किसान कानूनों पर सरकारी झूट

-हिसाम सिद्दीकी

नई दिल्ली! किसान बिलों को वापस लेने के लिए मोदी हुकूमत किसी भी कीमत पर तैयार नहीं है तो दूसरी तरफ किसान भी सरकार के सामने किसी भी कीमत पर झुकने के लिए तैयार नहीं है। आठ दिसम्बर को महज दो-तीन दिन के नोटिस पर किसानों ने जो भारत बंद कराया उससे हुकूमत की बेचैनियां तो बढी दोपहर बाद ही होम मिनिस्टर अमित शाह ने किसान लीडरान के साथ बातचीत करने का फैसला किया। उन्हें यह उम्मीद थी कि देश के मुसलमानों की तरह वह किसानों को भी अपने दबाव में ले लेंगे। देर रात तक चली इस मीटिंग का कोई नतीजा नहीं निकल सका क्योकि अमित शाह ने किसान लीडरान से दो टूक कह दिया कि किसान कानून वापस लेने का तो सवाल ही नहीं होता है इनमें कुछ तरमीम (संशोधन) जरूर हो सकती है। मोदी किसान बिल वापस ले भी नहीं सकते है। क्योकि लोक सभा में बिल आने से महीनां पहले ही उनके दोस्त गौतम अडानी ने बिहार के कटिहार से मध्य प्रदेश के कई जिलों में बड़े-बड़े गोदाम बनाने शुरू कर दिए थे जो बनकर तैयार हो चुके हैं। हरियाणा में उन्होने सौ एकड़ जमीन कब्जा की है जिसमें गोदाम बनने का काम जारी है। वहां तक उनकी प्राइवेट रेलवे लाइन बना दी गई है। मोदी समेत पूरी बीजेपी किसान बिलों पर सिर्फ झूट बोल रही है। तीस नवम्बर को रेडियो पर ‘मन की बात’ करते हुए मोदी ने महाराष्ट्र के धुले जिले के एक किसान जितेन्द्र भोई का जिक्र बड़े जोर-शोर से यह कहते हुए किया था कि नए कानून का सहारा लेकर जितेन्द्र भोई ने खरीददार के पास फंसे मक्का की कीमत के पैसे वसूल लिए। इस मामले में मोदी ने नव्वे फीसद झूट बोला। आठ दिसम्बर को देर रात तक अमित शाह के साथ चली मीटिंग में किसानों ने सरकार की बात नहीं मानी तो गुस्से में अमित शाह ने नौ दिसम्बर को किसानों के साथ होने वाली बातचीत कैंसिल करा दी।

नौ दिसम्बर को सरकार ने मीटिंग कैसिल की और आठ दिसम्बर को अमित शाह का जो डिक्टेटराना रवैय्या रहा उससे नाराज किसानों ने नौ दिसम्बर को सुबह मीटिंग करके फैसला किया कि अब वह दिल्ली बार्डर नहीं छोड़ेगे। बारह दिसम्बर को दिल्ली-जयपुर हाईवे बंद करेगे, उस दिन देश भर के टोल प्लाजा पर कोई वसूली नहीं होने देगे सारे टोल प्लाजा फ्री रहेंगे। चौदह दिसम्बर को पूरे मुल्क में एहतेजाजी मुजाहिरे किए जाएंगे साथ ही बीजेपी लीडरान का घेराव होगा। नौ दिसम्बर को सरकार ने बात करने के बजाए काश्तकारों के पास लिखकर छः प्वाइंट भेजे और कहा कि उनके मुताबिक हम बिलों में तरमीम (संशोधन) कर सकते हैं। किसानों ने साफ जवाब दे दिया कि उन्हें तीनों किसान बिल वापस लिए जाने के अलावा दूसरी कोई तजवीज मंजूर नहीं है। अपने दोस्त गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के लिए पूरा देश लुटाने के लिए तैयार बैठे वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और मुल्क की किसान यूनियनों दोनों के सख्त रवैय्ये की वजह से देश और देश के लोगों को जबरदस्त खसारा उठाना पड़ रहा है। मोदी यह भूल जाते हैं कि किसानों ने सिंधु बार्डर पर जिस हाई वे को बंद कर रखा है उसी के जरिए दिल्ली और मुंबई के दरम्यान ट्रकों के जरिए माल की ढुलाई होती है। अभी तो ट्रक वाले भी किसानों की हिमायत में खड़े हैं लेकिन कब तक? अगर मुंबई के लिए जाने वाला तमाम जरूरी सामान कई महीनों तक न जा सका तो बाजारों, व्यापारियां और सारफीन (उपभोक्ता) का क्या हाल होगा?

वैसे तो वजीर-ए-आजम मोदी कांग्रेस और दूसरी अपोजीशन पार्टियों पर बार-बार किसानों को वरगलाने और गुमराह करने का इल्जाम लगा रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि इन बिलों के सिलसिले में किसानों को गुमराह करने और उनसे सबसे ज्यादा झूट बोलने का काम खुद मोदी ही कर रहे है। तीस नवम्बर की मन की बात में उन्होने कहा कि धुले के जितेन्द्र भोई ने अपनी मक्का बेची थी, खरीददार ने उनके पैसे नहीं दिए तो इसी कानून का सहारा लेकर उन्होने अपने पैसे वसूल किए। मोदी की इतनी बात तो ठीक थी कि जितेन्द्र भोई ने पैसा वसूलने के लिए इस कानून का सहारा लिया लेकिन उनके साथ और जो ज्यादतियां हुई उसका जिक्र मोदी ने नहीं किया। वह यह समझ रहे थे कि वह झूट बोलकर आसानी से निकल लेंगे लेकिन सोशल मीडिया की मुस्तैदी ने उन्हें फंसा दिया। आर्टिकल 19 के नवीन कुमार ने पूरे मामले की तहकीकात की तो पता चला कि जितेन्द्र भोई को मक्का की एमएसपी अटठारह सौ पचास (1850) रूपए कुंटल की कीमत मिलने के बजाए व्यापारी ने सिर्फ बारह सौ चालीस (1240) रूपए कुटल में ही खरीद लिया। जितेन्द्र भोई को अपनी बची हुई सत्तर कुंटल मक्का इससे भी कम पैसों में बेचनी पड़ी। मध्य प्रदेश के व्यापारी से जितेन्द्र भोई को अपना पैसा वसूलने में इसलिए कामयाबी मिली कि व्यापारी ने उन्हें जो चेक दिया था वह ‘बाउंस’ हो गया था। अब वह भी किसान आंदोलन में शामिल हैं।

मोदी ने जिन जितेन्द्र भोई का जिक्र किया उसके जरिए व्यापारी से पैसा वसूलने की कार्रवाई के दौरान मोदी के नए जरई कानूनों की फिर एक बार पोल पट्टी खुल गई। अव्वल तो किसान को एमएसपी के हिसाब से मक्का की कीमत नहीं मिली दूसरे उसकी शिकायत उसके अपने इलाके के एसडीएम ने नहीं सुनी। उन्होने कहा कि यह काम हमारे दायरा ए अख्तियार (अधिकार क्षेत्र) में नहीं आता है। आप तो वहां के एसडीएम के पास जाइए जहां व्यापारी रहता हो। जितेन्द्र भोई को मध्य प्रदेश में व्यापारी के इलाके के एसडीएम के पास जाना पड़ा। उन्होने जितेन्द्र से कहा कि अगर आपके पास व्यापारी का दिया हुआ ‘बाउंस’ हो चुका चेक न होता तो हम आपकी कोई मदद नहीं कर पाते। अपने कानून की यह अहम खामी मोदी छुपा रहे हैं। क्योकि उन्होने जानबूझ कर ऐसा कानून ही बनवाया है। अब अगर उत्तर प्रदेश के किसी भी हिस्से की पैदावार अंबानी और अडानी की कम्पनियां खरीदती हैं और किसानों का पैसा नहीं देती हैं तो मोदी के इस कानून के मुताबिक किसान को अपनी शिकायत लेकर मुंबई और गुजरात के एसडीएम के पास जाना होगा। वहां से उन्हें इंसाफ मिलेगा या वहां के एसडीएम पर अडानी और अंबानी का दबदबा चलेगा। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। मोदी ने जितेन्द्र भोई का जिक्र तो कर दिया लेकिन यह नहीं बताया कि भोई ने 29 सितम्बर को पैसा न मिलने की शिकायत एसडीएम से की तो उन्हें सोलह नवम्बर को पैसा मिल सका, जबकि मोदी का कानून एक महीने में भुगतान की गारंटी देता है।

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