स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी डॉ जी जी पारीख के प्रेरणादायी जीवन को जानें

22 वर्ष पहले ट्रेन में चढ़ते समय गिर गए थे, तमाम हड्डियां टूट गयीं

डॉ जी जी पारीख के 98वें जन्मदिवस पर विशेष

-डॉ सुनीलम

30 दिसम्बर 2021 को डॉ जी जी पारीख जी का 98 वां जन्म दिवस है। मैं जी जी से मिलने जा रहा हूँ। जी जी से मिलना सदा प्रेरणादायी और ऊर्जा दायक होता है। देश और दुनिया को देखने की समझ भी बढ़ती है। 98 वर्ष की उम्र में जीजी की याददाश्त, उत्साह और कार्यक्षमता ज्यों की त्यों कायम है, जो सभी को आश्चर्यचकित करती है। ऐसे समय में जब बुजुर्गों को सलाह दी गई है कि वे घर के बाहर न निकलें , जीजी तारा (पनवेल) तो जाते ही है, युसूफ मेहर अली के नए कार्यालय, मुम्बई से लेकर पुणे तक जाने में तथा लोगों से मिलने जुलने में कोई संकोच नहीं है।
22 वर्ष पहले 12 जनवरी को मुलताई के कार्यक्रम में शामिल होकर जाते समय रेलवे स्टेशन पर ट्रैन में चढ़ते समय गिर गए थे तमाम हड्डियां टूट गई तब से आज तक जीजी के पैर से रोज मवाद निकाला जाता है, ड्रेसिंग भी होती है। सभी जीजी को ऑपरेशन कराने की सलाह देते हैं पर जीजी सबसे एक ही बात करते हैं कि मैं खुद पर खर्च नहीं करना चाहता। इसलिए वे ऑपरेशन नहीं कराते हैं। जो उनसे कहता है कि वह पैसा देने को तैयार है। वे उससे कहते हैं जनता वीकली, युसुफमेहेर अली सेंटर या अन्य कार्यों के लिए मुझे दे दो।

जीजी के अपने कमरे में टीवी नहीं है परंतु अखबार के माध्यम से देश और दुनिया से जुड़े रहते हैं। सुबह 3:00 से 4:00 के बीच उठ जाना, किताबें पढ़ना, ईमेल पर पत्रों के जवाब देना उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा है। कई बार 150 से अधिक मेल एक दिन में आज भी व्यक्तिगत स्तर पर लिख देते हैं।

कोरोना लॉकडाउन के पहले तक रोजाना क्लिनिक में इलाज करने के लिए बैठते थे। आजकल वहां खादी ग्रामोद्योग में बना सामान बेचने के लिए बैठते है । एक किस्म का जन सम्पर्क कार्यालय है।

पूरा जीवन केवल खादी के कपड़े और खादी ग्रामोद्योग की वस्तुओं का इस्तेमाल करते रहे हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित भी करते हैं। जी जी के सभी कार्यों में उनकी मदद गुड्डी करती हैं ।

जब 16 साल के थे तब 1942 के कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए थे। आंदोलन के दौरान जब कॉलेज बंद कराया तब उसके बाद गिरफ्तारी हो गई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजों की 10 महीने जेल काटी। इमरजेंसी के समय पत्नी मंगला बेन और बेटी सोनल के साथ जेल काटी। 1946 से शुरू हुई जनता वीकली को आज भी सतत रूप से प्रकाशित कर रहे हैं। 66 वर्ष पहले युसूफ मेहर अली सेंटर की स्थापना की। आज 11 राज्यों में इसकी इकाइयां कार्य कर रही है। उसकी अध्यक्ष उषा बहन और महामंत्री विजया चौहान हैं।

लिए पैसा इकट्ठा करने की अद्भुत क्षमता और कौशल रखते हैं। वे खुद को भिखारी कहते हैं तथा वे सदा चंदा जुटाने की मुहीम में लगे रहते हैं। चंदा जनता वीकली, यूसुफ मेहेर अली सेंटर से लेकर प्रवासी श्रमिकों को मदद देने, कच्छ से लेकर केरल तक के आपदा पीड़ितों के लिए हो सकता है।

जी जी ने समाजवादियों का जीवन कैसा होना चाहिए इसका आदर्श देश और दुनिया के सामने रखा है। जी जी किसी भी सार्वजनिक कार्य के लिए पैसा इकट्ठा करने की अद्भुत क्षमता और कौशल रखते हैं। वे खुद को भिखारी कहते हैं तथा वे सदा चंदा जुटाने की मुहीम में लगे रहते हैं। चंदा जनता वीकली, यूसुफ मेहेर अली सेंटर से लेकर प्रवासी श्रमिकों को मदद देने, कच्छ से लेकर केरल तक के आपदा पीड़ितों के लिए हो सकता है। जी जी से जो भी मिलने जाता है वह जीजी के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रभावित होकर जरूर कुछ न कुछ आर्थिक योगदान करता है। जी जी के ड्राइवर, खानसामा से लेकर सेंटर के कार्यकर्ता तक सब नियमित आर्थिक योगदान करते हैं। जी जी से जो भी एक बार मिलता है वह उनके परिवार का बन जाता है। सभी के सुख दुख में व्यक्तिगत स्तर पर शामिल होते हैं।

साधन की शुचिता को लेकर कोई भी समझौता नहीं करते। जी जी ने देखा कि युसूफ मेहर अली सेंटर के तारा केंद्र में 50 हजार पर्यटक आते हैं तब उन्होंने आने वाले लोगों को गांधी विचार से जोड़ने के लिए सेवाग्राम की तरह बा और बापू की कुटिया ज्यों की त्यों युसूफ मेहर अली सेंटर में बनवा दी। युसूफ मेहर अली सेंटर 6 स्कूल और 2 अस्पताल संचालित करता है। केंद्र के ग्रामोद्योग उत्पाद मुंबई में खासे लोकप्रिय है। जिसमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय घानी का तेल और साबुन है। जी जी, एस एम जोशी फाउंडेशन तथा खादी ग्रामोद्योग अभियान के संयोजक है।
जी जी ने समाजवादी रचनात्मक कार्य करने वाली संस्थाओं को जोड़कर ‘हम समाजवादी संस्थाएं’ का गठन किया है। पूंजीवाद और सम्प्रदायिकता से मुकाबला करने के लिए उनके ही जन्मदिन पर कई वर्षों पहले समाजवादियों, गांधीवादियों, सर्वोदयीयों, अम्बेडकरवादियों, वामपंथियों और जनांदोलनों को एकजुट करने के लिए बनाये गए समाजवादी समागम के प्रयास के वे संस्थापक, प्रेरणास्त्रोत और मार्गदर्शक हैं।

जी जी की प्रेरणा से देश में हजारों युवा रचनात्मक कार्यों से आज जुड़े हुए हैं। जी जी आजकल स्कूल फ़ॉर सोशलिज्म, कांडीखाल (उत्तराखंड) को मूर्त रूप देने के लिए प्रयासरत है। साथी जबर सिंह ने 2 मंजिला बिल्डिंग 30 वर्ष की लीज पर इस कार्य के लिए जनता ट्रस्ट को दे दी है। जी जी वहां समाजवादी विचार के प्रचार-प्रसार के लिए शार्ट टर्म और लांग टर्म कोर्स शुरू करना चाहते हैं।

जी जी युसूफ मेहर अली के मित्र रहे। मधु दंडवते और सुरेंद्र मोहन जी उनके सबसे करीबी दोस्त थे। जॉर्ज फर्नांडिस के साथ भी वे बड़ौदा डायनामाइट कांड में सह अभियुक्त रहे। सभी समाजवादियों के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध एवम सहकार्य रहा है।

जी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को स्थापित और तिरोहित होते देखा है। समाजवादी आंदोलन के उतार और चढ़ाव के साक्षी और भागीदार रहे हैं। इतने सबके बावजूद भी उनके मन में कभी निराशा पैदा नहीं हुई। जी जी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय अधिकतर साथियों का निधन हो चुका है।

वे अपने साथियों के परिवारों के साथ आज भी जुड़े रहते हैं। फिलहाल जी जी के संपर्क के साथियों की मौत की खबर उन्हें मिलती रहती है । इस सब के बावजूद भी वे स्थिरप्रज्ञ की स्थिति में रहकर निर्विकार भाव से अपने काम में हर क्षण लगे रहते हैं।

  • जी जी का सबसे ज्यादा लगाव हिन्द मज़दूर सभा और राष्ट्र सेवा दल से है। वे मानते हैं कि इन दोनों संगठनों के इर्द गिर्द ही समाजवादी आंदोलन को फिर से खड़ा किया जा सकता है।
  • जी जी का कहना है कि आज समाजवादी देश में अपनी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं ऐसे समय मे समाज के बीच सघन काम करने की पहले से ज्यादा आवश्यकता है।
  • उनका कहना है समाजवादियों को अपनी जमीनी ताकत और जनाधार बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। इस संदर्भ में उनकी सबसे ज्यादा उम्मीद मेधा पाटकर जी से है।
  • पर्यावरण संकट, सर्व धर्म समभाव, खादी ग्रामोद्योग, अंतरराष्ट्रीय समाजवादी आंदोलन जी जी के प्रिय विषय हैं।
  • 1946 से जनता वीकली प्रकाशित कर रहे है । नीरज जैन और गुड्डी द्वारा नियमित वीकली प्रकाशित की जा रही है।
  • जी जी खुद सोशलिस्ट पार्टी इंडिया के सदस्य हैं।
  • जी जी की प्रेरणा से 19 महीनों से बहुजन संवाद चल रहा है ।
  • जी जी शतायु हों और स्वस्थ्य रहें, हम सब यही कामना करते हैं।

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