ओली के खिलाफ फिर शुरू हुई असंतुष्टों की मुहिम

ओली
यशोदा श्रीवास्तव, नेपाल मामलों के विशेषज्ञ

काठमांडू। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ एक बार फिर घेराबंदी शुरू हो गई है। इस बार व्यापक और पुख्ता रणनीति के तहत उन्हें सत्ता से हटाने की मुहिम चल रही है।

सरकार में शामिल तमाम प्रभावशाली नेताओं का मानना है कि ओली के खिलाफ जिस तरह विद्रोह के स्वर उभरे हैं उसे देखते हुए ऐसा अनुमान लग रहा है कि आने वाले कुछ दिनों के भीतर ओली को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ सकता है।

नेपाल में ओली विरोधियों की एक बार फिर तेज हुई सक्रियता भारतीय गुप्तचर एजेंसी रा चीफ के नेपाल दौरे के तत्कालबाद शुरू होने पर काठमांडू के राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चा भी तेज है।

अंदरखाने की खबर यह है कि सत्ता के भीतर ओली विरोधी गठबंधन ने शीघ्र ही पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक बुलाई है जिसमें ओली को सत्ता से हटाने के लिए संसद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चर्चा होगी।

समझा जाता है कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड, बामदेव गौतम और माधव कुमार नेपाल, ओली को पद से हटाने की योजना के तहत फिर सक्रिय हो गए हैं।

इनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता झल नाथ खनाल और प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ भी शामिल हैं।

इस बार प्रचंड, माधव नेपाल और बामदेव गौतम इस वजह से असंतुष्ट हो गए कि स्थायी समिति की बैठक में ओली द्वारा पारित पिछले समझौते को लागू नहीं किया गया है।

इन नेताओं ने कहा कि वास्तविक अवसर दिए जाने पर भी ओली ईमानदार नहीं रहे उल्टे वे विरोधी स्वर को कुचलने के लिए विपरीत विचार वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की तैयारी कर रहे थे।

सूत्र बताते हैं कि पिछले बार ओली के खिलाफ बनी रणनीति कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता बामदेव गौतम के कारण विफल हुई थी।

इस बार बामदेव गौतम ने खुद को ओली के खिलाफ सबसे कठोर तरीके से पेश करना शुरू कर दिया है।

प्रचंड और माधव नेपाल के पास सचिवालय, स्थायी समिति और केंद्रीय समिति में बहुमत है जो ओली के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

हालांकि, ओली गुट संसदीय दल में बहुमत का दावा करता रहा है। बावजूद इसके ओली गुट इस बार अधिक रक्षात्मक हो गया है।

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