्रृंखला का अगला शिविर 22 दिसंबर 2021, दिन बुधवार को आयुषग्राम परिसर, पूरवा तरोहा मार्ग, सूरजकुंड रोड में प्रातः 9 बजे से सायंकाल 4 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

स्वर्ण प्राशन बनाता है बच्चों को स्वस्थ, सबल, बुद्धिमान और मजबूत रोगप्रतिरोधक क्षमता से युक्त!!

भगवान श्रीराम की तपोभूमि एवं कर्मस्थली चित्रकूटधाम में स्थित आरोग्य एवं अध्यात्म तीर्थ धन्वंतरि पीठ: आयुषग्राम ट्रस्ट के संस्थापक आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि गत तीन वर्षों के दौरान, कोरोना महामारी के प्रकोप का सर्वाधिक प्रभाव लोगों की रोगप्रतिरोधक क्षमता पर पड़ा है। देश की भावी पीढ़ी भी इसके प्रभाव से अछूती नहीं रही है। इसलिए, यह सभी अभिभावकों की ज़िम्मेदारी है कि अपने नवजात 6 महीने के शिशुओं से लेकर, 16 वर्ष के बच्चों का प्रत्येक माह, पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण प्राशन अवश्य कराएं।

आयुष ग्राम ट्रस्ट, कई वर्षों से प्रति माह पुष्य नक्षत्र के दिन, आयुष ग्राम ट्रस्ट परिसर में बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन शिविर आयोजित करता आ रहा है। इसी श्रृंखला का अगला शिविर 22 दिसंबर 2021, दिन बुधवार को आयुषग्राम परिसर, पूरवा तरोहा मार्ग, सूरजकुंड रोड में प्रातः 9 बजे से सायंकाल 4 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

शिविर 22 दिसंबर 2021, दिन बुधवार को आयुषग्राम परिसर, पूरवा तरोहा मार्ग, सूरजकुंड रोड में प्रातः 9 बजे से सायंकाल 4 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि स्वर्ण प्राशन की परंपरा हमारे देश में वैदिक काल से रही है। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ काश्यप संहिता के लेह अध्याय में संहितकार आचार्य ने स्वर्ण प्राशन के महत्व का वर्णन करते हुये बताया है कि “सुवर्ण प्राशनं हि एतत् मेधाग्निबलवर्धनम्। आयुष्यं मगलं पुण्यं वृष्यं वर्ण्यं ग्रहापहम्॥ मासात् परमेधावी व्याधिर्भिर्नच धृश्यते। शड्भिर्मासै: श्रुतधर: सुवर्णप्राशनाद् भवेत्॥ अर्थात, स्वर्णप्राशन से शिशु की मेधा, अग्नि, बुद्धि, बल तथा आयु की वृद्धि होती है, उसका बार-बार होने वाली खांसी, जुकाम, मौसमी बीमारी से बचाव होता है, पाचन शक्ति में वृद्धि होने से उसकी भूख बढ़ती है, जिससे उसका वजन तथा लंबाई में भी वृद्धि होती है।

पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण प्राशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुये डॉ वाजपेयी ने आगे कहा कि पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति देव शुभता, बुद्धिमत्ता एवं ज्ञान के प्रति हैं इसलिए पुष्य नक्षत्र को मंगलकर्ता भी कहा गया है, इसलिए इस नक्षत्र में किसी योग्य आयुर्वेदचार्य की देखरेख में लगातार 6 महीने से 16वर्ष तक की आयु के बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराने से उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि, स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है क्योंकि स्वर्णभस्म, ब्राह्मी और मधु के योग से बने योग को पुष्य नक्षत्र और भी प्रभावी बना देता है।

स्वर्ण प्राशन की मात्रा के बारे में उन्होने बताया कि बच्चे की आयु एवं बल के आधार पर 2 से पाँच बूंद तक या एक गोली प्राशन कराना उत्तम होता है। वैसे तो शास्त्रों में प्रतिदिन स्वर्ण प्राशन का विधान बताया गया है, फिर भी यदि इसका सेवन प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में ही कराया जाए तो इसका बहुत लाभ होता है।

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इसी क्रम में श्री मदन गोपाल बाजपेई आयुर्वेद सम्राट के कृपा पात्र शिष्य आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे सद्गुरु औषधालय साकेत पुरी कॉलोनी के अनंत शिखर में विगत 6 महीने से लगातार स्वर्ण प्राशन का कार्यक्रम बड़े धूमधाम से रोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए कुशल वैद्य की देखरेख में लगातार कराया जा रहा है जिसमें बाजपेई का पूर्ण मार्गदर्शन मिला करता है। समय अभाव के कारण उनका अनंत शिखर परिसर में अभी तक पदार्पण नहीं हुआ है लेकिन उनका आशीर्वचन और अनुभव मार्गदर्शन बराबर मिल रहा है इसके लिए अनंत शिखर उनका कोटि कोटि आभार व्यक्त करता है।

22 दिसंबर को स्वर्ण प्राशन का कार्यक्रम अनंत शिखर में सुबह 9:30 बजे से शुरू होगा, जो शाम 5:00 बजे तक निरंतर चलता रहेगा। अतः सभी अभिभावकों से निवेदन है कि बच्चों का स्वर्ण प्राशन समय से कराएं और लाभ उठाएं।

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