साठ साल पहले का लखनऊ

उर्दू अदब की बहुत बड़ी शख़्सियत लेखक, पत्रकार अध्यापक प्रो आरिफ नकवी जी से बर्लिन फोन पर बात हुई तो उन्होंने 60 साल पहले का लखनऊ, दोस्त और अदबी महफिलों से अपनी नजर से रूबरू कराया।

प्रो आरिफ नकवी लखनऊ से लगभग 60 साल पहले बर्लिन जर्मनी गए तो वहीं के हो गए और हंबोल्ट यूनिवर्सिटी से जुड़ गए। प्रो आरिफ नकवी ने दुनिया के जानेमाने नात्यकार बर्टोल्ड ब्रेख़्त के नाटकों पर बहुत काम किया हैं। उनकी लिखी किताबें दुनिया के तमाम देशों में पढ़ी जाती हैं। प्रो आरिफ नकवी हमेशा प्रगतिशील लेखक संघ (पी डब्लू ए) से जुड़े रहे।

प्रो आरिफ नकवी ने बताया कि जर्मनी जाने से पहले वो उर्दू अदब की बहुत बड़ी शक्सियत सज्जाद ज़हीर ,जो बनने भाई के नाम से जाने जाते थे, के साथ कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार में दिल्ली में काम किया।

खुशी की बात तो यह है 87 साल उम्र में भी बहुत काम कर रहेभाईं और हफ्ते में दो दिन ऑनलाइन क्लासेज ले रहे हैं।

प्रो आरिफ नकवी जो स्टूडेंट फेडरेशन के पदाधिकारी थे जब लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र थे। प्रो नकवी ने अपने उस दौर के दोस्तों मैं बहुत नाम लिए जिनमें प्रो शारिब रुदौलवी जी आज भी रोज बात करते हैं। नकवी जी इब्ने हसन, अब्दुल मन्नान, हैदर अब्बास रजा, हसन कमाल, शेख अली रजा डा अम्मार रिजवी अतुल अंजान को खूब याद किया। डा अम्मार रिजवी से बराबर फोन पर बात करतें रहते हैं।

प्रो आरिफ नकवी ने लखनऊ में तारिकी उर्दू अदब के जलसे के बारे में बताया जो दिसंबर 1955 के पहले हफ्ते में हुआ था। इस जलसे के आयोजन में उनकी और शारिब रुदौलवी जी बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ये जलसा गंगा प्रसाद वर्मा हाल अमीनाबाद मैं हुआ था और मुशायरा कैसरबाग बारादरी मैं हुआ उनके दोस्त मजाज ने अपनी शायरी से मजमा लूट लिया था। मजाज ने क्या – क्या सुनाया आज भी प्रो आरिफ नकवी को खूब याद है।

उन्होंने बताया कि मुंबई से अली सरदार जाफरी, इस्मत चुगताई, साहिर लुधियानवी और अन्य बड़े लोग जो उर्दू अदब से जुड़े थे सब लखनऊ आए थे।

प्रो आरिफ नकवी ने एक खास बात बताई की मुंबई के दोस्तों ने मजाज को मना लिया था की वो उनके साथ मुंबई चले जायेंगे और वे एक नई शेरवानी भी बनवा रहे थे।

लेकिन हादसा यह हुआ कि जब गंगा प्रसाद मेमोरियल हॉल में जलसा चल रहा था तो खबर आई कि।मजाज की तबियत बहुत खराब है । यह सुनकर जलसा रोक दिया गया और सब लोग बलरामपुर हॉस्पिटल की ओर चल दिए तब तक मजाज का इंतकाल हो गया था।

प्रो आरिफ नकवी ने बताया कि मजाज के जनाजे में मुंबई से उर्दू अदब से जुड़े सभी लोग शामिल हुए। प्रो आरिफ नकवी ने बताया मजाज के जनाजे में लखनऊ के अवाम भी बहुत शामिल हुए।

प्रो आरिफ नकवी ने बताया की मजाज से से उनकी खास दोस्ती थी और वे उनके साथ बहुत वक्त गुजारते थे।

अपने लखनऊ दिनों के बारे प्रो आरिफ नकवी ने बताया कि 1957 मैं उन्होंने मीर तकी मीर पर नाटक में एक्टिंग की। मीर का रोल भी उन्होंने किया। खास बात जो उन्होंने बताया कि मीर के लड़कपन का रोल हसन कमाल ने किया था , जो खूब सराहा गया था।

प्रो आरिफ ने बताया कि जब वे लखनऊ यूनिवर्सिटी में थे तब दोस्तों के साथ हजरतगंज काफी हाऊस में खूब महफिल लगती थी जिसमें शारिब रुदौलवी भी रहते थे।

प्रो आरिफ नकवी बराबर लखनऊ और दोस्तों और पुरानी महफिलों को खूब याद करतें रहते हैं। जब भी मौका मिलता है साल या दो साल में लखनऊ आते हैं और अपनों से मिल कर बहुत खुश रहतें हैं।

प्रो आरिफ नकवी ने अपने पुराने मित्र और लखनऊ के पूर्व मेयर डा दाऊजी गुप्ता और अवधनामा के संपादक वकार रिजवी को याद करके बहुत दुखी हुए। प्रो आरिफ नकवी ने कहा कि वे जब भी लखनऊ आयेंगे लेकिन डा दाऊजी गुप्ता और वकार रिजवी की कमी बहुत महसूस की जाएगी। प्रो आरिफ नकवी ने कहा की इन दोनो ने अदब और समाज के लिए जो किया हमेशा याद किया जाएगा।

हम प्रो आरिफ नकवी के साथ यादगार फोटो साझा कर रहे हैं। साथ में प्रो शारिब रुदौलवी, डा रमेश दीक्षित, चचा अमीर हैदर और प्रो खान मसूद।

प्रदीप कपूर

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