उद्योगपतियों और किसानों को भी लाभ
- 03 ब्रिवरीज तथा 12 माइक्रोबिवरीज की भी हुई स्थापना, रू. 175 करोड़ का हुआ निवेश।
- कोरोना महामारी के दौरान 97 सेनेटाइजर इकाईया स्थापित, लगभग रू.25 करोड़ का निवेश हुआ।
- इकाईयों की स्थापना तथा दुकानों के व्यवस्थापन से लगभग 60,000 नये रोजगार के अवसर।
लखनऊ: विगत वर्षों में कोराना महामारी की रोकथाम के दौरान अल्कोहल से सेनेटाइजर बनाने में उत्तर प्रदेश ने कीर्तिमान स्थापित किया। प्रदेश में कोरोना के दौरान त्वरित गति से कुल 97 सेनेटाइजर इकाईयों को लाइसेंस प्रदान किया गया। उत्तर प्रदेश निर्मित सेनेटाइजर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों को भी निर्यात किया गया।
इस दौरान सेनेटाइजर इकाईयों की स्थापना से लगभग 1700 लोगों को रोजगार के नये अवसर प्राप्त हुए तथा उद्यमियों ने लगभग रू.25 करोड़ का निवेश इस क्षेत्र में किया।
प्रदेश में बार अनुज्ञापनों की प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाते हुए विगत वर्षों में 125 नये बार अनुज्ञापनों की स्वीकृति प्रदान की गयी, जिसके अन्तर्गत लगभग रू. 16 करोड़ लाइसेंस फीस के रूप में निवेश प्राप्त हुआ तथा लगभग 600 युवकों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुये।
आबकारी दुकानों के व्यवस्थापन से आबकारी व्यवसायियों द्वारा लगभग 1,800 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष का निवेश लाइसेंस फीस के रूप में किया गया तथा दुकानों के प्रबन्धन में लगभग 54,000 व्यक्तियों के रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये।
अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी ने बताया गया कि आबकारी विभाग इज आफ डूइंग बिजनेस के अन्तर्गत नियमों एवं प्रक्रियाओं को सुगम एवं सरल बनाते हुए उद्यमियों से औद्योगिक इकाईयों की स्थापना और उसमें अधिकतम निवेश के लिये सतत् प्रयत्नशील है। शासन के इस प्रयास से प्रदेश में बड़ी संख्या में डिस्टिलरी, यूथ डिस्टिलरी, माइक्रोबिवरी रेस्टोरेन्ट बार लाइसेंस, सेनेटाइजर इकाईयों की स्थापना सुनिश्चित की गयी, जिसमें उद्यमियों से लगभग रूपये 6,545 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ तथा लगभग 60,000 लोगों के लिये रोजगार के अवसर सृजित हुए।
डिस्टिलरी की स्थापना से प्रदेश में लगभग 3,200 नये रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। अपर मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि पूर्व स्थापित 20 औद्योगिक डिस्टिलरी में 1,576.5 लाख लीटर तथा 7 डिस्टिलरी की पेय क्षमता में 898.16 लाख लीटर की वृद्धि की गयी। क्षमता विस्तार के फलस्वरूप लगभग 1000 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त किया गया और 1200 व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
इसी प्रकार प्रदेश में विगत साढ़े चार वर्षों में 3 डिस्टिलरी स्थापित किये जाने के लिये अनुज्ञापन स्वीकृत किये गये हैं। यह डिस्टिलरी जनपद सम्भल, सोनभद्र तथा बाराबंकी में स्थापित की जायेंगी। इन इकाईयों की स्थापना से कुल 12.48 हेक्टोेलीटर बीयर के उत्पादन में वृद्धि होगी। इन इकाईयों की स्थापना में कुल रू. 165 करोड़, उद्यमियों द्वारा निवेश किया गया है। इन इकाईयों की स्थापना में 440 रोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे।
प्रदेश में शहरों के विकास को देखते हुए बड़े जनपदों- कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा, लखनऊ, मुरादाबाद एवं बरेली जैसे जनपदों में बढ़ते होटल व्यवसाय और बीयर के उपभोक्ताओं को ताजा बीयर उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से शासन द्वारा माइक्रोबिवरी की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। अब तक प्रदेश के जनपद नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, बरेली और लखनऊ में 12 उद्यमियों के होटल एवं रेस्टोरेन्टों को माइक्रोबिवरी का लाइसेंस निर्गत किया जा चुका है। माइक्रोब्रिवरीज जौ आधारित उद्योग होने के कारण जौ के उत्पादन में भी अनुकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे किसानों को भी इसका अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त होगा।
माइक्रोब्रिवरी की स्थापना से लगभग रू.12 करोड़ का निवेश प्राप्त किया गया है। माइक्रोब्रिवरी की स्थापना से होटल एवं पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को फ्रेश बीयर उपलब्ध हो सकेगा तथा राजस्व में भी वृद्धि होगी।
आबकारी विभाग प्रदेश में वाइनरीज उद्योगों की स्थापना के लिये भी प्रयासरत है। प्रदेश में बड़ी मात्रा में सब-ट्रापिकल फलों जैसे आम, जामुन, पीच आदि का उत्पादन बहुतायात में होता है। खपत से अवशेष एवं खराब हो रहे फलों से वाइन उत्पादन इकाईयां स्थापित कराने के लिये भी सरकार लगातार प्रयासरत है। सरकार की इस योजना से फल उत्पादक किसानों के खराब हो रहे फलों का सदुपयोग हो सकेगा तथा किसानों को इसका उचित मूल्य भी प्राप्त हो सकेगा तथा वाइनरीज की स्थापना रोजगार का सृजन एवं राजस्व की प्राप्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी।
संजय आर. भूसरेड्डी, अपर मुख्य सचिव आबकारी विभाग, उत्तर प्रदेश शासन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश तथा आबकारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री के निर्देश का पालन करते हुये प्रदेश के विकास के क्रम में नये उद्योगों की स्थापना को मंजूरी देकर उससे रोजगार सृजन को बढ़ाने के प्रयास किये हैं। उन्होंने बताया कि एक्ससाइज डिपार्टमेंट में पहले से चली आ रही व्यवस्थाओं और नियमों को सरल कर इज आफ डूइंग बिजनेस की नीति अपनाते हुए विभागीय क्रियाकलापों को आसान बनाने के लिये लगातार कार्य किये जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में विभिन्न औद्योगिक इकाईयों को स्थापित करते हुए प्रदेश में निवेश के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं।
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अपर मुख्य सचिव ने बताया कि विगत साढ़े चार वर्षों में कोआपरेटिव तथा प्राइवेट सेक्टर में कुल 12 नई डिस्टिलरी की स्थापना की गई है। कोआपरेटिव सेक्टर के अन्तर्गत बिजनौर, आजमगढ़ में 2 नई डिस्टिलरी की स्थापना हुई है। कोआपरेटिव क्षेत्र की स्नेह रोड बिजनौर में 40 के0एल0पी0डी0 क्षमता की नई डिस्टिलरी स्थापित की गयी, जिस पर 51.37 करोड़ का निवेश किया गया है।
कोआपरेटिव क्षेत्र की ही सठियांव, आजमगढ़ में 30 के0एल0पी0डी0 क्षमता की नई डिस्टिलरी स्थापित की गयी, जिस पर कुल 56.41 करोड़ का निवेश किया गया है। इन डिस्टिलरी की स्थापना से चीनी मिलों की आर्थिक स्थितियों में सुधार होने के साथ-साथ गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य के भुगतान में भी सुगमता होगी और अतिरिक्त रोजगार का सृजन भी प्राप्त होगा।
इसी प्रकार प्राइवेट क्षेत्र में जनपद-पीलीभीत, हरदोई, शाहजहॉंपुर, मुरादाबाद, बुलन्दशहर, लखीमपुर खीरी, बहराइच तथा सीतापुर में कुल 10 नई डिस्टिलरी की स्थापना की गई है। इन डिस्टिलरीज की स्थापना से डिस्टिलरी की कुल अधिष्ठापित क्षमता में लगभग 3,737 लाख लीटर की वृद्धि हुई है। इन डिस्टिलरी की स्थापना में कोआपरेटिव क्षेत्र के अन्तर्गत जहॉं 108 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त किया गया वहीं प्राइवेट क्षेत्र के उद्यमियों को आकर्षित करते हुए 1,133 करोड़ रूपये का निवेश अब तक कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त डिस्टिलरी के स्थापित होने से 2,291 करोड़ रूपये का अतिरिक्त निवेश प्राप्त किया जायेगा।



