बनारस में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में याचिका

वाराणसी में मोक्षदायिनी गंगा की अविरलता को बरकरार रखनें व गंगाजल में गिर रहे सिवेज पर रोक लगानें के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण ( एनजीटी) में याचिका दायर।* ललिता घाट पर गंगा मेंं पक्का प्लेटफार्म के निर्माण व  गंगा नदी में बालू के बीच नहर के निर्माण के विरुद्ध एनजीटी से कार्रवाई की माँग की गयी।


वाराणसी/दिल्लीप्राचीन नगरी बनारस में गंगा की अविरलता व लगातार मल-जल गिरनें पर लगातार सवाल उठाये जाते रहे हैं।बनारस में गंगा व उसकी सहायक नदियों वरुणा व अस्सी की दुर्दशा को लेकर स्थानीय निवासी व उच्च न्यायालय अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा हरित न्यायाधीकरण में याचिका दायर की गयी है।

याचिका में गंगा की सहायक नदियां वरुणा व अस्सी नदी में गिर रहे मल-जल पर रोक लगानें व इन दोनों नदियों पर निर्मित अवैध निर्माण की ध्वस्तीकरण की माँग की गयी है।याचिका में गंगा नदी में गिर रहे मल-जल पर रोक लगानें की माँग के साथ – साथ ललिता घाट के सामनें गंगा नदी को पाटकर बनाए जा रहे प्लेटफॉर्म निर्माण पर रोक लगानें की माँग की गयी है। 

बनारस ललिता घाट पर पक्का निर्माण

याचिका में कहा गया है की ललिता घाट पर गंगा नदी को पाटकर प्लेटफार्म बनाने से गंगा की अविरलता बाधित होगी तथा गंगा का पानीं घाटों से दूर भी जा सकता है। याचिकाकर्ता सह अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा गंगा नदी में जमा बालू के बीच नहर निर्माण को गंगा की सेहत के लिए खतरा बताया गया है तथा आशंका जाहिर किया गया है की ऐसे निर्माण से गंगा की धारा घाट से दूर चली जाएगी।याचिका में माँग की गयी है की बीएचयू के वैज्ञानिक यू.के चौधरी , आईआईटी बीएचयू प्रोफेसर सह संकटमोचन मंदिर महंत विश्वम्भर नाथ मिश्र और मल्लाह समुदाय के प्रतिनिधि को मिलाकर एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया जाय और उसकी संतुष्ति के आधार पर  अविलंब बनारस में गंगा नदी व उसमें मौजूद जलचर रक्षा हेतू बड़े फैसले लिए जाएँ।

याचिका में साफ पर्यावरण व साफ सुथरी गंगा को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीनें के अधिकार के तहत मूल अधिकार बताया गया है।अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका में गंगा नदी में शैवाल के बड़े पैमाने पर मिलनें पर चिंता जाहिर की गयी है।याचिका में गंगा को केवल नदी नहीं बल्कि  एक संस्कृति का परिचायक बताया गया है जिसमें सभी धर्मों के लोग आस्था रखते हैं – नजीर बनारसी की शायरी का उल्लेख भी 29 पृष्ठ की याचिका में किया गया है- ” हमनें नमाजें भी पढ़ीं हैं गंगा तेरे पानीं से वजू कर करके” ।

अधिवक्ता सौरभ तिवारी कहते हैं- ” गंगा नदी पर 1986 से अबतक अरबो रुपये खर्च किया गया लेकिन परिणाम बहुत सुखद नहीं रहा। बनारस की पहचान गंगा नदी व घाटों से है ऐसे में यहाँ गंगा जी की धारा की अविरलता बेहद जरूरी है।

बनारस गंगा में गिरने वाला एक नाला

अधिवक्ता व याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी नें अधिवक्ता तुषार गोस्वामी की मदद से यह याचिका दायर किया है।

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