केवल बोली केवल भाषा नहीं है हिंदी।

केवल बोली केवल भाषा नहीं है हिंदी
जीवन को सहज सुगम पथ पर
चलते रहने को प्रेरित करती है हिंदी
सभ्यता संस्कृति परम्परा का बोध है हिंदी
सत्ता की नहीं है रानी पटरानी हिंदी
मजदूर किसानो कामगारों की माई है हिंदी
प्रांत प्रान्त की बोली भाषा को
एक सूत्र में पिरो रही मालिन है हिंदी
वृज अवधी बुंदेली भोजपुरी उर्दू
दक्खिनी राजस्थानी के वैविध्य बोध
का सारतत्व है हिंदी

भारत देश की बोली भाषा की ठाट है हिंदी
जन जन के राग विराग दुःख -सुख की
भाव अनुभाव की सोच है हिंदी
नहीं विशिष्टता का दम्भ
शोषित पीड़ित दलित का उदगार है हिंदी
तुलसी सूर कबीर रहीम बिहारी
रसखान भारतेन्दु पंत निराला महादेवी जैसे
अनगित साधक की साधना आराधना है हिंदी
भारत की माटी की सोंधी सोंधी
महकों की अभिव्यक्ति है हिंदी
पछुंआ पुरवा बहती बयारों का सन्देश है हिंदी
खेतों में झूम रही रंग बिरंगी फ़सलों के
फूलों बालियों की मुस्कान है हिंदी
जन जन के उच्छवासों की भाषा हिंदी
संकल्पों की प्रवाहमान धारा हिंदी
माँ भारती के माथे की बिंदी है हिंदी
अभिनन्दन माँ हिंदी
वंदन नागरी आराधन जननी हिंदी

विश्व पटल पर हिंदी(Opens in a new browser tab)

डा. चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज
डा. चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज

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