आत्मनिर्भर भारत’ : केवल ‘भ्रमित’ नागरिकों  की समझ के लिए 

श्रवण गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार

‘श्रवण गर्ग,  

पूर्व प्रधान सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नई दुनिया 

1: नागरिक अपने सभी कष्टों के लिए अब स्वयं ही ज़िम्मेदार होंगे।हर क़िस्म की पूछताछ भी अब नागरिकों को स्वयं से ही करनी पड़ेगी।

2: हाल के उत्साहवर्धक परिणामों को देखते हुए नागरिकों को लम्बी-लम्बी पैदल यात्राएँ करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

3: जो नागरिक घरेलू चिकित्सा के ज़रिए महामारियों से अपनी जानें बचा लेंगे उन्हें सरकारों द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

4: नागरिकों को ध्यान रखना होगा कि केवल ‘लोकल’ को ही ‘ग्लोबल’ बनाना है ,उल्टा नहीं होने देना है।वैवाहिक सम्बन्धों को छोड़कर।

5: आत्मनिर्भर होने का अर्थ यह नहीं होगा कि राजनीतिक फ़ैसले भी नागरिक ही लेने लगेंगे।इस सम्बंध में व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी।

6: ‘लोकल’ को प्रोत्साहन का मतलब विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं माना जाएगा।पनडुब्बियों, विमानों, आदि का आयात जारी रहेगा।

7: राष्ट्र अगर ‘आत्मनिर्भर’ नहीं हो पाता है तो उसे नागरिकों की ही असफलता माना जाएगा ।शासकों की विफलता नहीं बताया जाएगा।

8: ‘आत्म निर्भरता’ का मूल मंत्र ‘संकट’ को ‘अवसर’ में बदलना है।यह लड़ाई चूँकि जनता की है, इस बार  उसे ही उसका नायक बनाया जा रहा है।

9: आत्मनिर्भरता का मतलब आपस में मिलकर काम करना नहीं होगा।जो दूरियाँ आपस में बढ़ा दी गई है, उसमें और भी वृद्धि करते जाना है।

10: धीरे-धीरे इसी सोच पर पहुँचना होगा कि ‘लॉक डाउन’ केवल एक मानसिक स्थिति है।इससे आगे आने वाले सभी संकट अच्छे से बर्दाश्त कर सकेंगे।

11: अंत में यह कि महामारी चाहे ‘ग्लोबल’ हो और उससे निपटने में चाहे दुनिया लगी हो ,नागरिकों को तो उससे ‘लोकल’ मानकर ही निपटना है।

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