राष्ट्रीय गांधी विचार युवा एवं विश्वविद्यालय शिविर का शुभारंभ — हिमालय से मिला जीवन का संदेश

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अनासक्ति आश्रम, कौसानी (उत्तराखंड), 13 अक्टूबर 2023

महात्मा गांधी से जुड़ा ऐतिहासिक अनासक्ति आश्रम, कौसानी इन दिनों युवा ऊर्जा और गांधी विचारों से गुंजायमान है। यहाँ 12 से 15 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रीय गांधी विचार युवा एवं विश्वविद्यालय शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के 18 राज्यों से 135 छात्र-छात्राएँ भाग ले रहे हैं।

शिविर के उद्घाटन सत्र में पद्मश्री श्रीमती राधा भट्ट, सुप्रसिद्ध गांधीवादी व पर्यावरणविद् ने कहा —

“हिमालय केवल सौंदर्य नहीं है, यह जीवन का संदेश है — सादगी, करुणा और दृढ़ता का।
हिमालय ही विशालता, धैर्य और करुणा का जीवनबोध कराता है।”

इस अवसर पर केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष श्री रामचंद्र राही, मंत्री श्री संजय सिंह, हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय सचिव श्री संजय राय, गांधी संग्रहालय, नई दिल्ली के निदेशक श्री ए. अन्नामलाई, लक्ष्मी आश्रम, कौसानी की अध्यक्षा एवं सर्व सेवा संघ की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती राधा भट्ट, प्रो. दिवाकर (ए. के. सिन्हा इंस्टीट्यूशन, पटना), इतिहासकार श्री सौरभ बाजपेयी, उत्तर प्रदेश गांधी स्मारक निधि के मंत्री श्री लालबहादुर राय तथा अधिवक्ता श्री बिष्ट जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

शिविर की दैनिक दिनचर्या में सामुदायिक कार्य, सर्वधर्म प्रार्थना, योग, गांधी विचार सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, तथा हिमालय और पर्यावरण संरक्षण पर संवाद आयोजित किए जा रहे हैं। यह शिविर युवाओं के लिए गांधीजी के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को समझने का एक सशक्त मंच बन रहा है।

आज सुबह प्रार्थना के बाद सभी शिविरार्थियों ने लक्ष्मी आश्रम की यात्रा की — जो सरला बहन, राधा दीदी और नीमा बहन जैसी गांधीवादी कार्यकर्ताओं की तपोभूमि रही है।
यह यात्रा जंगलों के बीच से होकर गुज़री — जहाँ स्वयं प्रकृति भी एक शिक्षक बनकर जीवन के सरल और सहयोगी स्वरूप का बोध कराती है। लगभग तीन घंटे तक चले इस अध्ययन भ्रमण में शिविरार्थियों ने महिला उत्थान, हिमालय संरक्षण, ग्रामोद्योग, नई तालीम, गोशाला, बागवानी, जल-संरक्षण, और सामूहिक जीवन जैसे विषयों पर अनुभव साझा किए।

शिविरार्थियों ने कहा कि अनासक्ति आश्रम और लक्ष्मी आश्रम का वातावरण आत्मिक शांति और प्रेरणा से भरपूर है। पहाड़ों की गोद में बीता यह दिन सभी के लिए एक जीवनपरिवर्तनकारी अनुभव रहा — जहाँ उन्होंने सृजनात्मक जीवन, सहजीवन और गांधी विचार के जीवंत स्वरूप से साक्षात्कार किया।

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