Covid 19 : भारत में आठ लाख आयुर्वेदिक डाक्टर बेकार बैठे , दवा बॉंट रहे एम्बुलेंस ड्राइवर

कोरोनाकाल में आयुर्वेद अंक-16  (19 मई 2020)

विश्व  में  कोरोना  पर  देशी दवाओं का इस्तेमाल

आयुर्वेद के आठ लाख डॉक्टर बेकार पर , दवायें पहुंचा रहे एंबुलेंस के ड्राइवर
-विश्व के कई एशिआई और अफ्रीकी देशों ने परंपरागत चिकित्सा पद्धति से पाया कोविड पर प्रभावी नियंत्रण
-विश्व स्वास्थ्य संगठन में परंपरागत चिकित्सा पर विद्वानों ने रखे अपने विचार

विश्व स्वास्थ्य संगठन में परंपरागत चिकित्सा विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें कई एशियाई और अफ्रीकी देशों में परंपरागत चिकित्सा के प्रयोग से कोरोना महामारी पर चिकित्सा पद्धति से सफल इलाज की बात सामने आई। वहीं भारत में आयुर्वेद के आठ लाख डिग्रीधारी चिकित्सक होने के बावजूद इनका प्रयोग न कर एंबुलेंस के ड्राइवर और अन्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से कोरोना मरीजों तक दवा पहुंचाने पर निराशा जाहिर की गयी।

विद्वानों ने बताया कि कोविड-19 में विश्व के कई एशियाई देशों जापान कोरिया चीन के अलावा अफ्रीकी देशों घाना चिली मेडागास्कर आदि में परंपरागत चिकित्सा पद्धति से इलाज कर कोविड-19 से इलाज कर कोरोना पर नियंत्रण पाने की बात कही गई। वहीं आयुष (आयुर्वेद सिद्धा यूनानी होम्योपथी) पर ध्यान नही दिया गया। उन्होंंने कहा कि आयुष को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रयोग कर हम कोरोना में बढि़या काम कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के गीता कृृष्णन ने कहा कि यहां तक कि कोरोना में नेपाल और चीन की अपेक्षा भारत परंपरागत चिकित्सा करने में पीछे हैं। जबकि चाइनीज परंपरागत दवाओं में इनग्रेडिएंट्स अधिक हैं वहीं आयुष में ज्यादातर सिंगल दवायें हैं या इनग्रेडिएंट्स बहुत कम हैं। कोरोना में आयुष चिकित्सकों को इलाज की जगह माडर्न मेडिसीन में सहयोगी के तौर पर लगाया गया। भारत में आठ लाख आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। इनका उपयोग न करके मरीजों तक दवा भिजवाने के लिए एंबुलेंस के ड्रवरों और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मदद ली गयी। यह निराशाजनक है। विद्वानों ने कहा कि भारत में आयुर्वेद चिकित्सक या संस्थानों के कोरोना पर भेजे गए प्रोटोकाल पर सरकारी स्तर पर सही रिस्पांस नहीं मिला। इस दौरान सभी विशेषज्ञों ने एकमत से अपने स्तर से समाज में आयुर्वेद को लेकर जागरुकता फैलाने लोगेां का इलाज करने का संकल्प लिया। साथ ही एक अभियान चलाकर आयुष पद्धति से कोरोना का प्राथमिक इलाज करने के लिए नीति लागू करने सरकार को तैयार करने पर सहमति जाहिर किया।

वैश्विक महामारी कोरोना की चिकित्सा या रोकथाम के लिए अभी तक निश्चित उपाय नहीं निकल पायी है।आधुनिक विज्ञान अभी प्रयोग के दौर से गुजर रहा है।चिकित्सा प्रोटाकाल नित्य बदले जा रहे है।ऐसी स्थिति मेंभारत व चीन में पारम्परिक व आयुर्वेद,यूनानी,सिद्धा आदि दवायें कारगर पायी जा रही है,परन्तु अभी इनकापूर्ण एंव प्रमाणित उपयोग नहीं हो पा रहा है.

इन सवालों पर विचार करने के लिए आज की परिचर्चा में वरिष्ठपत्रकार रामदत्त त्रिपाठी एवं डॉ आर.अचल के साथ आज जेनेवा(यूएस) से विश्वस्वास्थ्य संगठन जेनावा में टेक्निकल डायरेक्टर डा जी  गीताकृष्नन एवं देवरिया से आयुर्वेद-एलोपैथी के समन्वितचिकित्सालय के मुख्य चिकित्सक डॉ वरेश नागरथ,जिनका एड्स एवं डेंगू पर शोध प्रकाशित हुआ,राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सेमीनारों प्रतिष्ठित वक्ता,पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बिहार प्रसिद्ध चिकित्सक है।

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रामदत्त त्रिपाठी

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक , सामाजिक कार्यकर्ता , विधिवेत्ता  और सूचनासंचार के विशेषज्ञ हैं. राम दत्त त्रिपाठी ने 1992 से 2013 इक्कीस वर्षों तक बी बी सी लंदन के लिए कार्यकिया और वह एक प्रकार से भारत मे बी बी सी की पहचान बन गये।

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Dr Geetha Krishnan

M D Ayurveda

Dr Geetha Krishnan Gopalakrishna Pillai is working with the World Health Organization at Geneva.

As a technical officer at the Traditional, Complementary and Integrative Medicine (TCI) Unit he supports the objectives of WHO to integrate traditional medicine into the national health systems of its Member States.

He is responsible for developing global goods supporting norms and standards of Traditional Medical (TM) systems such as Ayurveda, Unani, Siddha, and Yoga. These include Benchmark documents for Practice and Training in Ayurveda and Unani, as well as Standard Terminology documents for Ayurveda, Unani, and Siddha systems of medicine.

He is also currently engaged in developing data, analytics, and impact assessment tools for TM and is involved in steering the development of Ayurveda, Unani, and Siddha medicine modules of codes of morbidity to be included in the International Classification of Diseases (ICD-11). He is a key member of the AYUSH based COVID-19 response task force of the Govt. of India, as well as the organizer or several clinical trials on COVID internationally and within India.

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Dr. Varash Nagrath

A Leading Physician NE UP & Chief of Gurukripa Interrogative(Allopathy & Ayurveda) Clinic Deoria, UP

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डॉ.आर.अचल

आयुर्वेद चिकित्सक,मुख्यसंपादक-ईस्टर्न साइन्टिस्ट जर्नल,क्षेत्रीय संपादक-साइंस इण्डिया मासिक (भोपाल) महासचिव-स्वदेशी विज्ञान संस्थानम्,देवरिया उप्र, सदस्य-राष्ट्रीय संयोजक समिति-वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस

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