कांग्रेस का प्रवचन काल

कांग्रेस
पंकज चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार

आजकल कांग्रेस के वरिष्ठ नेतागण प्रवचन देने में लगे हुए हैं। प्रवचन देने के भी तीन तरीके हैं – पहला चिट्ठी लिखना , दूसरा संवाददाता सम्मेलन बुलाना और तीसरा न्यूज़ एजेंसी एएनआई को बुलाकर साउंड बाईट दे देना। तरीका भले तीन हों लेकिन सारे प्रवचन का सार एक ही होता है — पार्टी को ये करना चाहिए तो पार्टी को वो करना चाहिए । लेकिन इतने सारे प्रवचन देने वाले पार्टी के तथाकथित “ सुधारवादी “ नेता ये नहीं बताते कि उनको क्या करना चाहिए या फिर पार्टी को मजबूत करने के लिए उन्होंने क्या किया ।
पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि पार्टी को पंच सितारा संस्कृति की बीमारी लग गई है। कांग्रेस के नेता उबर-खाबर सड़कों पर चलना ही नहीं चाहते। उनके बयान का लब्बो-लुआब यही था कि पार्टी अब पंच-सितारा और आरामपसंद संस्कृति की गिरफ्त में आ चुकी है। ये बयान आज़ाद साहेब ने अपने नई दिल्ली स्थित आलीशान बंगले पर दिया था। एएनआई के रिपोर्टर को बुलाया और पार्टी के लिए एक प्रवचन जारी कर दिया।
लेकिन कोई आज़ाद साहब से पूछ सकता है कि आपके गृह राज्य में डिस्ट्रीक्ट डेवलेपमेंट काउंसिल (डीडीसी) का चुनाव होने वाला है और आप यहाँ दिल्ली में क्या कर रहे हैं। क्या इस अहम चुनाव के ऐन मौके पर गुलाम नबी आज़ाद साहब को जम्मू या श्रीनगर में कैंप नहीं करना चाहिए था। क्या आज उन्हें उन इलाकों के कार्यकर्ताऔं के साथ मिलकर चुनाव जीतने की कोशिश नहीं करनी चाहिए थी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के 20 डीडीसी के लिए आठ चरणों में चुनाव की शरूआत 28 नवंबर से होगी जो 22 दिसंबर तक चलेगी। पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद-370 के तहत मिले विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद यह पहला प्रमुख चुनाव होगा । भाजपा के शीर्ष नेता जम्मू- कश्मीर में चुनावी रणनीति को अमली जामा पहनाने में मशगूल हैं तो गुलाम नबी साहब ने एक अलग राग ही छेड़ रखा है।
इतना ही नहीं , पंच सितारा संस्कृति पर प्रवचन देने वाले गुलाम नबी आजाद ये भूल जाते हैं कि 2013 के राजस्थान विधान सभा चुनाव के दौरान जब वे राज्य के इलेक्शन इंचार्ज थे तो उन्होंने सारा चुनाव जयपुर के पंच – सितारा होटल क्लार्क अमेर से संभाला था । जयपुर के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन दिनों तो आज़ाद साहेब के दर्शन भी नहीं हो पाते थे …. वो कभी भी होटल के सूईट से बाहर नहीं निकलते थे …. नतीजतन उस चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 20 सीट मिली थी। बकौल एक कांग्रेसी नेता , गुलाम नबी आज़ाद साहेब को उत्तर प्रदेश का तीन बार प्रभारी बनाया गया …लेकिन पार्टी में वो जान न फूंक सके।
गुलाम नबी आज़ाद की तरह ही कपिल सिब्बल साहब भी आजकल कांग्रेस के सूरतेहाल पर काफी “ दुखी ” हैं। उन्होंने तो चिट्ठी लिखी ही , अब घूम घूम कर अखबारों और टीवी को इंटरव्यू देते चल रहे हैं। उन्हें दिल्ली प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा भी कि आप दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के दफ्तर आएं और कार्यकर्ताओं से मिलें और उनका मार्गदर्शन करें । लेकिन देश के सबसे नामचीन वकील के पास इतना वक्त नहीं है कि वो कांग्रेस के कार्यकर्ता के साथ दस-पंद्रह मिनट बैठ कर भावी रणनीति पर बात करें। लेकिन कांग्रेस को प्रवचन देने के लिए उनके पास काफी वक्त होता है।
आखिर ऐसा क्यों है कि जो नेता कई वर्षों तक सत्ता के गलियारों में घूमते रहे , मंत्री पद का आनंद लेते रहे , सत्ता -सुख भोगते रहे वो आज मीडिया का सहारा ले कांग्रेस को नसीहतें दे रहे हैं। कांग्रेस के सूत्र का कहना है कि इस तरह की कवायद से ये नेता अपनी महत्ता का एहसास पार्टी को कराना चाहते हैं । कांग्रेस नेतृत्व की बाँह उमेठ कर ये किसी न किसी उच्च पद पर बना रहना चाहते हैं। दूसरी तरफ बहुतेरे कांग्रेस के नेता इन बयानबहादुर नेताओं के खिलाफ खुल कर मैदान में आ गए हैं। अधीर रंजन चौधरी ने तो साफ साफ कह दिया कि जब तक ये नेता मंत्री थे तब तक इन्हें पार्टी की कमजोरी नहीं दिखाई देती थी । यूपीए 1 और यूपीए 2 के दरम्यान जब ये मंत्री थे तो सब कुछ सही था और आज जब सत्ता से ये बाहर हैं तो ये नसीहतें देने लगे हैं। इसी तरह कुलदीप बिश्नोई , जो हरियाणा में आदमपुर से कांग्रेस के विधान सभा सदस्य हैं , ने कहा कि गुलाम नबी विरोधी दलों के साथ मिलकर कांग्रेस को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं। इसी तरह युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बी भी समेत गौरव वल्लभ और दूसरे नेताओं ने मीडिया में आकर “ सुधार “ की बात करने वालों पर तीखा हमला बोला।
बहरहाल इन तमाम बयानबाजी के बीच गाँधी परिवार खामोश तो है लेकिन उनकी नज़र सभी बयानों पर है। कांग्रेस की ओर से पार्टी प्रवक्ता पवन खेरा ने कहा कि सीडब्ल्यूसी के सारे मनोनीत नेता आराम से पार्टी आला कमान के साथ किसी भी मसले पर बात कर सकते हैं…. और वो अपनी चिंता या बात पार्टी फोरम में ही उठाएं तो बढ़िया रहेगा। बहरहाल देखना होगा कि पार्टी प्रवक्ता के इस बयान के बाद कांग्रेस के दोनों खेमा किस हद तक लक्ष्मण रेखा के अंदर रहते हैं।
कांग्रेस की राजनीति को करीब से देखने वाले इसे कहते हैं कि ये साफ तौर पर बुजुर्ग बनाम युवा पीढ़ी की कसमकस है। जिन स्वघोषित “ सुधारवादी ” नेताओं ने कांग्रेस को लेकर बयान जारी किए वो निस्संदेह ही पार्टी के “ ओल्ड गार्ड “ माने जाते हैं मसलन गुलाम नबी आजाद , कपिल सिब्बल , आनंद शर्मा वगैरह । और जिन लोगों ने इनपर हमला बोला वो बेशक पार्टी के “ यंग गार्ड “ हैं …जैसे श्रीनिवास बीभी , कुलदीप बिश्नोई या फिर अधीर रंजन चौधरी। और इन दोनों खेमा के बीच जो शीतयुद्ध चल रहा है वो बेशक पार्टी पर अपनी पकड़ बनाए रखने पर है। पिछले कुछ महीनों से जिस तरह राहुल गाँधी ने युवा नेतृत्व को बढ़ावा दिया है उससे इन बुजुर्ग समूह की नींद जरूर उड़ गई है।
आरोप और प्रत्यारोप के बीच पार्टी के अंदर कुछ लोग ये भी कहते हैं कि अब पार्टी को नए सिरे से संगठन को खड़ा करना चाहिए। आज अगर पार्टी की ये हालत है तो निस्संदेह इसके लिए गुलाम नबी , आनंद शर्मा , कपिल सिब्बल जैसे नेता जिम्मेदार हैं। इनके समय में ही कार्यकर्ता और पार्टी नेतृत्व के बीच की दूरी बढ़ती ही गई क्यूंकि इन्हीं लोगों ने पंच सितारा संस्कृति का पोषण किया। नेताओं के इस समूह का कहना है कि अब पार्टी को युवा नेता और युवा कार्यकर्ता चाहिए। निसंसंदेह , कांग्रेस के लिए ये चिंतन और मंथन का दौर है । इंतजार करना होगा कि क्या कांग्रेस आमूल-चूल बदलाव के लिए तैयार है अथवा नेताओं की ब्लैक-मेलिंग के सामने घुटने टेकने का दौर अभी और जारी रहेगा।

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