बुंदेली सावन गीत – जया मोहन प्रयागराज

 

जया मोहन, प्रयागराज 

आ गाओ को मास
मोरी गुइयाँ आ गाओ सावन को मास
तपन लू से मिल गयी निजात
आ गाओ।।।।
टप टप पड़त है प्यारी फुहारे
कारी बदरिया चंदा छुपा दे
हरियाली को हो गाओ राज
आ गाओ ।।।।।
बागन में कूके कारी कोयलिया
पवन झकोरे से झूमे डालिया
मनवा में जागे प्यार आस
आ गाओ।।।।।
कागज़ की नाव पानी मे तैराये
ताली बजा बच्चे मौज मनाए
जियरा में भरो है हुलास
आ गाओ।।।
हरी हरी मेहंदी हाथन में रचाई
ढोलक मंजीरे संग कजरी गाई
झूला झूले गुएयन के साथ
आ गाओ।।।।
दादुर मोर पपीहा बोले
नदी नारे ले हिचकोले
बिजुरी की तड़क से जी डरात
आ गाओ
सूनी सूनी मोरी अटरिया
बलमा मोरे भये परदेशिया
उनकी यादे हमखा रुलाए
आ गाओ सावन को मास

जयश्री श्रीवास्तव
प्रयागराज

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