Bihar Election: चिराग के फैसले से BJP की उम्मीदों को उजाला

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासी तस्वीर में बड़ा फेरबदल हुआ है. बता दे कि लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने ऐलान किया है कि वह बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की अगुवाई में विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे. चुनाव के बाद उनके सभी विधायक बीजेपी को मजबूत करेंगे.

पार्टी बिहार में BJP की ही चाहती अगुवाई

एलजेपी की अहम बैठक के बाद प्रेस रिलीज में कहा गया कि पार्टी बिहार में भी केंद्र की तरह बीजेपी की ही अगुवाई में सरकार चाहती है. ये वो बात है जिसका बीजेपी का एक धड़ा काफी दिन से मांग कर रहा था कि बिहार में एनडीए का नेता नीतीश कुमार को नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माना जाए और विधानसभा चुनाव में उन्हीं को चेहरा बनाया जाए. लेकिन खुद गृहमंत्री अमित शाह साफ कर चुके हैं कि बिहार में एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार ही हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से एनडीए के अंदर की राजनीति काफी बदल गई है. बिहार में अब बीजेपी के नेता अपने दम पर सरकार बनाने या फिर बीजेपी की अगुवाई में सरकार बनाने का ख्वाब देखने लगे हैं. लेकिन बिहार में जातिगत समीकरण और वोट बैंक का खेल कुछ ऐसा है कि बीजेपी की मजबूरी है कि वह जेडीयू के साथ बनी रहे. क्योंकि वह किसी भी कीमत पर नहीं चाहेगी कि जेडीयू और लालू प्रसाद की पार्टी का दोबारा गठबंधन हो. इसका खामियाजा वह 2015 के विधानसभा चुनाव में भुगत चुकी है.

दलित वोटरों के लिए राम मांझी को किया शामिल

बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी बीजेपी की महत्वाकांक्षाओं को बखूबी समझते हैं. इसलिए एनडीए के अंदर बीजेपी और एलजेपी की जुगलबंदी की काट और दलित वोटरों को लुभाने के लिए जीतन राम मांझी को अपने साथ ले आए हैं. नीतीश ने कहा है कि मांझी की पार्टी HAM ने जेडीयू को समर्थन दिया है. मतलब उन्होंने साफ कर दिया कि वह अपने हिस्से की सीटें मांझी को दे सकते हैं लेकिन एलजेपी को नहीं.

इधर बीजेपी ने भी दांव फेंका और चिराग पासवान को आगे कर दिया. अब तय माना जा रहा है कि एलजेपी बिहार चुनाव में जेडीयू के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारेगी. बीजेपी और जेडीयू के बीच आधी-आधी सीटों यानी 122 सीटों पर जेडीयू और 121 सीटों पर बीजेपी के चुनाव लड़ने की बात चल रही है. ध्यान देने वाली बात ये है कि बीजेपी और जेडीयू ने मिलकर बिहार में आखिरी विधानसभा चुनाव साल 2010 में लड़ा था. इस चुनाव में जेडीयू 141 और बीजेपी 102 सीटों पर लड़ी थी. जिसमें जेडीयू ने 115 और बीजेपी ने 91 सीटें जीती थीं. वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी और जेडीयू 17-17 और तीसरी सहयोगी पार्टी एलजेपी 6 सीटों पर लड़ी थी. इस चुनाव में बीजेपी 17, जेडीयू 16 और एलजेपी 6 सीटों पर चुनाव जीती थी. बीजेपी का स्ट्राइक रेट जेडीयू से अच्छा रहा है.

JDU निभा रहा ‘बड़े भाई’ की भूमिका

बिहार में जेडीयू अभी तक एनडीए के अंदर ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभा रही है. लेकिन इस बार उसे आधी सीटों पर समझौता करना पड़ा है. अब अगर एलजेपी जेडीयू के खिलाफ सभी सीटों पर चुनाव लड़ती है और वह नीतीश की पार्टी का नुकसान कर देती है तो एनडीए में जेडीयू की हालत कमजोर हो जाएगी. ऐसी स्थिति में बिहार एनडीए में बीजेपी को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है और यह उसके बिहार में अपनी अगुवाई में सरकार बनाने का ख्वाब को और मजबूत करेगी.

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय का कहना है, ‘बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी यानी एलजेपी का ठीक-ठाक जनाधार है. राम विलास पासवान की पार्टी एलजेपी को हर दलित ही नहीं, मुस्लिमों और सवर्णों का भी समर्थन मिलता रहा है. अब वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान की लोकप्रियता भी युवाओं में ठीक-ठाक है. अगर एलजेपी ने अपने प्रत्याशी जेडीयू के खिलाफ उतारे तो निश्चित तौर पर नीतीश को इसका नुकसान होगा.

गौरतलब है कि बिहार चुनाव तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा. जिसमें पहले चरण के लिए मतदान 28 अक्टूबर, दूसरे चरण के लिए मतदान 3 नवंबर और तीसरे चरण के लिए मतदान 7 नवंबर को होगा. नतीजों का ऐलान 10 नवंबर को होगा.

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