जेपी नड्डा लखनऊ पहुँचे, राजनीतिक सरगर्मी तेज

बंगाल के साथ उत्तर प्रदेश में भी विधान सभा चुनाव की तैयारी शुरू

भारतीय जनता पार्टी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा राजनीतिक हलचल के बीच शाम को लखनऊ पहुँचे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद शर्मा , उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा और पार्टी पदाधिकारियों ने एयरपोर्ट पहुँचकर उनका स्वागत किया. पार्टी अध्यक्ष के रूप में श्री नड्डा की यह पहली लखनऊ यात्रा है.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा

श्री नड्डा के अलावा पार्टी के कई और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी लखनऊ पहुँचे हैं.

बीजेपी नेताओं के अनुसार श्री नड्डा दो दिनों तक लखनऊ में रहकर योगी सरकार के मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों और सोशल मीडिया प्रचारकों से मिलेंगे. कहा जा रहा है श्री नड्डा उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए आ रहे हैं.

लेकिन समझा जाता है कि उनका मुख्य मक़सद प्रधानमंत्री के भरोसेमंद अफ़सर अरविंद कुमार शर्मा को लखनऊ में राजनीतिक रूप से स्थापित करना है.

श्री शर्मा कुछ दिन पहले दिल्ली में भारत सरकार के सचिव का पद छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए. उन्हें तत्काल विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया. चर्चा है कि शीघ्र ही उन्हें योगी सरकार में महत्वपूर्ण पद देकर सत्ता का एक नया केंद्र बना दिया जाएगा. अरविंद कुमार शर्मा लम्बे समय तक नरेंद्र मोदी के साथ काम कर चुके हैं.

कहा जा रहा है कि शर्मा को लखनऊ भेजने का मक़सद उत्तर प्रदेश में प्रशासन को चुस्त दुरुस्त करना और सरकार तथा पार्टी के बीच खाईं कम करना है.

यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी जिस तरह हिंदुत्व का नया चेहरा बनकर उभरे हैं और अपनी छवि बनाने में लगे हैं, उससे केंद्रीय नेतृत्व उनको सम्भावित राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को लेकर भी सशंकित है.

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे.

खबर है कि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कल दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के साथ राजनीतिक मुलाक़ात की थी. इसका मक़सद तो बंगाल चुनाव बताया जा रहा है , पर कहा जाता है कि चर्चा में उत्तर प्रदेश भी शामिल था. श्री मौर्य से केंद्रीय नेतृत्व प्रसन्न बताया जाता है.

समझा जाता है कि बीजेपी ने बंगाल के साथ – साथ उत्तर प्रदेश में भी विधान सभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. इस लिहाज़ से श्री नड्डा की यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

राम दत्त त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार

Jan 21, 2021 at 2 pm

राम दत्त त्रिपाठी और संजय शर्मा की बातचीत के प्रमुख अंश 

राम दत्त त्रिपाठी : नमस्कार मैं हूँ राम दत्त त्रिपाठी और आप देख रहे है मीडिया स्वराज यूट्यूब और फेसबुक चैनल्स  पर .. आज मेरे साथ है विशेष मेहमान संजय शर्मा जी 

                        ..संजय शर्मा जी लखनऊ के काफी जाने मने चर्चित पत्रकार हैं. 4  PM एक सांध्य  दैनिक निकालते हैं .. इसके अलावा वीकेंड  टाइम्स साप्ताहिक हैं. और वो अपने राजनैतिक और प्रशासनिक ख़बरों के लिए ख़ास कर बहुत  जाने जाते हैं ..  उनकी पकड़ करीब-करीब सभी पार्टियों में अच्छी हैं.

आज चर्चा का विषय हैं उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में जो पिछले एक हफ्ते से हलचल हैं खलबली हैं और उसमे आज चूकी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  जेपी नड्डा जी आने वाले हैं, तो इसलिए ये माना जा रहा हैं की अब वो जो हलचल हैं, वो  चर्चा हैं वो किसी मुकाम पर पहुंचने  वाली हैं ..

   शर्मा जी, बीजेपी के लोगो का  बयान तो ये आया हैं वो अगले पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए आ रहे हैं जेपी नड्डा जी और कार्यकर्ताओं से बात करेंगे और जो उनके सोशल मीडिया के जो उनके प्रचारक हैं उनसे बात करेंगे  .. आपको क्या लगता हैं की पंचायत चुनाव के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष आ रहे हैं .. 

संजय शर्मा: नहीं बीजेपी इसमें तर्क तो ये ले रही हैं की हम हैदराबाद के चुनाव तक में हम राष्ट्रीय अध्यक्ष  को ले गए.  लेकिन ये बेमानी बात हैं .. भारतीय जनता पार्टी ने इन चार साल के अंदर बहुत बड़ा भूकंप आया हुआ हैं .. निचले से बड़े स्तर तक में ये चर्चा का विषय बना हुआ हैं कि  अरविन्द शर्मा का रोल क्या  होगा.

अरविन्द शर्मा प्रधानमंत्री के सबसे करीबी और  13 -14  साल से बिलकुल साथ में रहने वाले हैं .. तो वो सिर्फ एमएलसी बनाने के लिए यहाँ भेज रहे हैं ये संभव नहीं हैं.. वो दरअसल उनके रोल  को लेकर जो संग्राम छिड़ा हुआ हैं वो संग्राम बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा हैं और वो संग्राम  बड़े कार्यकर्ताओ में गलत मैसेज जाये उसके लिए ज़रूरी हैं उसको ख़तम किया जाये .. तो मुझे लग रहा हैं की आज उनका दौरा हैं  वो कहीं न कहीं आज इस बात के लिए अंकित  करता हैं की कही बहुत बड़ा राजनीतिक  अस्थिरता का दौर बीजेपी के अंदर आया हैं और उसको निपटाने के लिए शायद नड्डा जी का यहाँ दौरा हैं और इसी क्रम में आज वो लखनऊ आ रहे हैं 

संजय शर्मा : कार्यकर्ताओं  की मीटिंग एक बहाना हैं संवाद हैं लेकिन मुख्य बात ये हैं  की जो राजनीतिक अस्थिरता  की जो बातें  हो रही  हैं जो कोल्ड वॉर हैं मुख्यमंत्री  और  केंद्र  के बीच में कहीं न कहीं मुख्यमंत्री मंत्री जी को इससे दूर करना पड़ेगा क्योंकि  लखनऊ से दिल्ली तक ये चर्चा ये बड़ी आम हो गई हैं कि  कुछ तो हैं जिसकी पर्दा दारी हैं .. तो राजनीतिक गलियारों में संकेतों का बड़ा अर्थ होता हैं .. ये जो संकेत लगातार दिए जा रहे हैं चार दिनों से संकेत भी इतने भयंकर स्टाइल से दिए गए हैं की वो उसका लग रहा हैं की कुछ न कुछ फायदा नुक्सान उसको बीजेपी को देखना हे पड़ेगा ..

 राम दत्त त्रिपाठी :  मुझे लगता हैं कि  ये चार दिनों से नहीं ..ये शुरुआत हुई हैं जब मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ जी दिल्ली गये थे कुछ दिन पहले और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से और गृह मंत्री जी अमित शाह जी से भेट हुई थी .. उसके बाद से ही  कुछ खलबली शुरू हो गई हैं .. 

संजय शर्मा : नहीं देखिये उसके पीछे लॉजिक हैं  जब भी मुख्यमंत्री मंत्री जी दिल्ली जाते हैं आप उनका ट्वीटर अकॉउंट  देखिये.. जिससे मिलते हैं उनके साथ फोटो ट्वीट करते हैं ..इस बार भी मुख्य मंत्री जी  का दौरा जब दिल्ली हुआ तो वो अमित शाह जी से मिले और वो उनका फोटो ट्वीट किया वो राष्ट्रपति से मिले और उन्होंने उसका फोटो  ट्वीट किया लेकिन प्रधान मंत्री से उनकी मुलाक़ात हुई लेकिन ना उन्होंने उनका मुलाकात का जिक्र किया ट्वीटर में और न फोटो ट्वीट किया तो बड़ी सरगर्मियां तभी से तेज हो गई कि  आखिर ऐसा क्या हो गया कि  प्रधान मंत्री से मुलाकात भी हो गई और फोटो भी ट्वीट नहीं  किया .. अचानक 3 दिन बाद एक फोटो ट्वीट होता हैं  और फोटो में प्रधान मंत्री जी मेज के एक कोने में बैठे होते हैं और मुख मंत्री दूसरे कोने में बैठे होते हैं.. 

 राम दत्त त्रिपाठी :  और काफी बड़ी मेज हैं वो 

संजय शर्मा : और काफी बड़ी मेज हैं वो .. और उसी के   दूसरे दिन का फोटो देखेगे आप प्रधान मंत्री पीएमओ ट्वीटर पर जितने लोग मिले हैं मुख्यमंत्री मंत्री से या बाकि लोग मिले हैं तो प्रधान मंत्री जी सबसे हाथ में गुलदस्ता लिए , जैसे उनकी शैली हैं फोटो ट्वीट की हैं लेकिन बड़ी बात हो रही  हैं राम दत्त  सर की वो फोटो न तो पीएमओ ने ट्वीट किया प्रधानमंत्री   के साथ न तो CM  ने ट्वीट किया ..

 राम दत्त त्रिपाठी : तो वो फोटो आया कैसे ?

संजय शर्मा : तो वो फोटो आया कहा  से ये चर्चा का विषय बना . अब प्रधानमंत्री के दफ्तर का फोटो और प्रधान मंत्री भी ऐसे की वो फोटो खिचवाते समय भी एंगल का ध्यान रखते हैं की वो फ्रेम में कोई दूसरा नेता न आ जाये ..तो वो फोटो जब जारी हुआ तब एक कोने में ये और एक कोने में वो तो राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई

 … और उसके तत्काल बाद अरविन्द शर्मा लखनऊ आ जाते हैं .. जब अरविन्द शर्मा आ भी जाते हैं तो पहले नेता हैं प्रधानमंत्री के इतने करीबी मैसेज सब में था ..लेकिन जब उनकी जोइनिंग होती हैं बीजेपी के दफ्तर में तो मुख्य मंत्री जी नहीं जाते हैं ये दूसरा संकेत था ..वरना छोटे बड़े कोई बड़े नेता आते हैं तो मुख्य मंत्री आम तौर पर जोइनिंग कराने चले जाते हैं और अरविन्द जैसे बड़े कद का  नेता लेकिन मुख्य मंत्री नहीं जाते हैं ये दूसरा संकेत था 

.. अरविन्द शर्मा डिप्टी CM  के घर पे जाते हैं केशव मौर्या के.. दिनेश शर्मा जी उनसे मिलने आते हैं तमाम ब्यूरोकेट  उनके अरविन्द शर्मा के घर मिलने चले जाते हैं .. चार दिन बीतते हैं लेकिन मुख्य मंत्री जी या तो टाइम नहीं देते या तो या तो मुख्य मंत्री से मिलने नहीं जाते हैं चार दिन बाद मुलाकात होती हैं .उस मुलाकात का भी मुख्यामंत्री जी का प्रेस नोट में  कोई ज़िक्र नहीं होता हैं .. 

ये संकेत साफ़ हैं और इन संकेतो से बीजेपी के निचले स्तर के कार्यकर्ता से दिल्ली की मीडिया से ले करके दिल्ली की पोलिटिकल खेमे में ये बात जग जहीर हो जाती हैं .. अब विपक्ष तो मजे लेगा.. संजय सिंह ने ट्वीट कर दिया कि  मोदी और योगी में जंग हैं तो विपक्ष तो ऐसे मौके कहा छोड़ेगा जंग हो भी ना तो जंग हो भी गई . कागजों में हो गई गलियारों में हो गई  और पोलिटिकल जंग.

 राम दत्त त्रिपाठी : आप का क्या आकलन हैं की प्रधानमंत्री जी को अपना जो एक विश्वस्त अफ़सर  हैं उन्होंने गुजरात में भी जो कार्यालय में मुख्य मंत्री कार्यालय में काम किया उन्होंने दिल्ली में भी प्रधान मंत्री कार्यालय में  काम किया और भारत सरकार में सचिव स्तर के .. दो साल का कार्यकाल बाक़ी था कोई जल्दी नहीं थी उनको राजनीति में आने की उनको रिटायरमेंट  के बाद भी आ सकते थी तो प्रधान मंत्री जी को ऐसी क्या  ज़रुरत पड़ी उनको भेजने की क्या लगता हैं ..

संजय शर्मा- देखिये सर पिछले दिनों में घटना हुई थी विधान सभा में अभूतपूर्व घटना हुई थी 150 -200 विधायक धरने में बैठ गए थे .. मुख्यमंत्री के खिलाफ विधान सभा में धरने में बैठ गए थे एक अपने विधायक  साथी   को  लेकर कि  नौकरशाही हमारी बात सुन नहीं रही हैं .. 

उत्तर प्रदेश के अगर आज हाथ तो खड़े कराये जाये 95-98 %  ब्यूरोक्रेट   से दुखी हैं ९८% विधायक.  .. विधायकों का  दर्द ये हैं कि  नौकर शाही उनकी बात नहीं सुन रहे. उनका काम नहीं  कर रहे.एक साल बचा हैं .. तो ये जो बगावत के सुर हैं ये कभी भी विस्फोट  के रूप में ले सकते हैं  .. लगातार सूचना मिल रही थी कि  प्रधान मंत्री जी को और गृह मंत्री जी को , जेपी नड्डा जी को कि  उत्तर प्रदेश में असंतोष बढ़ता जा रहा हैं .. नौकर शाही जितनी  इस सरकार में हावी हुई, उतनी मैंने कम से कम  15  साल में लखनऊ में नोकरशाही  का हाल नहीं देखा .  ना विधायकों की सुनी जाती हैं ना मंत्रियों की सुनी जाती हैं .

. दूसरा संकेत एक ये भी था की विधायकों और मंत्रियों को बेइज्जत किया जाता हैं ..तो पार्टी हैं जब पिछली बार भी अमित शाह जी भी आये थे उन्होंने ये साफ़ कहा था की हर  मंगलवार को मंत्री बैठ के कार्यकर्ताओं की बात सुनेंगे  लेकिन सरकार के रवैये में अंतर नहीं आया ..

      दूसरी बार जो राजनीतिक गलियारों में और मीडिया के गलियारों में चर्चा हो रही हैं की मुख्यमंत्री जी को कुछ लोगो ने ये सलाह दी थी की आप तो प्रधान मंत्री पद का मैटीरियल हैं . नारे लगने लगे मोदी के बाद योगी .. मुझे लगता हैं आज राजनीति के दौर में कोई विकल्प नहीं बनने देना चाहता हैं अपना.

 और योगी जी का कद जितना बड़ा हैं .. बिहार में वो बंगाल में वो हैदराबाद में वो फायर ब्रांड नेता हैं जहाँ वो तक़रीर करते थे तो वहां  भीड़  आ जाते थी .. हिंदुत्व का जो बड़ा ब्रांड बन गया . और जो बड़े नेता के इर्द  गिर्द चारो तरफ वो लोग रहते हैं और कान भरते हैं की आप तो प्राइम मिनिस्टर मैटीरियल हैं मुझे लगता हैं योगी जी को उनके नुक्सान हो गया. 

राजनीति  में कभी कोई विकल्प नहीं बनने देता अपना तो मुझे लगता हैं मोदी जो और अमित शाह को भी लगा होगा कि  दिल्ली में उनका विकल्प बन  रहा हैं ..

राम दत्त त्रिपाठी : नहीं तो आपको लगता हैं की योगी जी को लो प्रोफ़ाइल  रहना चाहिए जो मीडिया में इतनी इमेज बिल्डिंग हैं रोज विज्ञापन हैं डॉक्यूमेंटरीज हैं  यहाँ तक की टाइम मैगज़ीन में भी छपवाया गया कार्य कुशलता के बारे में तो थोड़ा लो प्रोफ़ाइल  रहना चाहिए ऐसा आपको लगता हैं ..

संजय शर्मा : मुझे लगता हैं वो टाइम मैगज़ीन भी बहुत बड़ा एक आधार बन गया हैं .देश में जितने भी मुख्यमंत्री हैं भारतीय जनता पार्टी के उसमे किसी ने कोशीश  नहीं  की कि  विदेश में छपे.  बीजेपी में लाइन बाटी हुई हैं.. मोदी जी कहाँ  अपनी ब्रांडिंग करेगे कोई दूसरा सपने में सोचता भी नहीं हैं वहाँ  तक जाने के लिए .. तो अब आप टाइम मैगज़ीन में अमेरिका में अपना विस्तार करेंगे तो कहीं ना कहीं मोदी जी की ब्रांडिंग  हैं उसमे असर तो पड़ता  ही पड़ता हैं . और मोदी जी जिस PR शैली के मास्टर हैं  उसमे दखल पढता हैं मैसेज जाता हैं  कि वास्तव में योगी जी प्रधान मंत्री के लिए इक्षुक  हैं नारे लगाने लगे . तो राजनीति  में बड़े खतरनाक नारे होते हैं . 

मुझे लग रहा हैं की अरविन्द शर्मा की जो लैंडिंग  हुई हैं वो कहीं ना कहीं इन नारों का रिजल्ट हैं . कहने को तो कोई नहीं कहेगा , बीजेपी कहेगी हमारी पार्टी हैं हमारा परिवार हैं , हकीकत ये हैं की जो चर्चाएं   हो रही हैं पोलिटिकल चर्चाएं हो रही हैं उसमें  यही चर्चाएं हैं कि  योगी गई प्रधानमंत्री जी का विकल्प बनने की कोशिश कर रहे थे . कोशिश नहीं भी कर रहे हों लेकिन  चर्चाएं हो रही थी . और कहते हैं कि अमित शाह जी को ये चर्चाएं पसंद नहीं आ रही. उनकी जगह  कोई भी व्यक्ति होता उसको पसंद नहीं आती. 

@Ramdutttripathi

Email : ramdutt.tripathi@gmail.com

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