बीएचयू की वैज्ञानिक रिसर्च में सोंठ के चमत्कारिक गुण सामने आए

जीवन की गुणवत्ता पर सोंठ चूर्ण का प्रभाव

वैद्य सुशील कुमार दुबे
वैद्य सुशील कुमार दुबे

​सोंठ एक औषधि है जो भारत के प्रत्येक घर में मसाले के रूप में प्रयोगकी जाती रही है | अदरक को सुखा करके सोंठ बनायी जाती है | इसका प्रयोग आयुर्वेद के ग्रंथो में अनेक रोगों में किया जाता है | इस औषध का महत्व इसके पर्यायों से जाना जा सकता है जिसको महौषध एवं विश्वभैषज्या के नाम से जाना जाता है | यह गुणों में लघु (हल्का) ,स्निग्ध (चिकना) ,विपाक में मधुर (मीठा) एवंतासीर में उष्ण होती है | कफ दोष एवं आम दोष को कम करने के कारण हीइसे सुन्ठी भी कहा जाता है, जिससे बात रोगों की उत्तम औषधि के रूप मेंप्रयोग किया जाता है | इससे पाचन क्षमता, कब्ज निवारक तथा हृदय केलिए हितकारी है | अदरक के मुकाबले सोंठ में तीक्ष्णता कम होती है, जिससेइसका प्रयोग गर्म ऋतु में भी किया जा सकता है |

सोंठ के गुण कर्म गुण- लघु, स्निग्धरस-कटुविपाक- मधुरवीर्य- उष्णदोषकर्म- कफ वात शामककटु एवं स्निग्ध होने से – कफघ्न एवं श्वासहर,
अदरक(Zinziber officinale Rosc.)सोंठ (Zinziber officinale Rosc.) 

आधुनिक चिकित्सा  पैरामीटर के अनुरूप शोध

वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरने हेतु आधुनिक चिकित्सा के पैरामीटर के अनुरूप सबसे पहले 18 जुलाई 2020 को चिकित्सा विज्ञानं संस्थान की  एथिकल कमेटी से इसके संस्तुति ली गयी ,तत्पश्चात दिनांक 07/08/2020 को एस.एस. चिकित्सालय के मुख्य अधीक्षक से अनुमति लेने के पश्चात दिनांक 09/08/2020 को विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना देने के पश्चात नियमानुसार इस शोध की शुरुआत किया गया | भारत वर्ष में यह पहला शोध है जिसमे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के तीन संस्थानों यथा चिकित्सा विज्ञानं संस्थान, भारतीय प्रद्योगिकी संस्थान एवं विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर यह शोध कार्य सम्पन्न हो रहा है जो महामना जी के मूल उद्देश्य की पूर्ति करने को इंगित करता है |

अध्ययन विधि

​पैरामीटर में व्यक्तियों के द्वारा कन्सेंट लेना, 26 प्रश्न-उत्तर WHO के quality of life पैरामीटर के आधार पर लगभग 1100 व्यक्तियों पर 15 दिन इस औषधी को देकर पहले दिन, 15 वें दिन एवं 30वेंदिन पुन: पुन: प्रश्न-उत्तर किया गया | जिसमे इन लोगो में से मात्र 2 व्यक्तियोंको Covid Positive हुआ जो होम आइसोलेशन में ही रहकर स्वस्थ हुए जोटीम के लोगों के लिए उत्साह जनक परिणाम रहा साथ ही जिन लोगों के गले में खराश थी और जिन लोगों को खांसी जुकाम मौसम बदलने पर होता था उन पर सोंठ के चूर्ण का उपयोग करने पर इस वर्ष उन लोगों को कोई समस्या नहीं  हुई |

सोंठ चूर्ण लेने की  विधि

सोंठ चूर्ण 2 ग्राम दिन में दो बार भोजन के उपरान्त जीभ पर 10-15 मिनट रख कर चूसना है तत्पश्चात अंदर निगल जाना है |

2. सोंठ चूर्ण एक रत्ती दिन में दो बार सूंघना है (नस्य के रूप में) अर्थात मूँग के दाने के बराबर प्रत्येक नाक के छिद्र के द्वारा आसानी से धीमे धीमे अंदर की ओर खींचना है |

वर्ज्य-1. 8 वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को नाक से नहीं सूंघना है |2. मुंह में छाला होने पर पहेल देशी गाय के घृत का मुंह में लेप लगाने केपश्चात सेवन करना है |➢ किसी अन्य प्रकार से असुविधा होने पर चिकित्सक से अवश्य परामर्शलेने का कष्ट करें |➢ आचार्य प्रियव्रत शर्मा जी के अनुसार सोंठ चूर्ण को 1 से 2 ग्राम मात्रामें प्रयोग किया जा सकता है |

निष्कर्ष

 भारतीय प्रौधोगिक संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. सुनील कुमार मिश्रा  द्वारा 190 फाईटोमालिक्युल निकाला गया है जिसका विज्ञान संस्थान के डॉ. राजीव मिश्रा जी द्वारा बायोइन्फोर्मेटिक्स के माध्यम से एन्टी वायरल, एन्टी इन्फ्लेमेटरी एवं इम्यून बूस्टर के मोलिक्यूल को अलग करने का प्रयास किया जा रहा है | 

आयुर्वेद के विकृति विज्ञान विभाग से प्रोफेसर पी.एस. व्याडगी, प्रोफेसर नम्रताजोशी आधुनिक चिकित्सक प्रो. आर.एन. चौरसिया द्वारा न्यूरो पर इसका प्रभाव, शोध कार्य का नेतृत्व करने वाले डॉ. विश्वम्भरनाथ सिंह द्वारा नाक, कान एवं गला के प्रभावों पर अध्ययन में सहयोग प्रदान किया जा रहा है.

 साथ ही प्रोफेसर टी बी सिंह द्वारा सांख्यिकी आँकड़े तथा प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी द्वारा इस सोंठ चूर्ण की विषाक्तता चूहों पर अध्ययन किया जा रहा है | इस औषधि के द्रव्यगुण संबंधी गुण कर्मों का संकलन डॉ अवनीश पाण्डेय द्वारा किया गया तथा अन्य विषय विशेषज्ञों का सहयोग मिलता रहता है |

​इससे स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति मे रसोई मे उपलब्ध मसालों मे मुख्यतया अदरक एवं सोंठ का उपयोग करने से भूख का बढ़ना,सांस, खांसी, गले मे खरास तथा बुखार में लाभ मिला, अच्छी नीद के साथ ऊर्जा की अनुभूति हुई तथा चिंता, निराशा एवं अवसाद में भी कमी पायी गयी |

वैद्य सुशील कुमार दुबे
सहायक आचार्य
क्रियाशारीर विभाग
आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी

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