ऑनलाइन बाजार में बदल जायेंगे भारत के बाजार!

पटरी वाला बाजार भी अब स्मार्टफोन पर लगेगा!

दिनेश कुमार गर्ग। क्या ग्लोबल ऑनलाइन परिवर्तन की लहर से भारत में बाजार के समाप्त होने या रूपांतरित होने का अवसर आया है।

क्या पटरी पर लगने वाला बाजार भी अब स्मार्टफोन पर लगने लगेगा? 

आनलाइन मार्केट बाजार, पटरी बाजार और मेले का नया रूप है।

यहां लोगों को वस्तुएं, मनोरंजन की सुविधाएं परंपरागत बाजारों व मेलों की तरह घर बैठे मिलने लगी हैं।

सुदूर अतीत में भारत ऐसे गांवों और शहरों से बनता था जिसमें गांव 90 प्रतिशत और कस्बे व शहर 50 प्रतिशत तक आत्मनिर्भर होते थे।

तब मानव आवश्यकताओं ने परंपरागत बाजारों को जन्म दिया था।

पर जैसे-जैसे अब भारत बदल रहा है, बाजार भी नित नये रूप लेने लगा है। 

स्मार्टफोन और नेट की गांव-गांव तक सर्वसुलभता ने अपनी मुट्ठी में सिमटे ऑनलाइन बाजार को लोकप्रिय करना शुरू कर दिया है।

भारत में बाजार के रूप

भारत में बाजार के अनेक रूप रहे हैं।

ग्रामीण बाजार किसी भी गमनागमन सुलभ जगह पर विक्रेताओं और क्रेताओं के सम्मिलन बन जाता है।

सप्ताह के एक या दो दिन घंटे-दो घंटे से लेकर दिनभर का ग्रामीण बाजार लगा करता है। 

क्षेत्रीय पसंद के अनुसार बाजार का कोई भी दिन लोग चुन लेते हैं।

और फिर उस दिन या दिनों में खरीद-फरोख्त के लिए लोग एकत्र होते रहते हैं।

कोई नोटिस नहीं, कोई व्यवस्था नहीं, यद्यपि कस्बे या बडी़ बाजारों में स्थानीय टैक्स के बदले नाममात्र की व्यवस्था भी की जाती है।

इन व्यवस्थाओं में विक्रेताओं के बैठने का स्थान और उसकी सीमा, पीने के पानी की मामूली व्यवस्था ही होती है।

क्रेताओं-विक्रेताओं के शौचादि की व्यवस्था होती नहीं और हुई भी तो रस्म अदायगी के तौर पर। 

नगरीय बाजारों में विक्रेताओं की अपनी व्यवस्था होती है।

नगरपालिकाएं केवल पटरी दुकानदारों को टैक्स के बदले बैठने की जगह देती है।

क्योंकि ऐसे बाजार परंपरागत ढंग से नगरीकरण के पूर्व से लगते आये हैं।

पर आधुनिक नगरों में पटरी दुकानदारों की जगह नहीं है। 

बहरहाल, अब बाजारों के भौतिक रूप में अब बदलाव आ रहा है।

इससे लगता है कि शीघ्र ही चुनिंदा वस्तुओं के अलावा हजारों अन्य वस्तुओं के लिए भी दुकानों की नहीं, केवल गोदामों और डिलीवरी सिस्टम विकसित करने की जरूरत होगी।

अब बाजार वर्चुअल/डिजिटल युग में प्रवेश कर गये हैं।

बाजार के बनिये और तराजू की जगह अब पार्सल ने ले ली है।

बाजार के सामानों की गुणवत्ता और मूल्य की ठोस जानकारी के लिए मार्केट सर्वे की जगह ऑनलाइन सर्फिंग ने लेना शुरू किया है। 

इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क तैयार हुए है।

उनमें अमेरिकी कंपनी अमेजन और वालमार्ट के  इंडियन ओरिजिन की फ्लिपकार्ट है। फ्लिपकार्ट एक भारतीय कंपनी है।

जियो प्लेटफॉर्म के आने से बढ़ेगी स्पर्धा

अब एक दूसरी भारतीय कंपनी रिलायंस इण्डस्ट्रीज की रिलायंस रिटेल ने भी जियो मार्ट प्लेटफार्म तैयार किया है। 

भारतीय ऑनलाइन रिटेल बाजार 600 बिलियन डॉलर (लगभग 4 लाख 22 हजार करोड़ रुपये) का है।

इस कंपनी ने इस बाजार में प्रवेश कर बता दिया है कि जल्दी ही “आपकी मुट्ठी में बाजार” के एक बडे़ हिस्से में कड़ा कम्पिटीशन होने वाला है।

जियो मार्ट एक नया खिलाडी़ है और पूंजी-प्रबल  न होने से अमेजन व फ्लिपकार्ट का मुकाबला नहीं कर पा रहा था।

पर बीते मंगलवार को प्राइवेट इक्विटी महाकंपनी सिल्वर लेक पार्टनर्स ने अपने सहयोगी निवेशकों के साथ रिलायंस के जियो प्लेटफार्म में 7500 करोड़ रुपये के निवेश का निर्णय/करार किया है।

सिल्वरलेक पार्टनर्स ने रिलायंस रिटेल में पहले ही  10200 करोड़ रुपये का निवेश कर रखा है।

इस बडे़ पूंजी निवेश से अब जियो प्लेटफार्म के नेटवर्क का महाविस्तार होगा।

साथ ही अनेक ग्लोबल प्लेयर्स को भारत के आनलाइन मार्केट में आने व प्रतियोगिता बढा़ने का आकर्षण पैदा होगा।

पर क्या इससे भारत के परंपरागत बाजार की जगह समाप्त होगी? यह बड़ा सवाल है। परंपरागत बाजार जो पटरियों पर सजता है, वह लोकल उद्यमियों  के प्रयासों का फलीभूत स्वरूप होते हैं।

क्या वे बेरोजगार नहीं होने लगेंगे?

और यदि वे भी आनलाइन कार्पोरेट नेटवर्क के डिलीवरी सिस्टम के अंग बनते हैं तो क्या वे डिग्रेड नहीं होंगे? 

ये ऐसे प्रश्न हैं जो तेजी से बदलती दुनिया में बदलाव विरोधी सोच को परिलक्षित करते हैं।

टेक्नोलॉजी ने अगर दुनिया बदली है, आदतें, व्यवहार और कार्य का तरीका बदला है तो हमें रूपांतरण के लिए तैयार होना ही पडे़गा।

और पुरातनता से उतना ही रिश्ता रखने का अवसर मिलेगा जितना बदलाव की गति के साथ बच सके।

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