क्या तंबाकू से कोरोना का इलाज निकलेगा

फ़्रांस और इटली में निकोटीन के प्रभाव पर शोध

दिनेश कुमार गर्ग

दिनेश कुमार गर्ग 

मेक्सिको की वनस्पति तंबाकू  हमारे देश में फिरंगियों के साथ आयी। फिर तो इसका प्रयोग हमारे देश व भारतीय उपमहाद्वीप में खाने , पीने, मलने, सूंघने और मांग कर दोस्ती बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। अमीर से अमीर आदमी गरीब से गरीब व्यक्ति से चुटकी भर तम्बाकू  मांग लेता है, निस्संकोच, अमीरी की ठसक भूलकर तंबाकू  खाने के लिए समाजवादी हो जाता है। हम इसे खाते और पीते हैं । खैनी खाकर जगह जगह थूकने और गंदगी फैलाने के लिए कुख्यात है। मंदिर ,स्कूल, सड़क, अस्पताल , घरों के अन्दर सीढियों में , कोने कतरे में, वाश बेसिन में कहीं भी बेझिझक उगलकर माहौल गन्दा करने में भारतीयों की कोई तुलना नहीं है। कहीं भी हम बीडी़ , सिगरेट और हुक्का में इसे पीते हैं।

पश्चिम में तम्बाकू  सिगरेट के रूप में पी जाती है व्यापक रूप से पर खायी और थूकी नहीं जाती । हमारे कुछ आधुनिक ऋषियों ने तम्बाकू  का सख्त निषेध किया है।  स्वर्ग और सुन्दर परलोक  के अभिलाषी भारतीयों को इन ऋषियों ने तम्बाकू  सेवन से दूर रहने की सलाह दी है। ऐसी ही सलाह वैज्ञानिक और डाॅक्टर भी देते हैं । ऋषि देवरहा बाबा ने बताया है कि मानसिक दुःख और संताप से बचने के लिए तम्बाकू  का परित्याग कर देना चाहिये । उनके आश्रमों में दीवालों पर तम्बाखू संम्बन्धी चेतावनी मोटे-मोटे अक्षरों में लिखी मिल जायेगी । 

पर याद रखिये कि विष में भी कुछ गुण होते हैं और उस कारण उनका भी आवश्यकता पड़ने पर प्रयोग किया जाता है। तम्बाकू के नुकसानदेह पक्ष पर बोलने वाले पश्चिमी विद्वानों की नजर हाल में इसके किंचित लाभदायी पक्ष पर कोरोना मरीजों के डेटा पर सूक्ष्म विवेचन के दौरान गयी ।  डी डब्ल्यू और एजेंसी फ्रांस प्रेस ने रिपोर्ट किया है कि फ्रांस के वैज्ञानिकों यथा ज्यां पीयर चांग ने  पता लगाया है कि तम्बाकू पीने वाले अन्य लोगों की तुलना में कोराना से बेहतर सुरक्षित हैं क्योंकि रक्त में प्रवाहित रक्तकोषों में चिपके तम्बाकू  के कण कोरोना के प्रवेश द्वार को अवरुद्ध कर देते हैं । पर यहां पर हम चेतावनी भी दे रहे हैं कि अन्य वैज्ञानिकों ने उसके ठीक उल्टे भी बताया है। उनके अनुसार धूम्रपान करने वाले  कोराना सहित अन्य तरह के संक्रमण के आसान शिकार हैं । चाइनीज मेडिकल जर्नल के अनुसार धूम्रपान करने वाले कोविड 19 के अत्यंत घातक स्वरूप से ग्रसित होते हैं और मर जाते हैं।

इन्स्टीट्यूट पास्चर में न्यूरोबायोलाॅजिस्ट ज्यां पीयर चांग  का अनुमान है कि निकोटीन पैचेस खतरनाक वायरस से हमारी सुरक्षा कर सकते हैं। उनहोंने साइंस पोर्टल केयस में कुछ इसी तरह की बात प्रकाशित भी की है। उनका।निष्कर्ष है कि कोविड 19 मरीजों की कुल संख्या में स्मोकर्स की संख्या  बहुत कम है और यह तथ्य चीनी शोध का खंडन करता है। निष्कर्ष  यह है कि तम्बाकू  कणों के मार्गावरोध के कारण वायरस रक्त कणिका में न घुस पाता है न फैल पाता है।।शोध कर रहे विद्वानों के प्रमुख जहीर अमोरा के अनुसार कोविड 19 प्रभावित 500 मरीजों में मात्र 5 प्रतिशत लोग स्मोकिंग करते पाये गये शेष नान-स्मोकर्स थे।  इसका मतलब है कि फ्रांस की आबादी में जितने लोग समोकिंग करते हैं उसके सापेक्ष उम्र और लिंग के दृष्टगत कोविड 19 मरीजों में स्मोकर्स की संख्या 80 प्रतिशत कम है।

कोरोना वायरस से इटली की भी कमर टूटी है। इसलिए वहां भी इस पर शोध हो रहा है। वेरोना में जिसेप लिप्पी के नेतृत्व मे चले शोध के अनुसार स्मोकर्स तुलनात्मक रूप से नान-स्मोकर्स से कोरोना से ज्यादा सुरक्षित हैं। उनका शोध यूरोपियन जर्नल आन ईन्टर्नल मेडिसिन में प्रकाशित हो चुका है।  

फ्रांसीसी विद्वान ज्यां पीयर चांग की स्टडी यह धारणा बनाती है कि निकोटीन कोरोना से प्रतिरक्षित करता है। इसका आधार प्राक्कल्पना है कि कोरोना वायरस  संक्रमण के लिए जिस सेल रिसेप्टर ACE2 का प्रयोग करता है तम्बाकू उससे चिपक जाती है । चांग कहते हैं कि इस कारण कोरोना सेल के अन्दर नहीं घुस पाता और पूरे शरीर में फैल नहीं पाता । अब इस प्राक्कलन के आधार पर पेरिस का अस्पताल परीक्षण करेगा । अब सवाल यह है कि  ACE2 रिसेप्टर वास्तव में करते क्या हैं ? शोधकर्ताओं में ACE2 रिसेप्टर के ब्लाकिंग इफेक्ट पर एक राय नहीं है। अमरीका के वर्जीनिया प्रदेश की न्योरोलाजिस्ट जेम्स एल ओल्ड्स और नाडीन कब्बानी  की एक स्टडी गत 18 मार्च को  FEBS Journal में प्रकाशित हुई है जो बताती है कि ACE 2 रिसेप्टर तो सेल को स्टीमुलेट करते हैं यानी वायरस को सेल में प्रवेश हेतु  बेहतर माहौल बनता है। स्मोकर्स में कोरोना बीमारी की गंभीरता संभवतः इसी वजह से हो।  . 

जो भी हो , अभी तम्बाकू  पर शोध और होने की जरूरत है ताकि तय हो सके कि फ्रांसीसी सही हैं या अमरीकी शोध कर्ता । तब तक डाक्टरो की सलाह कि तंबाकू  हर तरह मानव काया के लिए हानिकर है मानते रहना ही हितकर है। चिविंग, स्निफिंग और  स्मोकिंग जितनी जल्दी हो छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि यह कैंसरकारी तत्वों सहित अनेक हानिकर अवांछित पदार्थों को शरीर में प्रवेश कराती है। एक सिगरेट में 12 मिलीग्राम तम्बाकू  होती है जिसमें से 3 मिलीग्राम आदमी हर बार पी लेता है। अब इससे नुकसान ही तो होगा। 

 

फिर भी यह जानना रोचक होगा कि कोरोना काल के पहले भी विश्व में तम्बाकू के हानिकर पहलुओं के साथ लाभकर पहलुओं पर भी शोध हुआ है।  तम्बाकू  को डिमेन्सिया के गंभीर मामलों में अन्य ड्रग्स की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली माना गया है। बहरहाल अभी निर्णयात्मक निष्कर्ष कुछ भी नहीं है , बस शोध स्तर की विरोधाभासी  जानकारियां ही हैं।

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