लेखक
-
सरदार हुकुम सिंह जिन्होंने अपने पद की गरिमा को ऊंचाइयों तक पहुंचाया
सरदार हुकम सिंह की काबिलियत का नेहरू जी भी लोहा मानते थे। उनके राजनीतिक जीवन का परिचय त्रिलोक दीप जी…
Read More » -
Will political ambiguity, caste dynamics change the value of Muslim votes in Bihar?
Mohd. Naushad Khan The political ambiguity in between JD-U, BJP and LJP and caste dynamics has not only confused the…
Read More » -
अगस्त क्रांति -42 के नायक जेपी का दलगत राजनीति से मोहभंग क्यों हुआ?
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी अगस्त क्रान्ति -42 के भारत छोड़ो आंदोलन की आग को प्रज्वलित रखने में जयप्रकाश और डॉ. लोहिया…
Read More » -
खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है!
श्रवण गर्ग वरिष्ठ पत्रकार हम डर रहे हैं यह स्वीकार करने से कि हमें गांधी की अब ज़रूरत नहीं बची…
Read More » -
बाबरी मस्जिद विध्वंस केस सभी जीवित आरोपी बरी : एक परिचर्चा
अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला देते हुए सभी जीवित 32 आरोपितों…
Read More » -
Transformational Leadership; Need of the hour
Abstract Dr.R.D.Mishra Director,Greater Noida ProductivityCouncilFrm Director & Head,National Productivity Council, GOI Transformational Leadership is the need of hour to accept…
Read More » -
नेपाल में प्रदेश नंबर पांच हुआ लुंबिनी, राजधानी हुआ दांग
प्रदेशों के राजधानी मुख्यालय चयन में सत्ता पक्ष की राजनीतिक दृष्टि काठमांडू। नेपाल में प्रदेशों की राजधानी और उसके नामकरण…
Read More » -
THE RDT SHOW : हाथरस कांड सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुँचा?
इस शो में बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी सम सामयिक विषयों पर चर्चा करते हैं. उनसे बात करते…
Read More » -
बाबरी विध्वंस : सुप्रीम कोर्ट, लिब्रहान और सेशंस कोर्ट के निष्कर्ष में अंतर क्यों?
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सेशंस कोर्ट ने पिछले हफ़्ते सभी अभियुक्तों को बाइज़्ज़त बरी कर दिया . अदालत ने कहा यह घटना सुनियोजित नहीं थी . अदालत ने इस कांड के लिए अराजक तत्वों को ज़िम्मेदार बताया. लाल कृष्ण आडवाणी के बारे में अदालत ने कहा कि वह मस्जिद को बचाने की कोशिश कर रहे थे जबकि वह बाबरी मस्जिद के ख़िलाफ़ आंदोलन के अगुआ थे . इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में इसे आपराधिक कृत्य बताया था और जस्टिस लिब्रहान जॉंच आयोग ने सुनियोजित षड्यंत्र. पढ़िये वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी का विश्लेषण. छह दिसम्बर बानवे को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस कुछ अराजक तत्वों द्वारा अचानक हुई घटना थी अथवा यह की सालों के सुनियोजित और संगठित प्रयास का परिणाम था? इतिहास में यह सवाल हमेशा पूछा जाएगा. हमारे वेदों में कहा है कि सत्य का मुख सोने के पात्र से ढका हुआ होता है. सत्य की खोज श्रमसाध्य एवं अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है. सत्य अलग अलग कोण से अलग दिखता और देखने वाले की नज़र से भी. बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्मभूमि प्रकरण में मैं एक दर्शक रहा हूँ. चालीस साल से प्रत्यक्ष और उसके पहले का फ़ाइलों और पुस्तकों के ज़रिए. वास्तव में यह कहानी दिसम्बर उनचास से शुरू होती है, जब रात में पुलिस के पहरे में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियाँ प्रकट हुईं. अथवा जैसा कि पुलिस रपट में है कि चोरी से रखकर मस्जिद को अपवित्र कर दिया गया. विवादित बाबरी मस्जिद अयोध्या एक धर्म के लोगों द्वारा जबरन दूसरे धर्म के प्रार्थना गृह में क़ब्ज़ा. लेकिन सी बी आई उतना पीछे नहीं गयी. सी बी आई की कहानी पिछले शिलान्यास के आसपास शुरू होती है. चार्जशीट में उल्लेख किया गया कि हाईकोर्ट ने …
Read More » -
‘स्टेंडर्ड औपरेटिंग प्रोसीजर’
यदि बी. पी. आर. ऐंड डी. (ब्यूरो औफ़ पुलिस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट) देश में शांति-व्यवस्था भंग होने के विभिन्न प्रकरणों मेंं की गई कार्यवाही…
Read More »