SGPGI Lucknow में “गरिमापूर्ण वृद्धावस्था” पर शैक्षणिक कार्यक्रम, बुजुर्गों की सम्मानजनक देखभाल पर जोर
लखनऊ। उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था बुजुर्गों के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए तैयार है?
इसी महत्वपूर्ण प्रश्न को केंद्र में रखते हुए Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (एसजीपीजीआईएमएस) के जनरल अस्पताल और अस्पताल प्रशासन विभाग ने 11 फरवरी 2026 को “गरिमापूर्ण वृद्धावस्था: वृद्धावस्था देखभाल हेतु मार्गदर्शन” विषय पर एक शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम Geriatrics Society of India (यूपी चैप्टर) के तत्वावधान में हरगोविंद खुराना सभागार में संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य वृद्धावस्था में बुजुर्गों की देखभाल के तौर-तरीकों को सुदृढ़ करना और चिकित्सा व प्रशासनिक तंत्र को अधिक संवेदनशील बनाना था। इसमें चिकित्सक, प्रशासक और विभिन्न विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए।
कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन जनरल अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक एवं नोडल अधिकारी डॉ. प्रेरणा कपूर तथा संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक एवं प्रोफेसर (अस्पताल प्रशासन) आर. हर्षवर्धन द्वारा किया गया।
संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर R. K. Dhiman मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगतिशील पहलों और वृद्धजनों के अनुकूल वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. ए. के. सिंह ने बुजुर्गों में गिरने से बचाव (Fall Prevention) पर अपना व्याख्यान दिया और बताया कि समय पर रोकथाम से रुग्णता कम की जा सकती है तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
कार्यक्रम में डीन प्रो. शालीन कुमार और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संस्थागत स्तर पर वृद्धजनों के अनुकूल स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
King George’s Medical University (केजीएमयू), लखनऊ के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं जराचिकित्सा क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञ डॉ. कौसर उस्मान ने जेरियाट्रिक्स की विकसित होती विशेषज्ञता पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
इसके पश्चात एसजीपीजीआई के सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. रोमिल सैनी ने पैनल चर्चा का संचालन किया। चर्चा में जनसंपर्क, पोषण, ऑर्थोपेडिक्स और क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे स्पष्ट हुआ कि वृद्धावस्था प्रबंधन एक बहुविषयक (Multidisciplinary) दृष्टिकोण की मांग करता है।
वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वृद्धजनों के लिए संज्ञानात्मक आकलन (Cognitive Assessment), नियमित टीकाकरण और सहायक उपकरणों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि गुणवत्तापूर्ण देखभाल तभी संभव है जब उपचार के दौरान बुजुर्गों के सम्मान, गरिमा और संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
कार्यक्रम ने “करुणापूर्ण देखभाल, सशक्त जीवन” के संदेश को मजबूती दी। समापन अवसर पर सभी उपस्थितजनों को सहानुभूति, करुणा और मानवता के साथ वृद्ध-देखभाल में योगदान देने की शपथ दिलाई गई।




