कोरोना वैक्सीन से सावधान!

-पंकज प्रसून

कहीं यह दवा निर्माता कंपनियों का खेल तो नहीं!!

कोरोना से मुक्ति पाने के लिये वैक्सिन तैयार हो गयी, है और यह खबर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। फाइजर , मॉडर्ना , ऐस्ट्राजेनिका और स्पुतनिक-V वैक्सिन अब सारी दुनिया में बिक्री और विपणन के लिये तैयार हैं।

लेकिन कुछ विज्ञानी और विशेषज्ञ इन वैक्सिन के शोरगुल से दूर कुछ ऐसे सवाल उठा रहे हैं जिन पर हर किसी को ध्यान देना जरूरी है।

संसार की सबसे बड़ी वैक्सिन उत्पादक कंपनी है मर्क। उसके सीईओ केन फ्रेजियर का कहना है कि वैक्सिन इतनी जल्दी तैयार नहीं हो सकती है। उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफ़ेसर तसेडल नीले को दिये गये ताज़ा इंटरव्यू में बताया कि इतनी जल्दी वैक्सिन तैयार नहीं हो सकती।

सबसे तेजी से वैक्सिन तैयार करने का उदाहरण है  कण्ठमाला  रोग की वैक्सिन, जिसे उनकी कंपनी ने तैयार किया था और उसमें चार साल लगे थे। ईबोला की वैक्सिन को तैयार करने और बाजार में लाने में साढ़े पांच वर्ष लगे थे।

तपेदिक की वैक्सिन को तैयार करने में तेरह साल लगे थे।  रोका वायरस की वैक्सिन को 15  साल और चिकन पॉक्स की वैक्सिन को आने में तो 28 साल लग गये थे।

एचआईवी की पहचान सन् 1984 में ही हो गयी थी और अमरीका के स्वास्थ्य विभाग ने घोषणा की थी कि उसकी वैक्सिन दो साल के भीतर आ जायेगी। लेकिन 36 साल गुजरने के बाद भी वैक्सिन नहीं निकली है।

वैक्सिन तैयार होने में देर क्यों होती है?  

फ्रेजियर का कहना है कि संभावित वैक्सिन की कई

तरह से जांच होने के बावजूद उसे तैयार करने में काफी वक्त लग जाता है क्योंकि उसके कठिन वैज्ञानिक मूल्यांकन करने की जरूरत होती है। जहां तक कोरोना का सवाल है तो उस वायरस को हम अभी तक समझ ही नहीं पाये हैं। न ही हमें इस बात की जानकारी है कि वह हमारी इम्यून प्रणाली पर वह किस तरह से असर करता है।

 कोई नहीं जानता कि अभी जो वैक्सिन बनायी जा रही है वह कितनी असरदार होगी। लेकिन आम जनता स्थिति के सामान्य होने के लिये इतनी बेताब है कि दवा निर्माता कंपनियों पर जल्दबाजी करने का दबाव है।

 लेकिन कई ऐसे उदाहरण भी हैं जिनमें वैक्सिन ने इम्यून प्रणाली को उत्तेजित तो कर दिया लेकिन शरीर को सुरक्षा नहीं दे सकी। बल्कि ऐसे उदाहरण भी हैं जिनमें वैक्सिन ने उल्टे वायरस को ही कोशिकाओं पर हमला करने में मदद की। क्योंकि वैक्सिन पूरी तरह से तैयार नहीं थी।

यह भी देखा गया है कि वैक्सिन से लाभ की बजाय हानि ही हुई। जैसे  स्वाइन फ्लू की वैक्सिन के मामले में हुआ।

पिछली शताब्दी  के अंतिम वर्षों में सात श्री वैक्सिन तैयार हुई जिनमें चार को मर्क ने तैयार किया था। और इस बात की भी गारंटी नहीं है कि वैक्सिन से कोरोना की इलाज हो जायेगा। धरती पर साढ़े सात अरब लोग रहते हैं। आज तक इतनी बड़ी आबादी को वैक्सिन लगाने का काम नहीं हुआ है।

अतः ऐसे राजनेताओं की जरूरत है जो जनता को सच्चाई से अवगत करायें। वैक्सिन बेच कर बड़ी बड़ी दवा निर्माता कंपनियां तो खरबों डॉलर कमा लेंगी उन्होंने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है लेकिन  क्या वैक्सिन :

1.कोरोना का इलाज कर देगी

2.लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव देगी

3.कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल जाने से रोक सकेगी

4.कोरोना से होने वाली मौत को रोक सकेगी

 इन चारों सवालों का जवाब है– नहीं।

हाल में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में डॉ  अरविंद जोशी ने लिखा है कि इतने व्यापक रूप में कोरोना वैक्सिन का इस्तेमाल करना घातक साबित हो सकता है।और उनसे Subacute Sclerosing Pan Encephalitis, Ascending Polyneuritis, Myopathies, Autoimmune Diseases, and rarer chance of triggering development of malignancies are most dreaded possibilities जैसे खतरनाक रोगों का शिकार होना पड़ सकता है।

आइंस्टाइन ने कहा था कि जीनियस और बेवकूफ के बीच यह फ़र्क होता है कि जीनियस की सीमाएं होती हैं।

 डेंगी के लिये वैक्सिन  तैयार करने की कोशिश के दौरान देखा गया है कि एंटीबॉडी पर आधारित बढ़ाई गई इम्यूनिटी की समस्या होती है।जिसकी वजह से परीक्षण के दौरान कई जानवरों और इंसान बीमार पड़ गये और उनकी मृत्यु भी हो गयी।

दवा निर्माता कंपनियां अपनी वैक्सिन मुहिम को झूठ और फरेब के आधार पर बना रही हैं। यह उनकी घोषणाओं में भी छुपा है। जब वे कहती हैं कि उनकी वैक्सिन 95% असरदार हैं तो इसका स्पष्ट मतलब है कि अगर आपने वैक्सिन ले ली है तो भी आपके कोविड से बचने की पूरी गारंटी नहीं है।

हिब्रू विश्वविद्यालय यरूशलेम में जैव रसायन की प्रोफेसर मीखाल लिनिअल का कहना है कि ” पुराने वैक्सिन दस वर्षों में तैयार होती थी। लेकिन अभी जो तुरंत फुरंत वैक्सिन तैयार हो रही है उसे मैं तो कदापि नहीं लूं।”

इसलिये कोरोना वैक्सिन से सावधान!!

कुछ दवा निर्माता कंपनियां कोरोना की दवाई तैयार करने में भी लगी हुई हैं। उन्हें अभी सफलता नहीं मिली है।तब तक इंतजार करें।

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