गोकुल तीर्थ क्षेत्र का कायाकल्प

गोकुल तीर्थ क्षेत्र का पिछले चार महीने के कोरोना काल में कायाकल्प हो गया।

यह स्थान भगवान कृष्ण से उसी तरह जुड़ा है जैसे वृंदावन, मथुरा,  गोवर्धन और बरसाना।

गोकुल में भी तीर्थयात्रियों की बड़ी संख्या आती है।

उत्तर प्रदेश  ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने कोरोना काल में लॉकडाउन के दरम्यान यहाँ घाटों एवं अन्य स्थानों का जीर्णोद्धार कराया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अध्यक्ष हैं।

सरकार ने  पूरे  इलाक़े के विकास के लिए क़रीब तीन सौ करोड़ रुपये उपलब्ध कराये।

परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व पुलिस महानिदेशक शैलजाकांत मिश्र ने बताया कि यहाँ विकास कार्यों में श्रमिकों को शामिल कर उन्हें रोज़गार दिलाया गया।

इससे गोकुल का तेज़ी से विकास हुआ, जो देश में एक मिसाल है।

सौंदर्यीकरण और सुरक्षा की व्यवस्था

नंदभवन पार्किंग के पास नए घाट पर रेड सैंड स्टोन का फर्श लगाया गया है। घाट पर सुरक्षा के लिए चारों ओर रेलिंग लगाई गई है। 

गोकुल में होली चबूतरे का भी निर्माण कराया गया है, जहां गोकुल के निवासी होली पर छड़ीमार होली खेलते हैं।

ब्रह्मांड घाट पर जीर्णोद्धार कार्य कराया गया है। घाट पर छह प्लेटफार्म बनाने के अलावा, प्लेटफार्म के आगे रेलिंग लगाई गई है।

सीढ़ियों पर स्टील की रेलिंग लगाई गई है। दो गुम्बदों का निर्माण किया गया है, जो यमुनाजी की आरती/दर्शन के लिए भव्यता प्रदान करेंगे।

भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से ब्रह्मांड स्वरूप दर्शन, मृदा भक्षण करते हुए विराट रूप को पत्थर पर चित्रकारी से सुसज्जित किया गया है।

नंद भवन पार्किंग से मंदिर तक पहुंच मार्ग का पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया गया है। 

इसमें इंटरलॉकिंग मार्ग के साथ ही पार्क का भी सौंदर्यीकरण किया गया है।

एक जनसुविधा केंद्र का भी निर्माण किया गया है। ताकि मंदिरों में दर्शनों के बीच यहां श्रद्धालु रुक कर विश्राम कर सकें और यमुना तक आ जा सकें।

यमुना किनारे भव्य घाट

महावन स्थिति प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चिंताहरण महादेव मंदिर पर यमुना के किनारे भव्य घाट का निर्माण कराया गया है।

घाट की दीवारों और फर्श पर रेड सैंड स्टोन का प्रयोग किया गया है। घाट पर भगवान शिव से संबंधित चित्रकारी की गई है।

यमुना दर्शन और आरती के लिए दो छतरियों का भी निर्माण किया गया है।

नंदभवन सीढ़ियों से रास चबूतरा होते हुए नंद चौक तक सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया है।

गोकुल की गलियों, दीवारों और फर्श पर रेड सैंड  स्टोन का फर्श लगाया है। रास चबूतरे तथा नंद चौक का सौंदर्यीकरण कराया गया है।

गोकुल की गलियों में भगवान के जन्म से लेकर बाल लीलाओं को चित्रकारी के माध्यम से दर्शाया गया है।

इन कार्यों पर कुल आठ करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

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