भाजपा ने बबलू को पार्टी में लेकर रीता जोशी को क्या संदेश दिया!

जितेन्द्र सिंह बबलू को भाजपा में शामिल करने के पीछे क्या रीता बहुगुणा जोशी को ये छुपा मैसेज है कि आप चाहें तो जा सकती हैं। वैसे भी उनके साथ पार्टी नेतृत्व एक समय से सही नहीं कर रहा है। पहले तो सांसदी लड़ाकर सूबे का मंत्रित्व छीन लिया। कहां देश के सबसे बड़े सियासी सूबे का कई महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो वाला कैबिनेट मंत्री का पद और कहां दिल्ली दरबार की महज सांसदी। पिछले दिनों के केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में थोड़ी बहुत उम्मीद बनी थी कि शायद एडजस्ट कर संतुष्ट किया जाएगा मगर नाउम्मीदी ही हाथ लगी। जबकि इस विस्तार में उनकी प्रतिष्ठा और प्रभाव से काफी नीचे वालों को आगे बढ़ाया गया। और अब तो मानो हद ही हो गई। उनके घर को सरेशाम जलाने वाले को पार्टी में शामिल कर लिया गया। मतलब चाहे कोई कुछ भी लगावे मगर सियासी हलकों में जो मैसेज जाना था वह तो चला गया कि आपको जो फैसला लेना हो ले लें। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।
रीता बहुगुणा जोशी चाहें जितना इशारा करें कि हो सकता है कि नेतृत्व को जितेन्द्र सिंह बबलू के आपराधिक बैकग्राउंड के बारे में न पता हो। मगर उप्र की राजनीति में थोड़ी बहुत भी दिलचस्पी रखने वाला आम आदमी भी रीता बहुगुणा जोशी के घर पर अग्निकांड को जान रहा है और इस कांड के आरोपी जितेंद्र सिंह बबलू को भी। बल्कि ये कहना अतिश्योक्ती न होगी कि जितेंद्र सिंह बबलू को देश व्यापी पहचान और तत्कालीन मुख्यमंत्री की कृपापात्रता भी इसी अग्निकांड के चलते मिली थी।
इस कांड ने रीता बहुगुणा जोशी को एक जुझारू लड़ाकू महिला नेत्री की पहचान भी दी थी। इस कांड को लेकर ब्राह्मणों में व्याप्त नाराज़गी का ही नतीजा था कि लखनऊ कैंट की ब्राह्मण बाहुल्य सीट जो कि भाजपा का गढ़ मानी जाती थी उस पर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में ब्राह्मणों ने रीता बहुगुणा जोशी को जिताया था। जबकि राज्य में आम चुनावों के रुझान को देखें तो जनता ने बसपा को हटाने के लिए समाजवादी पार्टी को वोट दिया था। इसमें लखनऊ की अधिकांश सीटों पर सपा को ही पसंद किया गया था। इस चुनाव में सपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। कैंट के ब्राह्मणों के इस रुझान को देखते हुए ही भाजपा में शामिल होने के बाद 17 के चुनाव में फिर उन्हें कैंट से ही पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था।
इस मुद्दे पर रीता की पीड़ा जायज़ है। वो‌ स्तब्ध हैं। अभी भी विश्वास नहीं कर पा रही हैं कि उनके घर को जलाने वाले को उनकी ही पार्टी ने शामिल कराकर एक तरह से क्लीन चिट दे दी है। रीता बहुगुणा के मुताबिक उन्होंने अपनी पीड़ा से शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है। उन्हें इंतजार है कि शीर्ष नेतृत्व इस पर क्या निर्णय करता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पटेल की मासूमियत देखिए। उन्हें बताया गया कि बबलू के ऊपर लगे आपराधिक मुकदमे अब वापस हो गये हैं और अब वह पाक साफ हो गये हैं। तो उन्होंने उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया। है न कमाल की बात। जबकि रीता जी के मुताबिक इस मामले में चार्जशीट लगाई जा चुकी है।
बहरहाल राजनीतिक समीक्षकों की माने तो अगर भाजपा शीर्ष नेतृत्व रीता बहुगुणा जोशी के विरोध के बाद भी बबलू को पार्टी से नहीं निकालता है तो ये उनके लिए स्पष्ट संदेश है कि भाजपा जो अब ‘भारत जीतो पार्टी’ बन चुकी है को सिर्फ जीत से मतलब है। उसके लिए वह कुछ भी करेगी। और अगर आप पार्टी के निर्णय से सहमत नहीं हैं तो आप पार्टी छोड़ कर जा सकती हैं।

राजीव तिवारी बाबा, पत्रकार, लखनऊ

Leave a Reply

Your email address will not be published.

seventeen − 1 =

Related Articles

Back to top button