18 जनवरी को मनाया महिला किसान दिवस…

उत्तराखंड की महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट यह सुझाव ठुकरा दिया है कि महिलाएँ किसान ऑंदोलन के दिल्ली में चल रहा धरना छोड़कर घर चली जायें

महिला किसान दिवस…

18 जनवरी को किसान ऑंदोलन के दौरान मनाया गया महिला किसान दिवस. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों कहा था कि किसान आन्दोलन के धरने से महिलाएं और बच्चे घर वापस चले जायें. लेकिन उतराखंड से आई महिलाएं घर वापस जाने को तैयार नहीं हैं और उनका सुप्रीम कोर्ट से दो टूक कहना है कि वह खुद खेती और किसानी में साझेदार है, काम करती हैं इसलिए वो वापिस नहीं
जाएँगी … साथ ही उन्होंने महिला किसान दिवस भी मनाया …

=महिला किसान दिवस
महिला किसान दिवस

महिला एकता मंच से आयी नालिता रावत (नैनीताल) कहती हैं कि- ” जो सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के संबंध में जो बातें रखी कि जो महिला हैं, बुजुर्ग हैं उन्हें वापिस चले जाना चाहिए, बहुत ठण्ड है उन्हें नहीं रहना चाहिए …हमारा मानना है की महिलाएं किसी भी तरीके से कमजोर नहीं हैं…हिमालय क्षेत्र की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं…”

=महिलाएं किसान हैं और पुरुषो से ज्यादा काम करती हैं..
महिलाएं किसान हैं और पुरुषो से ज्यादा काम करती हैं..

कौशल्या उत्तराखंड से, महिला एकता मंच की तरफ से आयी हैं और उनका कहना है कि …: “महिलाएं किसान हैं और पुरुषो से ज्यादा काम करती हैं..महिलाएं खेती खलिहान सारा काम महिलाएं करती हैं … 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाया है और अब यह हमेशा मनेगा …”

महिलाएं घर नहीं जाएँगी और अब वह तबतक नहीं जायंगी जबतक सरकार तीनों बिल को वापिस नहीं ले लेती . वह साथ ही यह भी कहती हैं कि – ‘‘ हमारे वीरों पर सरकार पानी फेंकवाई है, लठ्ठ मारी है. अब तो तभी जाएंगे जब कानून वापस होगा. कानून वापस कराए बगैर हम महिलाएं नहीं जाएंगी ’’

कृषि क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश किसान आन्दोलन समाप्त करने की ‘बड़ी क़वायद’(Opens in a new browser tab)

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