जब तड़प हमारे भीतर हो, गुरु ज्ञान हमारा ही बल है।

 

Urvashi Upadhyay “Prerna” Prayagraj

गुरु वंदन, गुरु अभिनंदन,
गुरु ज्ञान नहीं है संबल है।
हो तड़प हमारे भीतर तब
गुरु ज्ञान हमारा ही बल है।
जब मृगतृष्णा में भटके म
तब दिशा दिया वह संयम है।

जब जग के बंधन उलझा दे,
और हम भीतर से बिखरे हो।
जब किसी राह पर राही हो,
हर राह बंद ही दिखती हो।
ऐसे में कोई ज्योतिपुंज,
जो कहीं नजर आ जाए तब,
समझो अपना वही लक्ष्य है,
सफल हुआ आराधन है।
क्षीण हुई काया में भी,
अभिव्यक्त हुआ स्पंदन है।

गुरु वंदन है अभिनंदन है,
गुरु ज्ञान नहीं है संबल है।
जब तड़प हमारे भीतर हो
गुरु ज्ञान हमारा ही बल है।

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…. उर्वशी उपाध्याय’प्रेरणा’

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