उत्तर प्रदेश में ‘पीएम किसान’ निधि पर बड़ी स्ट्राइक; 30 लाख खातों में गड़बड़ी, रिकवरी शुरू

मीडिया स्वराज डेस्क

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) के तहत एक व्यापक ऑडिट और सत्यापन अभियान ने राज्य के ग्रामीण इलाक़ों में हलचल मचा दी है। केंद्र सरकार के निर्देश पर हुई जांच में लगभग 30 लाख लाभार्थी संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें अपात्र पति-पत्नी, नाबालिग और यहां तक कि जमीन बेच चुके लोग भी शामिल हैं।

1. घोटाले का पैमाना: आंकड़ों की जुबानी

राजस्व और कृषि विभाग के संयुक्त डेटा मिलान (Aadhaar और Ration Card) से धोखाधड़ी के विभिन्न परतों का खुलासा हुआ है:

दंपत्ति मामले (Spousal Claims) 

11,07,498 | एक ही परिवार में पति-पत्नी दोनों द्वारा लाभ लेना। |

पुराने मालिक (Previous Owners) 

12,30,192 | जमीन बेचने के बावजूद पुराने मालिक के खाते में भुगतान। |

दोहरा भुगतान (Double Payment) | 3,10,931 | एक ही जमीन पर पुराने और नए दोनों मालिकों को लाभ। |

नाबालिग (Minors) | 33,466 | पात्रता न होने के बावजूद बच्चों के नाम पर पंजीकरण। 

अन्य तकनीकी त्रुटियां | 2,91,908 | विरासत के अलावा अन्य कारणों से हुए म्यूटेशन। 

2. क्षेत्रीय प्रभाव: प्रयागराज और बहराइच का सच

जांच में पाया गया कि ग्राउंड लेवल पर सत्यापन की कमी का लाभ उठाया गया:

 * प्रयागराज: यहाँ 28,628 जोड़ों को अवैध रूप से लाभ लेते पाया गया।

 * बहराइच: 15,345 दंपत्तियों के खातों पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

 * सीतापुर और बरेली: इन जिलों में भी एफआईआर (FIR) और विभागीय जांच के जरिए करोड़ों के गबन की खबरें सामने आई हैं।

3. कानूनी कार्रवाई और वसूली (Recovery) के नियम

सरकार अब केवल किश्तें रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि सख्त कानूनी कदम उठा रही है:

 * रिकवरी नोटिस: अपात्र पाए गए लोगों को आधिकारिक नोटिस भेजकर अब तक ली गई राशि वापस करने का निर्देश दिया जा रहा है।

 * राजस्व ‘बोझ’ (Land Encumbrance): यदि कोई राशि वापस नहीं करता, तो उनकी जमीन के रिकॉर्ड में बकाया दर्ज किया जा सकता है, जिससे जमीन की बिक्री या हस्तांतरण असंभव हो जाएगा।

आपराधिक मुकदमे: जानबूझकर फर्जीवाड़ा करने वाले बिचौलियों और लाभार्थियों पर IPC की धाराओं (धोखाधड़ी) के तहत कार्रवाई की तैयारी है।

 स्वैच्छिक वापसी: अब तक लगभग ₹100 करोड़ से अधिक की राशि किसानों द्वारा स्वयं वापस की जा चुकी है, जो कार्रवाई के डर या जागरूकता का परिणाम है।

4. भविष्य की रणनीति: 22वीं किश्त के लिए नए नियम

भविष्य में ऐसी धांधली रोकने के लिए सरकार ने प्रणाली को ‘फुलप्रूफ’ बनाने का निर्णय लिया है:

अनिवार्य e-KYC: बिना डिजिटल सत्यापन के अगली किश्त जारी नहीं होगी।

 लैंड सीडिंग (Land Seeding): बैंक खातों को सीधे भू-लेखों (Land Records) से जोड़ दिया गया है।

डिजिटल मॉनिटरिंग: राशन कार्ड डेटाबेस का उपयोग कर परिवार की परिभाषा (पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे) को कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में 2.15 करोड़ लाभार्थियों को अब तक ₹90,000 करोड़ से अधिक दिए जा चुके हैं। इस व्यापक शुद्धिकरण अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर्स का पैसा केवल उन्हीं पात्र और जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी।

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