सरकार मूल समस्याओं शिक्षा , रोज़गार और स्वास्थ्य पर ध्यान दे

 दिलीप कुमार ,

सीनियर एडवोकेट , इलाहाबाद हाईकोर्ट                                                                      

दिलीप कुमार

हमारे नेतृत्व /सरकार द्वारा अपनी बातों को चतुराई से रख देने से धरातल की समस्याओं को नजर अन्दाज नहीं किया जा सकता। कोई पूर्ण बहुमत से चुनी हुई सरकार जनता के मौलिक मुद्दों को छोड़ कर या नजर अन्दाज़ करके अपने मनमाने पन और निरंकुशता को नही अपना सकती,उसे अपनी नीतियों पर मन्थन करना ही होगा। स्वतंत्र निर्णय लेने की ताकत पर स्वच्छंद निर्णय नहीं हो सकता इसमें जागरुक नागरिक को हस्तक्षेप तो करना ही चाहिए। विपक्ष जब कमजोर हो तो सरकार की भूमिका अपने नागरिको के प्रति और जवाबदेह हो जाती है न कि irresponsible,साथ ही repeated mandate के नाम पर अपनी आर्थिक विफलता को पाटने के लिए अपनायी जाने वाली निजीकरण और पूंजीवाद का समर्थन नहीं किया जा सकता। शैक्षिक संस्थानों में जहां हमारा छात्र/नौजवान/नयी पौध राष्ट्र- निर्माण के लिए पढ़/तैयार हो रहा है वहां दमन और भय- आतंक फैलाकार हम उन्हें कहाँ ले जाना चाहते है,काफी गम्भीर और सोचनीय है। देश में अगर नौजवान तबके से नेतृत्व/विकल्प उभर रहा हो तो उसे सिंचित न कर राष्ट्र द्रोही के नाम पर हर किसी को दबाया नहीं जा सकता। किसी भी धर्म के अनुयायियों में अगर डर पैदा किया जायेगा तो वह संगठित होता है और उसके लिए वह रास्ता भी गलत चुनने लगता है जो विभिन्न समस्याओं को जन्म देती हैं और मूल समस्या प्राथमिक नहीं रह जाती है।

मेरा स्पष्ट मत है कि आज भारतीय नागरिकों का वोट विगत सरकार के 5 वर्ष के कार्य का मूल्यांकन न होकर तत्समय पैदा हुई किसी घटना /परिस्थिति का परिणाम भर रह गया है जो राजनीतिज्ञों में डर नहीं पैदा कर रहा। आज यह पुनः सार्वभौम सत्य सिद्ध हुआ है कि सरकार अपने नागरिकों की मूल समस्या शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य पर अगर सारा विकास केन्द्रित करे तभी जन का कल्याण है जो सरकार की प्राथमिकताओं में नहीं है। सबका साथ और कुछ खास का विकास नहीं चल सकता। हिन्दू -मुस्लिम हमारी प्राथमिकता नहीं हो सकती ना ही किसी समस्या को धार्मिक चोला पहना कर छोड़ा जा सकता है।हमारे द्वारा पूर्ण बहुमत से चुनी हुई सरकार को पूर्व की सरकारों की कमियों को गिनने में वक्त जाया न करके उसे सुधार और जनता की मूलभूत समस्याओं शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के नये उपक्रम में ध्यान देना चाहिए।

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