नए संसद भवन निर्माण को स्थगित करना ही बेहतर

सवाल क़ानून नहीं सरकार की नीति और प्राथमिकता का है

नए संसद भवन की चर्चा में अंबरीश कुमार के साथ राम दत्त त्रिपाठी..

नए संसद भवन निर्माण चर्चा राम दत्त त्रिपाठी के साथ ....

पूरा देश अभी कोरोना से जूझ रहा है वही सरकार को नए संसद भवन बनाने की पड़ी है। हमारा संसद भवन तो अभी 100 साल का भी नहीं हुआ है….
अभी जहाँ बड़े मुल्क अपनी संसद चला रहे हैं, वहीँ हमारे सरकार को संसद भवन को नए संसद भवन बनाए जाने की जल्दी है जो औरों के संसद भवन से अभी नया ही है, हमारी संसद अभी 100 साल पुरानी भी नहीं हुई है, 7 साल बाद यह बिल्डिंग 100 साल की होगी….

सरकार ने कोर्ट से कहा था कि वहां पर फायर सिक्योरिटी के इंतज़ाम नहीं है इसलिए उनको नए संसद कि आवश्यकता है । सरकार ने यह भी कहा कि अलग अलग मंत्रालय अलग जगह होने से पैसा ज्यादा खर्च ज्यादा होता है, और वही कुछ दफ़्तर किराये पर भी है तो उनका मानना है कि
अगर नए संसद भवन का निर्माण हो जायेगा तो फिर सारे दफ्तर एक ही बिल्डिंग में होंगे।

संसद प्रोजेक्ट में क्या- क्या है?

संसद भवन के साथ इतिहास जुड़े हुए हैं, साथ बहुत सी यादें जुडी हैं जो की 1947 से है, जब हमको आजादी मिली। इस प्रोजेक्ट में नार्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक
को म्यूजियम में कन्वर्ट कर दिया जायेगा। प्रधान मंत्री और उप राष्ट्रपति के लिए नए मकान बनेंगे। प्रधान मंत्री का जो आवास बनेगा वो उनके दफ्तर से अंडरग्राउंड
रास्ता होगा। एक ऐसी ईमारत जिसको लोग हजार साल याद रखेंगे। जब यह इमरातें टूटेगी तो धूलधक्कड़ बहुत होंगी लेकिन सरकार ने कहा है की इसका ध्यान रखा
जाएगा।

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बहुत सारे लोगों ने जिन्होंने चैलेंज किया था उनका पॉइंट ऑफ़ व्यू अलग था। सबसे बड़ा पॉइंट जो उन्होंने दिया वो था लैंड युथ का पॉइंट, दूसरा उन सब का कहना है कि बहुत सारी बिल्डिंग अब हेरिटेज कि केटेगरी में आरही है और तीसरा पॉइंट उन्होंने दिया राइट टू लाइफ…

भारत को प्राथमिकता किसको देनी चाहिए??

भारत जैसे देश में जहाँ पैसे कि इतनी तकलीफ है, जहाँ बहुत सारे लोगों कि नौकरियां चली गयी, बहुत सारे लोग बेरोजगार हो गए, आमदनी का ज़रिया ख़त्म हो गया है, साथ ही कोरोना जैसी महामारी, तो क्या इस वक़्त नए संसद भवन के निर्माण कि आवश्यकता है?? भारत में हेल्थ सर्विसेज ठीक नहीं हैं, बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, शिक्षा की हालात भी ख़राब है, बच्चों के लिए स्कूल नहीं है हमें प्राथमिकता तय करनी चाहिए
कि नई बिल्डिंग जैसे संसद बनानी है या देश के लिए युथ के लिए कमा करना है।

सुप्रीम कोर्ट में 3 जजों की बेंच में से 2 जजों का कहना है पहले हेरिटेज कंसर्वेशन कमिटी से क्लियरेंस लेना होगा फिर काम शुरू करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का कहना है आप काम शुरू कर सकते हैं लेकिन जब इमरातें टूटेंगी तो धूलधक्कड़ बहुत होंगी तो उसका ध्यान सरकार को रखना होगा ।
प्रारंभिक अनुमान है की नए संसद के निर्माण में 20 हजार करोड़ लग सकता है।

लेकिन हमेशा लागत बढ़ती है.

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से क़ानूनी पहलुओं पर विचार किया कि लैंड यूज चेंज करने और बिल्डिंग बनाने के नियमों का पालन हुआ या नहीं.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नीतिगत प्राशन पर अपना जजमेंट देने से माना कर दिया कि यह सरकार और संसद का काम है.

इस तरह गेंद फिर मोदी सरकार के पाले में है. देश में अभी जो आर्थिक हालात हैं, कोरोना की इमर्जेंसी देखते हुए अभी नयी इमारतें बनाने पर इतना धान खर्च करना उचित न होगा और बेहतर होगा कि क़ानूनी अनुमोदन के बाद भी सरकार इस प्रोजेक्ट को स्थगित कर दे.

पूरी चर्चा सुनने के लिए नीचे वीडियो देखें ,

चर्चा में जनसत्ता के पूर्व स्थानीय सम्पादक अंबरीश कुमार के साथ बीबीसी के पूर्व संवाददाता  राम दत्त त्रिपाठी..

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