बस एक बात याद रखिये.‘ हीरा है सदा के लिए !’

हिमांशु पण्ड्या

हिमांशु पंडया

रमेशचंद्र भीखाभाई विरानी जाने माने हीरा व्यापारी हैं. उन्हें हीरे की परख है. उन्होंने अपने बेटे की शादी के अवसर पर अपने ‘बड़े भाई’ के लिए एक ख़ास सूट बनवाया था. सूट पर तीन सौ अठत्तर बार उनके भाई का नाम काढा गया था. ऐसी महीन और बारीक कताई कि पूछिए मत ! यह रिश्तों की बात है, इसे मेरे आप जैसे काहिल लोग कभी नहीं समझ सकते ! यह रिश्तों की प्रगाढ़ता ही थी कि इससे पहले जब परिवार में शादी थी और उनके भाई मुख्यमंत्री थे तो वे आख़िरी क्षण में सारे कार्यक्रम बदल कर डायमंड किंग पंकज विरानी के बेटे किशोर विरानी की शादी में अपना हेलीकॉप्टर घुमाकर पहुंचे थे. तो अब जब उनका भाई प्रधानमंत्री बन गया था तो विरानीज़ उसे भूल जाते क्या !
खैर, जैसे ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के लिए लगता था कि विरानी परिवार की यह महागाथा ख़त्म ही नहीं होगी वैसे ही चार साल बाद यह विरानी परिवार भी फिर चर्चा में है. वे अहमदाबाद की उस फर्म के स्टॉक होल्डर हैं जिसे गुजरात सरकार ने ‘धमन-1’ नामक 5000 वेंटीलेटर्स खरीदने का ऑर्डर दिया है. अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स ने इस वेंटिलेटर को पूरी तरह नकार दिया और गुजरात के अखबारों में हल्ला हुआ तब अब फर्म का कहना है कि धमन तो वेंटिलेटर है ही नहीं ! तो क्या गुब्बारे फुलाने की मशीन वेंटिलेटर के दाम पे खरीद ली गयी ?
Ahemdabad Mirror

‘अहमदाबाद मिरर’ अखबार ने सबसे पहले इस खबर को उठाया और फिर उसके बाद भारत में छानबीन पत्रकारिता के सबसे बड़े नामों में से एक रोहिणी सिंह ने इस पर विस्तृत खबर की. बकौल रोहिणी सिंह ऐसा संभव है कि इसके लिए धनराशि पीएम केयर्स फंड से दी गई हो, जिसके बारे में इस महीने की शुरुआत में बताया गया था कि फंड के दो हजार करोड़ रुपयों का उपयोग 50,000 मेड इन इंडिया वेंटिलेटर खरीदने के लिए किया जाएगा. फर्म के सीएमडी पराक्रमसिंह जडेजा मुख्यमंत्री रुपाणी के मित्र हैं. रूपाणी द्वारा इस मशीन की काफी तारीफ करते हुए बताया गया था कि कैसे राजकोट के एक उद्योगपति द्वारा महज दस दिनों में सफलतापूर्वक वेंटिलेटर्स बना लिए गए हैं. जडेजा ने बताया था कि गुजरात के मुख्यमंत्री उन्हें रोज कॉल करके प्रोत्साहित किया करते थे.

बहरहाल एक होता है घोटाला और एक होती है हत्या. शायद दूसरा, पहले के मुकाबले ज्यादा बड़ा अपराध होगा. अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के अनुसार इन वेंटिलेटर्स को देश के ड्रग कंट्रोलर जनरल से लाइसेंस भी नहीं मिला है और इन्हें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा 5 अप्रैल को लॉन्च किए जाने से पहले इनका केवल एक व्यक्ति पर ही परीक्षण किया गया था. ध्यान दीजिये, केवल एक व्यक्ति पर. और गुजरात सरकार की विज्ञप्ति में इसे ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट की महान उपलब्धि बताया गया था.

तो हम बात कर रहे थे हत्या की. शुक्रवार को बीबीसी संवाददाता रॉक्सी गाड्गेकर छारा ने सवाल उठाया है कि क्या उनके जीजा  को ‘धमन वेंटिलेटर’ पर रखा गया था ? उनके भाई की परसों मृत्यु हो गयी. वे उसी सिविल अस्पताल में थे. सिविल अस्पताल में कुल दो सौ तीस धमन वेंटिलेटर्स सप्लाई किये गए थे. पूरे राज्य में नौ सौ. वैसे अहमदाबाद में अब तक हुई कुल मृत्यु हैं छः सौ.खैर , यह सब भूल जाइए. यह खबर मुख्यधारा में नहीं है. इसे कोई याद नहीं रखेगा. बस एक बात याद रखिये.‘हीरा है सदा के लिए !’

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