पूर्व सैनिकों का राष्ट्र निर्माण में हो योगदान

लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन में चर्चा का विषय

लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन में आज, “पूर्व सैनिकों का राष्ट्र निर्माण में संभावित योगदान” विषय पर आयोजित परिचर्चा में, सफल उद्यमी एवं लेखक, कर्नल आर एस सिद्धू की पुस्तक “सक्सेस फ्रॉम बीइंग मैड” पर अन्य पूर्व सैनिकों ने, जो विभिन्न व्यावसायिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में अपनी सफलता से पहचान बना चुके हैं, एकमत से पूर्व सैनिकों से राष्ट्र निर्माण में योगदान करने का आह्वान किया.

उन्होंने इस संदर्भ में विकसित देशों, खासकर अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि किस प्रकार, वहां पूर्व सैनिक, उद्यमियों के रूप में हजारों नौकरियां सृजित कर, अपने संस्थानों के माध्यम से अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. वहां हजारों की संख्या में पूर्व सैनिकों द्वारा संचालित परामर्श दात्री समितियां हैं, जो न केवल सरकार को बल्कि अन्य उद्यमियों को परामर्श देती रहती हैं.

कर्नल नरेश बाना के नेतृत्व वाली कंपनी ने कश्मीर में रेल व्यवस्था के निर्माण में 2006 से 2009 तक अपना योगदान दिया है. अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यावसायिक क्रियाकलापों और कार्य संस्कृति संबंधित, अनुभव साझा किए.

इसी प्रकार कर्नल समरेंद्र ने ओजस्वी रूप में कृत्रिम बुद्धि (एआई) के व्यापक रूप से उपयोग एवं स्टार्टअप करने वाले उद्यमियों को संदेश देने का प्रयास किया. एक बार लक्ष्य निर्धारण कर लेने के बाद, उसे प्राप्त करने के लिए दीवानगी की हद तक जाने की दृढ़ता होनी चाहिए.

इसी प्रकार कर्नल समरेंद्र ने ओजस्वी रूप में कृत्रिम बुद्धि (एआई) के व्यापक रूप से उपयोग एवं स्टार्टअप करने वाले उद्यमियों को संदेश देने का प्रयास किया. एक बार लक्ष्य निर्धारण कर लेने के बाद, उसे प्राप्त करने के लिए दीवानगी की हद तक जाने की दृढ़ता होनी चाहिए.

सफल शिक्षाविद एवं मेयो कॉलेज अजमेर के पूर्व प्रिंसिपल, मेजर जनरल केवीएस ललोतरा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर महान सभ्यताएं, इसलिए महान बनी, क्योंकि उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी, शिक्षण- प्रशिक्षण में भरपूर निवेश किया.

पूर्व सैनिकों का सैन्य जीवन का अनुभव और नैतिक मूल्य, कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जिनका सदुपयोग, नव उद्यमी, स्टार्ट- अप करने वाले लोग आसानी से कर सकते हैं. सैन्य नेतृत्व शक्ति और वर्तमान टेक्नोलॉजी का गठजोड़, बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है.

कार्यक्रम का संचालन भारतीय नौसेना के अवकाश प्राप्त, कैप्टन राजा गोपाल थंपी और अध्यक्षता, लखनऊ सैन्य साहित्य के मेजर जनरल एच के सिंह ने की.

कार्यक्रम आभासी माध्यम से संपन्न हुआ और इसकी क्षमता के अनुरूप श्रोता गण भी जुड़े रहे.

आगामी 6 नवंबर को व्यक्तिगत रुप से साहसिक खेलों में अपना उत्कृष्ट स्थान बनाने वाले कुछ प्रसिद्ध शख्सियतों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित होगा.

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