चीन से बिजली उपकरणों का आयात बंद

कम्प्यूटर सोफ्टवेयर से संचालित इन उपकरणों से तमाम सूचनाएँ लीक हो सकती हैं.

(राम दत्त त्रिपाठी, राजनीतिक विश्लेषक) केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने आज राज्यों के बिजली मंत्रियों के साथ सम्मेलन में घोषणा की कि अब चीन से कोई बिजली उपकरण  उपकरण नहीं ख़रीद जाएगा.

इसके लिए चीन  का नाम उन सात देशों की सूची में जोड़ा जाएगा, जिनसे सामान आयात करने से पहले भारत सरकार की अनुमति ली जाती है.

अब तक ये देश थे पाकिस्तान, सूडान, अफगानिस्तान, , ईरान , इराक़, नाइजेरिया और सोमालिया. ये सभी वे देश हैं जो आतंकवाद से प्रभावित हैं.

अब इनमें चीन का नाम जोड़ दिया जाएगा. इसकी औपचारिकता गृह विभाग द्वारा की जानी है.

अगर चीन से बिजली का उपकरण ख़रीदना है पड़ा तो भारत सरकार से पूर्व अनुमति ली जाएगी.

 विशेष प्रयोगशालाओं में इस बात की जाँच की जाएगी की उनके अंदर कोई ट्रोजन हार्स या मैलवेयर तो नहीं छिपाया गया जिसे गोपनीय सूचनाएँ जा सकें या सिस्टम ठप्प किया जा सके.

भारत सरकार को  इस बात का एहसास हो गया है कि कम्युनिस्ट साम्राज्यवादी और विस्तारवादी चीन न केवल लद्दाख़ में भारतीय सीमा, बल्कि अपने विद्युत और संचार उपकरणों के माध्यम से देश की सुरक्षा, यातायात, संचार और स्वास्थ्य सेवाओं में अंदर घुसा है.

 वह कभी – भी देश के लिए गंभीर ख़तरा पैदा कर सकता है.

इसे ध्यान रखते हुए अब चीन से कोई बिजली उपकरण न ख़रीदने का निर्णय किया गया है.

आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि बिजली, उत्पादन, पारेषण और वितरण सभी में लगभग हर जगह चीनी कम्पनियों को ठेके दिए गये हैं,.

ये  रिमोट से चलते हैं. न केवल सब स्टेशन बल्कि चीन के बिजली मीटर घर घर में लगे हैं.

जानकार लोगों के अनुसार कम्प्यूटर सोफ्टवेयर से संचालित इन उपकरणों से तमाम सूचनाएँ लीक हो सकती हैं.

उदाहरण के लिए किसी आयध कारख़ाने में क्या और कितना बन रहा है, अथवा सेनाओं का आवागमन किधर है.

सबसे आसान है पूरा पावर सप्लाई ग्रिड ठप कर देना.

बिजली एक ऐसी आवश्यक वस्तु है जो रक्षा, वायु सेवा, परिवहन और हेल्थ सब जगह है.

इन सबकी कुंजी एक तरह से चीनी कम्पनियों के पास है.

ऊर्जा मंत्रालय में निदेशक गौतम घोष ने सम्मेलन से पहले ही कल एक आदेश जारी करके कहा था कि बिजली सप्लाई एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण ढाँचा है.

 यह न केवल स्वास्थ्य, सुरक्षा, एमरजेंसी सेवाओं, हेल्थ और आपदा प्रबंधन को सपोर्ट करता है .

,इसमें गोपनीय सूचनाएँ, रक्षा संस्थान , उत्पादन, परिवहन और एक प्रकार से पूरी अर्थव्यवस्था शामिल है.

इसलिए सूचीबद्ध देशों से बिजली उपकरण नहीं ख़रीदे जाएँ और अगर ख़रीदने पड़ें तो गहन जाँच हो.

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