लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन में सैनिकों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश पर हुई चर्चा

सैन्य साहित्य सम्मेलन

देश की रक्षा में अपना जीवन ​बलिदान कर देने वाली भारतीय सेना को करीब से जानने वाले यह समझते होंगे कि उनके चेहरे पर हंसी देख पाना आसान नहीं होता. हालांकि पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित सैन्य साहित्य सम्मेलन में इसी मुद्दे पर चर्चा की गई. सैनिकों के चेहरे पर मुस्कान बिखरने की एक ऐसी पहल करने का विचार तय किया गया, जिसके तहत लाफ्टर योगा की भांति सैनिकों के चेहरों पर भी हर वक्त खुशी लाने की कोशिश जरूरी मानी जाए.

हंसने का वरदान सिर्फ मानव जाति को है और यही हंसी दुर्लभ होती जा रही है. इस काम के लिए अब लोगों ने लाफ्टर योगा, लाफ्टर क्लब इत्यादि बना रखे हैं, जिन्हें पार्कों और खुले मैदानों में जीवंत देखा जा सकता है.

सीमाओं पर तैनात जवानों का एकाकीपन, प्रशिक्षण के दौरान एवं अन्य क्रियाकलाप में, सैनिक परिवेश में भी पर्याप्त मनोविनोद और हास्य व्यंग्य वर्तमान रहता है. लखनऊ साहित्य सम्मेलन में इस बार चर्चा का विषय था, सैन्य परिवेश में हास्य व्यंग्य. इस दौरान सैनिकों के चेहरे पर हंसी और खुशी लाने के लिए क्या किया जाए, इसे लेकर विस्तार से चर्चा की गई.

लखनऊ साहित्य सम्मेलन की अगली कड़ी आगामी शनिवार को आयोजित की जाएगी. इस दौरान सैन्य साहित्य सम्मेलन गूढ़ विषयों से इतर, हास्य व्यंग्य पर परिचर्चा की तैयारी की जा रही है.

इस कार्यक्रम में सेना के कुछ ऐसे अधिकारी भाग लेंगे, जिन्होंने अपनी पैनी नजर से, सेना के मुश्किल और अनुशासित जीवन में भी हास्य ढूंढ निकाला है.

इनका संकलन प्रकाशित किया है और अभी भी, इस रोचक विषय पर, समय-समय पर, अपना योगदान दे रहे हैं. कार्यक्रम पूर्व की भांति, आभासी माध्यम से होगा और इसे जूम तथा यूट्यूब पर सजीव देखा जा सकता है.

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