इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महंगाई भत्ता व राहत रोकने पर योगी सरकार से मांगा जवाब

(मीडिया स्वराज़ डेस्क)

प्रयागराज ,23 जून 2020,.

लाखों कर्मचारियों व पेंशनरों के महंगाई भत्ता व महंगाई राहत को रोके जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार से  जवाब मांगा है , पूछा है किस कानून के तहत रोका डीए । माननीय उच्चन्यायालय ने योगी सरकार के साथ ही केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया है । अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।

उच्चन्यायालय इलाहाबाद में माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने लोकमोर्चा के प्रवक्ता व शिक्षक कर्मचारी नेता अनिल कुमार की रिट याचिका संख्या 4445 / 2020 पर सुनवाई के दौरान पारित किया है ।याचिका कर्ता की ओर से  रमेश कुमार ने बहस की और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता श्री एम सी चतुर्वेदी ने बहस की ।

 याचिकाकर्ता व लोकमोर्चा प्रवक्ता अनिल कुमार ने  बताया कि याचिका में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के आदेश दिनांक 24 अप्रैल 2020 को गैर कानूनी और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई है जिसके द्वारा सभी राज्य कर्मचारियों और पेंशन भोगियो को दिया जाने वाले महंगाई भत्ता और महंगाई राहत के जनवरी 2020 से जून 2021 तक के भुगतान पर रोक लगा दी थी ।

शासन का कहना है कि कोविड 19 से उत्पन्न वित्तीय संकट के चलते राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों ( शिक्षण संस्थानों , शहरी निकायों समेत ) व पेंशन भोगियो के अनुमन्य महंगाई भत्ते महंगाई राहत की किश्तों का भुगतान नहीं किया जायेगा ।

 हाईकोर्ट में हुई बहस में कर्मचारियों की ओर से  कहा गया  कि बिना वित्तीय आपातकाल लगाये केवल शासनादेश द्वारा मंहगाई भत्ते व मंहगाई राहत पर रोक असंवैधानिक है ।

 केंद्र सरकार द्वारा 11 मार्च 2020 को नोटिफिएड डिजास्टर ( अधिसूचित आपदा) घोषित किया जा चुका है और वित्तीय संकट का समाधान डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के प्राविधानों में निहित होना चाहिए , लेकिन इस एक्ट में सरकार को डीए और डीआर पर रोक का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे में सरकार द्वारा कर्मचारियों व पेंशनरों के मंहगाई भत्ते और मंहगाई राहत पर रोक का शासनादेश संविधान और कानून के प्रावधानों के विरुद्ध है ।

इस आदेश के द्वारा प्रदेश के 16 लाख से अधिक राज्य कर्मचारियों और लाखों पेंशन भोगियों  के सामने आर्थिक संकट का खतरा पैदा  हो गया है ।
बहस सुनने के बाद माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय को नोटिस जारी कर जबाब मांगने का आदेश पारित किया और अगली सुनवाई को 16 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।

 

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