गांधीवादी रामधीरज को ‘जमनाबेन लोकसेवक पुरस्कार’, 5 अप्रैल को धुले में सम्मान समारोह

धुले/जलगांव, महाराष्ट्र . गांधीवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार और जनआंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘जमनाबेन लोकसेवक पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।

यह सम्मान 5 अप्रैल 2026 (रविवार) को शाम 5:30 बजे धुले स्थित बर्वे छात्रावास में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में पूर्व कुलपति डॉ. एन. के. ठाकरे और धुले नगर निगम की महापौर माया देवी परदेशी उनके हाथों पुरस्कार प्रदान करेंगे।

समारोह की अध्यक्षता ‘साम्ययोग साधना’ के संपादक रमेश दाणे करेंगे, जबकि हरिजन सेवक संघ, जलगांव के शंभू पाटिल ‘महात्मा गांधी और अहिंसा’ विषय पर विशेष व्याख्यान देंगे।

यह पुरस्कार महाराष्ट्र गो विज्ञान समिति, मालेगांव द्वारा प्रदान किया जाता है, जिसे भवरलाल एंड कांताबाई जैन फाउंडेशन और गांधी तीर्थ का सहयोग प्राप्त है। सर्वोदय कार्यकर्ताओं के बीच इस सम्मान का विशेष महत्व माना जाता है।

समारोह के दौरान रामधीरज जी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की जाएगी। उन्हें पुरस्कार स्वरूप 51,000 रुपये की राशि, शाल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में महापौर माया देवी परदेशी सहित अन्य अतिथि भी अपने विचार व्यक्त करेंगे।

आयोजकों ने नागरिकों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

रामधीरज: एक संक्षिप्त परिचय

रामधीरज बालेश्वरजी सिंह का जन्म 14 दिसंबर 1954 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले (वर्तमान चंदौली) में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे युवावस्था से ही गांधीवादी विचारधारा से जुड़ गए।

उन्होंने जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और आपातकाल (1975–77) के दौरान 18 महीने जेल में बिताए।

छात्र और किसान आंदोलनों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने 1989 में ‘आजादी बचाओ आंदोलन’ और ‘लोक स्वराज अभियान’ की शुरुआत की। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन खड़ा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष हैं और वाराणसी के विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए सत्याग्रह, पदयात्रा और उपवास जैसे अहिंसक तरीकों से संघर्षरत हैं। उनका मानना है कि गांधीवादी मूल्यों का पालन ही जनकार्यकर्ताओं की वास्तविक शक्ति है।

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