लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन का 12वां संस्करण

सक्षम आपूर्ति व्यवस्था, सामरिक सफलता की कुंजी- मुगलकालीन सैन्य अभियान इसके जीवंत उदाहरण

लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन के 12वें संस्करण में, मुगलकालीन सैन्य अभियान और साम्राज्य विस्तार पर अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर उनकी सक्षम आपूर्ति व्यवस्था और सामरिक सफलता की कुंजी पर चर्चा करते दिखे.

लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन के 12वें संस्करण में, मुगलकालीन सैन्य अभियान और साम्राज्य विस्तार पर चर्चा करते हुए अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रत्यय नाथ ने कहा कि मध्ययुगीन सामरिक व्यवस्था में, रसद आपूर्ति, कुशल कारीगरों की लगातार व्यवस्था एवं उपलब्धता और स्थानीय विशेषताओं के अनुसार अपने को ढालने की क्षमता मुगलों की सैन्य सफलताओं का कारण था।

प्रोफेसर नाथ अपनी पुस्तक “क्लाइमेट ऑफ कांक्वेसट्” पर वार्तालाप कर रहे थे। उन्होंने विषय पर आगे बोलते हुए कहा कि तत्कालीन समाज, “मांग और आपूर्ति” के सिद्धांत से प्रभावित, ग्रामीण क्षेत्रों से, स्व-प्रशिक्षित पैदल सैनिकों की टुकड़ियाॅ किराए पर उपलब्ध होती थी।

इनके हथियार भी स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए जाते थे। यह जत्थे प्रायः सर्दी के मौसम में, जब खेती के काम बंद होते थे, तब आसानी से उपलब्ध होते थे। इसी प्रकार लड़ाकू सैनिकों की मदद में पर्याप्त फॉलोअर्स, यानी “अनुचर” स्थानीय लोगों से पूरे किए जाते थे।

लाखों की संख्या में सैनिकों को राशन आपूर्ति, बंजारा समुदाय के लोग, हजारों, लाखों की संख्या में, बैलों और ऊंटों के ऊपर, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से लाकर करते थे। स्वयं में ऐसी क्षमता का विकास ही उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में, मुगलों के साम्राज्य विस्तार का कारण बना। आज के आधुनिक वातावरण में भी सेनाओं का लॉजिस्टिक्स- प्रबंधन, हमेशा की तरह सर्वोपरि रहेगा।

परिचर्चा के दूसरे भाग में वास्तुशिल्पी एवं शिक्षाविद, प्रोफेसर सोनल मित्तल ने, लखनऊ कैंट पर भू -मानचित्र के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया। सन 1814 से लेकर 1857 और उसके बाद कैंट के उद्भव और विकास पर प्रकाश डाला।

परिचर्चा का संचालन लखनऊ सैन्य साहित्य सम्मेलन के मेजर जनरल एच के सिंह और अध्यक्षता, ब्रिगेडियर बीएन सिंह ने की।

सैन्य साहित्य सम्मेलन के 31 अक्टूबर रविवार के कार्यक्रम में “पूर्व सैनिकों का राष्ट्र निर्माण में योगदान “पर पर चर्चा होगी, जिसमें सामाजिक और व्यावसायिक जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके कुछ पूर्व सैनिक, अपने अनुभव और समाज के भविष्य के पथ निर्धारण पर चर्चा करेंगे।

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