हज़रतगंज पुराने इमामबाड़े का गेट गिरा

धरोहर गिरने से लोग दुःखी

उत्तम सिंह लखनऊ

हज़रतगंज, लखनऊ स्थित बादशाह अमजद अली शाह के मक़बरे का पहला गेट जो हज़रतगंज की मुख्य सड़क पर स्थित है, जिसके बग़ल में एक ओर ‘मार्क्समैन’ नामक प्रसिद्ध रेस्टोरेन्ट तथा दूसरी ओर ‘लेन्स्कार्ट’ है, आज किसी समय गिर गया. अभी मेरे पास मेरी मित्र Suman Vini द्वारा इस स्थान की कुछ तस्वीरें मुझे भेजी गयी हैं जो मैं यहां पोस्ट कर रहा हूं.लॉक डाउन के कारण किसी के घायल होने की सूचना नहीं है अन्यथ वह एक व्यस्त स्थान है जहां कई लोग घायल हो सकते थे. हमारी एक ऐतिहासिक इमारत का इस प्रकार ध्वस्त हो जाना मुझे निजी तौर पर बहुत दुखी कर रहा है.

यह मकबरा ‘सिबतैनाबाद का इमामबाड़ा’ भी कहलाता है, बादशाह अमजद अली शाह अवध के चौथे बादशाह थे और वाजिद अली शाह इन्हीं की सन्तान थे. वे १२ मई १८४२ को ४३ वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठे थे. बादशाह बहुत सादी तबियत के इन्सान थे और बहुत धार्मिक थे. उनके स्वभाव के कारण लोग उन्हें आदर से ‘हज़रत’ कहते थे और उन्हीं के नाम पर हज़रतगंज बाज़ार भी बसा है. उन्होंने लखनऊ से कानपुर तक कंकड़ बिछवाकर एक पक्की सड़क भी बनवायी थी. गोमती नदी पर लोहे का पुल उन्होंने ही बनवाया था. यह पुल कर्नल फ्रेज़ और एक बंगाली इन्जीनियर की देख रेख में बना था. और इस पर उस समय एक लाख अस्सी हज़ार रुपये ख़र्च हुए थे.

जो फाटक गिरा है, वह उनके मकबरे का प्रथम फाटक था. अन्दर जा कर एक और फाटक है जिसे पार करने के बाद एक बड़े आहाते में बीच में मक़बरा बना हुआ है और चारों ओर लोगों के रिहायशी मकान बने हैं. काश समय रहते इस गेट की देखभाल और मरम्मत की गयी होती तो आज एक ऐतिहासिक इमारत का यह हाल न होता.

(फ़ेसबुक वाल से साभार)

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