क्यों गिरती हैं आकाशीय बिजलियां, कैसे बचें वज्रपात से!

आकाशीय बिजली का कहर उत्तर प्रदेश और बिहार में सौ से अधिक मरे

(मीडिया स्वराज़ डेस्क)

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों में गुरुवार को आकाशीय बिजली गिरने से 107 लोगों की मौत हो गयी। मृतकों में ज्यादातर किसान और खेतिहर मजदूर थे और घटना के वक्त खेतों में काम कर रहे थे. हाल के वर्षों में एक दिन में वज्रपात से इतनी मौतें पहली बार हुई हैं.बिहार में आकाशीय बिजली कै ठनका कहा जाता है. बिहार की नीतीश कुमार सरकार एवं उ.प्र. की योगी सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है.

सबसे ज्यादा 13 मौतें बिहार के गोपालगंज जिले में हुई हैं. आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक मधुबनी और नवादा जिलों में 8-8, सिवान और भागलपुर में 6, पूर्वी चम्पारण, दरभंगा और बांका में 5-5 लोगों की मौतें आकाशीय बिजली गिरने से हुई हैं. साथ ही पूर्णिया, सुपौल, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, बक्सर, कैमूर, मधेपुरा समेत 23 जिलों में वज्रपात ने अपना कहर बरपाया है. इन घटनाओं में कई दर्जन लोग झुलस भी गये हैं, जिनका विभिन्न स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली का कहर सबसे ज्यादा देवरिया जिले में टूटा, जहां 9 लोगों की मृत्यु हो गयी. प्रयाजराज में 6 मौतों की पुष्टि के साथ अम्बेडकरनगर, अमेठी व बाराबंकी से भी कई लोगों के मारे जाने की खबर है. उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार राज्य में 24 लोग घायल भी हुए हैं.

नेताओं ने दुख जताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों के निधन का दुखद समाचार मिला. राज्य सरकारें तत्परता के साथ राहत कार्यों में जुटी हैं. इस आपदा में जिन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी संवेदना प्रकट करता हूं.”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मृतकों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए राज्य के नागरिकों को बदलते मौसम के अनुसार जरूरी एहतियात बरतने और ज्यादातर घर पर रहने की सलाह दी है. इनके अलावा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर के मृतकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.

खतरा अभी टला नहीं है

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान कार्यालय के पटना स्थित कार्यालय ने अगले 72 घंटों तक लगातार तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की भविष्यवाणी करते हुए लोगों को सचेत रहने के लिये कहा है. यही आकलन उ.प्र. मौसम विभाग के निदेशक जे पी गुप्ता ने उत्तर प्रदेश को लेकर भी किया है. भारतीय मौसम विभाग के मुख्यालय ने मानसून की गतिविधियों के मद्देनजर पूरे इलाके को गत बुधवार को ही रेड जोन घोषित कर दिया था.

क्यों गिरती हैं आकाशीय बिजलियां

आकाशीय बिजली पर काबू पाना मुमकिन नहीं है क्योंकि ये मौसमी गतिविधियों के चलते बनती और गिरती है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पटना केंद्र के मौसम वैज्ञानिक आनंद शंकर कहते हैं, “जब दो-तीन दिनों तक बारिश न हो और स्थानीय कारणों से मौसम गर्म हो जाये तो ऐसे बादल बन जाते हैं, जिससे आकाशीय बिजली ज्यादा गिरती है.”

पिछले दो-तीन दिनों से बिहार में बारिश की मात्रा एकदम कम हो गयी थी और अब दोबारा बारिश शुरू हो गयी है, इसलिये गुरुवार को ज्यादा वज्रपात हुआ है.

सरकारी उपाय कमतर साबित हो रहे हैं

बिहार में वज्रपात से मौत की घटनाएं बढ़ने के मद्देनजर बिहार सरकार ने वर्ष 2010 में इसे प्राकृतिक आपदा घोषित किया था. लेकिन, वज्रपात से लोगों को बचाने के लिये कारगर उपाय नहीं किये गये, सिवाय ‘वज्रइंद्र’ नाम का ऐप बनाने के. खुद बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री मानते हैं कि इस ऐप को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं है. इस पर ज्यादा काम करने की जरूरत है.

दिलचस्प बात ये है कि ओडिशा तथा झारखंड में वज्रपात की घटनाएं अधिक होने के बावजूद मृत्यु अपेक्षाकृत कम हुई हैं, लेकिन बिहार में इन दोनों राज्यों के मुकाबले कम वज्रपात होने के बावजूद मृत्यु दर ज्यादा है.

कैसे बचें वज्रपात से

जानकारों का कहना है कि आकाशीय बिजली से बचने को दो तीन उपाय हो सकते हैं.
पहला तो ये कि लाइटनिंग अरेस्टर स्थापित किये जायें. ये वो उपकरण होता है, जो आकाशीय बिजली को अपनी तरफ खींचकर जमीन के भीतर डाल देता है. झारखंड का वज्रमारा गांव जो आकाशीय बिजली के गिरने से बहुत ज्यादा प्रभावित था, ने वृहत पैमाने पर उनका इस्तेमाल कर के वज्रपात से निजात पाने में सफलता हासिल कर ली है.

दूसरा उपाय है बांग्लादेश मॉडल. बांग्लादेश में भी वज्रपात खूब होता था और लोगों की जानें जाती थीं। वर्ष 2017 में तो वज्रपात से बांग्लादेश में 308 लोगों की जान चली गयी थी. बांग्लादेश ने इसका तोड़ ताड़ के पेड़ में निकाला. जगह-जगह ताड़ के पेड़ लगाये जाने लगे और इसके साथ ही बांग्लादेश सरकार ने नेशनल बिल्डिंग कोड में भवनों के निर्माण में वज्रपात से बचाव के उपाय अपनाने (लाइटनिंग अरेस्टर लगाना) को अनिवार्य कर दिया. ताड़ के पेड़ बहुत लंबे होते हैं, जो आकाशीय बिजली को अपनी ओर खींच लेते हैं.

बिहार सरकार द्वारा जारी वज्रइंद्र ऐप के अलावा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का ‘दामिनी’ नाम का एक ऐप भी है, जो वज्रपात से आधे घंटे से 45 मिनट पहले आगाह कर देता है. इस ऐप में भारतीय मौसमविज्ञान विभाग के मौसम स्टेशनों और लाइटनिंग डिटेक्शन सेंसरों के डेटा के आधार पर वज्रपात का अनुमान लगाया जाता है.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (एनडीआरएफ) द्वारा जारी एक जागरुकता वीडियो में लोगों को वज्रपात से बचने के उपाय बताये गये हैं. जिसके मुताबिक अगर आसमान में बिजली कड़क रही है और आप घर के बाहर हैं तो सबसे पहले सुरक्षित (मजबूत छत वाली) जगह तक पहुंचने का प्रयास करें.

1.अगर ऐसे संभव नहीं है तो तुरंत पानी, बिजली के तारों, खंभों, हरे पेड़ों और मोबाइल टॉवर आदि से दूर हट जाएं.

2.आसमान के नीचे हैं तो अपने हाथों को कानों पर रख लें, ताकि बिजली की तेज आवाज़ से कान के पर्दे न फट जायें.

3.अपनी दोनों एड़ियों को जोड़कर जमीन पर पर उकड़ू होकर बैठ जायें .

4.अगर इस दौरान आप एक से ज्यादा लोग हैं तो एक दूसरे का हाथ पकड़कर बिल्कुल न रहें, बल्कि एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें.

5.छतरी या सरिया जैसी कोई चीज हैं तो अपने से दूर रखें, ऐसी चीजों पर बिजली गिरने की आशंका सबसे ज्यादा होती है.

6. पुआल आदि के ढेर से दूर रहें, उसमें आग लग सकती है . आकाशीय बिजली की प्रक्रिया कुछ सेंकेड के लिये होती है, लेकिन उसमें इतने ज्यादा वोल्ट का करंट होता है जो आदमी की जान लेने के लिए काफी होता है. उसमें बिजली वाले गुण होते हैं तो वे वहां ज्यादा असर करती है, जहां करेंट का प्रवाह होना संभव होता है.

7.आकाश से गिरी बिजली किसी न किसी माध्यम से जमीन में जाती है, और उस माध्यम में जो जीवित चीजें आती हैं, उनको नुकसान पहुंचता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles