खुश होइए, नौकरी गई या आपने खुद छोड़ी, क्या फर्क पड़ता है…?

बिंदास रहिये, नौकरी ही तो गई है, क्यों न हम इससे कुछ बेहतर करने की राह पर सकारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़ें…

‘दि अटलांटिक’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ महीनों में अमेरिका में नौकरी छोड़ने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. महामारी के दौरान यह संख्या लगातार बढ़ती गई है, जिसे वहां लोग सकारात्मक ढ़ंग से देख रहे हैं. अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के दौरान उन लोगों ने सबसे तेजी से अपनी नौकरियों को लात मारी है, जो कहीं न कहीं किसी न किसी वजह से मजबूरीवश नौकरियां कर रहे थे. महामारी के दौरान सरकारी राहत कोष से उन्हें जो राहत मिली, उसी के बल पर उन्होंने अपनी मजबूरियों से बाहर आकर अपने लिये नये रास्तों की तलाश की. मेरे ख्याल से भारत में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. हां, यह बात और है कि यहां बेरोजगार होने वालों में ज्यादातर अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने वाले नहीं हैं बल्कि महामारी के कारण उन्हें अपनी नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. पर क्यों न हम भी इसे एक नये अवसर के रूप में लें और कुछ नया और कुछ बेहतर करने की ओर सकारात्मक नजरिये से आगे बढ़ें…

सुषमाश्री

अप्रैल के महीने में बड़ी संख्या में नौकरीेपेशा लोगों ने अपनी जॉब छोड़ दी. अमेरिका का रिकॉर्ड बताता है कि महज एक ही महीने में वहां नौकरियां छोड़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा थी. अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने इसे “Great Resignation” नाम दे दिया. लेकिन अमेरिका में नौकरियां छोड़ने वालों की तो यह शुरुआत भर थी. तीन महीने बाद जुलाई में यहां नौकरी छोड़ने वालों की तादाद और भी बढ़ गई. इसके बाद अगस्त महीने में नौकरी को लात मारने वालों की संख्या में और भी इजाफा हो गया. यानि यूएस में नौकरी को ठेंगा दिखाने वालों की संख्या में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोतरी होती गई. अगस्त माह के हालात देखते हुए अमेरिकी अर्थशास्त्रियों के लिये यह That Great Resignation? जैसा ही कुछ हो गया.

“Quits,” जैसा कि ब्यूरो आफ लेबर स्टैटिसटिक्स ऐसी सिचुएशन को कहते हैं, यही हालात आज हर इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है. उन सभी के लिए यह वक्त छुट्टी मनाने और आतिथ्य स्वीकारने वाला बन चुका है, खासकर आफिस तो उन्हें आज ऐसा महसूस हो रहा है, मानो एक विशाल दरवाजे में सबकुछ चक्रव्यूह की तरह गोल घूम रहा हो.

“Quits,” जैसा कि ब्यूरो आफ लेबर स्टैटिसटिक्स ऐसी सिचुएशन को कहते हैं, यही हालात आज हर इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है. उन सभी के लिए यह वक्त छुट्टी मनाने और आतिथ्य स्वीकारने वाला बन चुका है, खासकर आफिस तो उन्हें आज ऐसा महसूस हो रहा है, मानो एक विशाल दरवाजे में सबकुछ चक्रव्यूह की तरह गोल घूम रहा हो.

आवास और खाद्य सेवाओं से जुड़े तकरीबन 7 प्रतिशत कामगार अगस्त महीने में अपनी नौकरी छोड़ चुके हैं. इसे आप कुछ यूं भी समझ सकते हैं, जैसे कि 14 होटलों में से एक का क्लर्क, रेस्टोरेंट में अपनी सेवाएं देने वाला और बारबैक्स ने महज इसी एक महीने में अपनी अपनी नौकरियों को सायोनारा कह दिया. महामारी के कारण मिलने वाले कई राहत कोषों का धन्यवाद, जिसकी बदौलत कई छात्रों के लोन माफ कर दिये गये. खासकर उन सभी लोगों के, जो युवा हैं और उनकी आय कम है. यह भी एक बड़ा कारण रहा, जिसकी वजह से उन्हें अपनी वह नौकरी छोड़ने की आजादी मिल पाई, जिससे वे नफरत करते थे और किसी भी कीमत पर बस उससे बाहर आना चाहते थे.

बेशक इतने बड़े स्तर पर नौकरीपेशा लोगों का अपनी अपनी नौकरियां छोड़ना कहीं न कहीं एक नई आशा की किरण दिखाता है, जो हमारे अंदर यह हिम्मत भरता है कि हम कुछ न कुछ बेहतर कर सकते हैं.

बेशक इतने बड़े स्तर पर नौकरीपेशा लोगों का अपनी अपनी नौकरियां छोड़ना कहीं न कहीं एक नई आशा की किरण दिखाता है, जो हमारे अंदर यह हिम्मत भरता है कि हम कुछ न कुछ बेहतर कर सकते हैं.

आपने अमेरिकन लेबर के गोल्डन एज यानि अमेरिकी मजदूरों के सुनहरे काल के बारे में जरूर सुना होगा. इसके मुताबिक कहा जाता है कि 20वीं सदी में अमेरिकी नौकरीपेशा तकरीबन 40 वर्षों तक एक ही नौकरी में टिके रहते थे, तब तक, जबतक कि वे रिटायर नहीं हो जाते थे. हालांकि यह पूरी तरह झूठ है. सच तो यह है कि 1960 और 70 के दशक में लोग और भी तेजी से अपनी अपनी नौकरियां छोड़ते थे, जितना कि उन्होंने पिछले 20 वर्षों में भी नहीं छोड़ा होगा. वहीं, 80 के दशक में तुलनात्मक रूप से अमेरिकियों ने कम नौकरियां छोड़ीं, इस भय से कि कहीं उन्हें इससे बेहतर न मिली तो…? उन्हें इस बात का भी डर था कि नई नौकरी के लिये अगर किसी ने उनका साथ न दिया तो उन्हें लेने के देने न पड़ जायें. यही वजह रही कि अमेरिकी ऐसी नौकरियों के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे. अब ऐसा लगता है कि उन अमेरिकियों को पुरस्कृत किया जा रहा है, जो विषम परिस्थितयों में कम आमदनी लेकर भी कंपनी के साथ बने रहे. इस महान मंदी के दौर में अब उन्हें उनके इसी धैर्य के लिए पुरस्कृत करते हुये उनकी आय में बढ़ोत्तरी की जा रही है. यानि कहा जा सकता है कि The Great Resignation वाकई में great है.

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