श्रवण गर्ग
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लोकतंत्र सरकार की ‘जरूरत’ से अभी भी कुछ ज्यादा है!
-श्रवण गर्ग नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत (भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1980 बैच के अधिकारी) का कहना…
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आपदाओं को अवसर में पलटने में माहिर हैं मोदी !
साफ़ है कि सरकार के लिए मामला केवल कृषि क़ानूनों तक ही सीमित नहीं है। उसके लिए नाक का सवाल…
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बगावती चाहें तो एक और ‘कांग्रेस’ भी बना सकते हैं!
श्रवण गर्ग कांग्रेस के भविष्य को लेकर इस समय सबसे ज़्यादा चिंता व्याप्त है। यह चिंता भाजपा भी कर रही…
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क्या जंतर मंतर बन पाएगा नया शाहीन बाग?
श्रवण गर्ग कोरोना के आपातकाल में भी दिल्ली की सीमाओं पर यह जो हलचल हो रही है क्या वह कुछ…
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ओबामा की किताब से भी मुद्दा आख़िर तलाश ही लिया गया !
-श्रवण गर्ग, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक श्रवण गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार राहुल गांधी के आलोचक ऐसा कोई मौक़ा नहीं छोड़ते कि कैसे…
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क्या तनिष्क विवाद के बाद भी दोहराई जाएगी ‘विवेक’ कथा ?
जब किसी प्रतिष्ठित हिंदू संगठन के सम्मानित व्यक्ति द्वारा केवल एक समुदाय विशेष को लेकर ही इस तरह का कोई…
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जड़ें बहुत गहरी हैं टीआरपी फ़र्ज़ीवाड़े की!
श्रवण गर्ग वरिष्ठ पत्रकार क्या चिंता केवल यहीं तक सीमित कर ली जाए कि कुछ टीवी चैनलों ने विज्ञापनों के…
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जेपी आज होते तो कितने लोग उनका साथ देते?
लोक नायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज पुण्यतिथि है और तीन दिन बाद ग्यारह अक्टूबर को उनकी जयंती । श्रवण…
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खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है!
श्रवण गर्ग वरिष्ठ पत्रकार हम डर रहे हैं यह स्वीकार करने से कि हमें गांधी की अब ज़रूरत नहीं बची…
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लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता
लता जी पर मैंने कोई बीस-इक्कीस वर्ष पहले एक आलेख लिखा था । अवसर था इंदौर में ‘माई मंगेशकर सभागृह…
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