बनारस में गंगा का हरा जल : डी एम ने जाँच बैठायी

बनारस में गंगा नदी में बड़ी मात्रा में हरे शैवाल की जाँच करनें के लिए जिलाधिकारी वाराणसी नें पाँच सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया।

वाराणसी/लखनऊ हाल के दिनों में मोक्षदायिनी गंगा नदी में वाराणसी में गंगा जल का हरा होना चिंता का कारण बन गया है . नदी में मिल रहे हरे शैवाल बड़ी चिंता का विषय बनें हुए हैं।

जिलाधिकारी, वाराणसी कौशल राज शर्मा ने गंगा में हरे शैवाल की जाँच के लिए पाँच सदस्यीय जाँच कमिटी का गठन किया है। 

जिलाधिकारी, वाराणसी द्वारा पाँच सदस्यीय गठित कमिटी में अपर नगर मजिस्ट्रेट( द्वितीय) , क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड , सहायक पुलिस आयुक्त ( दशाश्वमेध) , महाप्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण ईकाई व अधिशासी अभियंता बंधी प्रखंड को शामिल किया गया है।

गठित जाँच टीम जल पुलिस की नाव के माध्यम से गंगा नदी की धारा में जाकर गंगा नदी में हरे शैवाल पाये जाने के सम्बन्ध में इसके उद्गम, श्रोत तथा गंगा घाटों तक इनके पहुंचने के कारणों की जाँच करेगी ।टीम के अधिकारियों को 10 जून को शाम तक जाँच रिपोर्ट (फोटो, विडियो रिपोर्ट सहित) व निवारण के ऊपाय उपलब्ध कराने का निर्देश जिलाधिकारी नें दिया है।


जाँच टीम में प्रशासन से बाहर का कोई व्यक्ति शामिल नहीं हैं जबकि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों , नदी विशेषज्ञों ने जल प्रदूषण पर गंभीर सवाल उठाये हैं .

इन लोगों का कहना है कि हरी शैवाल कहीं बाहर से नहीं आयी बल्कि ललिता घाट पर भारी भरकम पक्के निर्माण से जल के ठहराव और पीछे से अत्यधिक प्रदूषित सीवरेज आने से यह स्थिति आयी है .

बनारस गंगा नदी के ललिता घाट पर नदी धारा में पक्के निर्माण से पानी में ठहराव

समझा जा रहा है की बनारस में गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उच्च न्यायालय अधिवक्ता, सौरभ तिवारी द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रधान पीठ , नई दिल्ली में याचिका डालनें के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है . याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जल्द सुनवाई होनीं है।

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