नेपाल भारत से मधुर संबंध का पक्षधर , लेकिन हल हो सीमा विवाद

नेपाल टास्क फोर्स की बैठक में सुगौली संधि के तहत भारत से सीमा विवाद हल करने की अपील

 यशोदा श्रीवास्तव

काठमांडू में सत्ता रूढ़ दल के टास्क फोर्स की बैठक में भारत नेपाल के मध्य सीमा विवाद के हल में रुचि  न लेने का भारत पर बड़ा आरोप लगाया गया है।इसीके साथ लिपुलेख, लिंपियाधुरा तथा कालापानी पर जारी नक्शा को वाजिब ठहराते हुए इससे पीछे हटने से साफ मना कर दिया है। इस सबके बीच नेपाल सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि नेपाल हर हाल भारत से विवाद रहित मधुर संबंध का पक्षधर है।

मालुम हो कि सत्ता को लेकर ओली और प्रचंड के बीच लंबे समय से जारी तनाव को काफी हद तक सुलझा लिया गया है। संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में प्रचंड समर्थकों को शामिल करने की संभावना के साथ चर्चा है कि ओली पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने को राजी हो गए हैं।अध्यक्ष प्रचंड के बनाए जाने पर स्टैंडिंग कमेटी में एक राय है। 

इसके पहले सत्ता रूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (सीपीएन) के महासचिव बिष्णु पोडेल द्वारा बुलाई गई टास्क फोर्स की बैठक में नेपाल-भारत सीमा मुद्दे पर व्यापक विचार विमर्श हुआ।नेपाल राजनीति के जानकारों के अनुसार इस बैठक के पीछे प्रचंड की मंशा का टोह लेना था जो ओली के भारत विरोधी बयानों को गैरवाजिब मानते थे। टास्क फोर्स की बैठक में भारत के संबंध में पारित प्रस्ताव पर फिलहाल प्रचंड की अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।टास्क फोर्स की बैठक में भारत नेपाल संबंधो के ताजा हालात पर कई प्रस्ताव पारित किए गए हैं। बैठक और प्रस्ताव का मकसद सरकार और पार्टी में एक जुटता दर्शाना है।

 टास्क फोर्स द्वारा प्रस्तुत 17 पेज की रिपोर्ट में सत्ता रुढ़ दल के  भीम रावल, सुरेंद्र पांडे, जनार्दन शर्मा, शंकर पोखरेल और पम्पा भुसाल ने सीमा मुद्दे को हल करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। कहा गया कि“नेपाली लोग पंचशील के सिद्धांतों, संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों पर आधारित एक सहज, समस्या-मुक्त और भरोसेमंद नेपाल-भारत संबंध के पक्ष में हैं। नेपाल सरकार फिर से भारत से ऐतिहासिक तथ्यों का सम्मान करने का आग्रह करती है, वह इस तथ्य को स्वीकार करे कि काली (महाकाली) के पूर्व के सभी क्षेत्र सुगौली संधि के अनुसार नेपाल से संबंधित हैं।भारत नेपाल की भौगोलिक अखंडता का सम्मान करे।

टास्क फोर्स द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि नेपाल और भारत के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा का निर्धारण1816 की सुगौली संधि और 1860 और 1875 की संधियों द्वारा किया गया है। स्पष्ट है कि सुगौली संधि के अनुच्छेद 5 में उल्लिखित काली (महाकाली) नदी से नेपाल की पश्चिमी सीमा को बदलने के लिए दोनों देशों के बीच कोई संधि या समझौता नहीं हुआ है।  दोनों राष्ट्रों के बीच की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं संबंधित देशों के बीच अपनाई जाने वाली औपचारिक संधियों के अलावा किसी भी चीज से प्रभावित नहीं हो सकती हैं और किसी भी राष्ट्र के एकतरफा निर्णय अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को नहीं बदल सकते।

 भारत द्वारा1960 के दशक के बाद से नक्शे में एकतरफा फेरबदल कर वहां अपनी सुरक्षा चौकी स्थापित कर लिम्पीयाधुरा, लिपुलेक और कालापानी इलाकों(महाकाली) नदी के पूर्व के हिस्से पर अनाधिकृत कब्जा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत ने खुद ही सुस्ता व कालापानी को एक ऐसी समस्या के रूप में स्वीकार किया था जो दोनों देशों के बीच अनसुलझे हैं।  दोनों देशों के बीच समस्याओं के समाधान के लिए भारत पर रुचि न लेने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि नेपाल की ओर से बार-बार किए गए अनुरोध को भारत ने तवज्जो  नहीं दिया और न ही दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठक पर विचार किया।टास्क फोर्स की बैठक में भारत से नेपाल के कथित भूक्षेत्रों को कब्जा मुक्त करने का आग्रह किया गया। हैरत है कि नेपाल ने भारत पर अपने भूक्षेत्र पर अतिक्रमण का आरोप तब लगा रहा है जब बिहार सीमा पर उसने स्वयं 71हजार एकड़ भूक्षेत्र पर कब्जा कर रखा है।

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