मायावती का बड़ा ऐलान: BSP to Fight UP Election 2027 Alone

(मीडिया स्वराज डेस्क)

लखनऊ, 18 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने साफ कर दिया है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) आगामी चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी और किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन की चर्चाओं को “पूरी तरह फेक और भ्रामक” बताते हुए कहा कि यह पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश है।

“गठबंधन की चर्चा साजिश का हिस्सा”

मायावती ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और मीडिया के कुछ वर्ग यह प्रचारित कर रहे हैं कि BSP 2027 में गठबंधन कर सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि 9 अक्टूबर 2025 को कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित रैली में भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

उनका कहना था कि इस मुद्दे पर बार-बार भ्रम फैलाना “राजनीतिक स्वार्थ” से प्रेरित है।

कांग्रेस, सपा और भाजपा पर परोक्ष निशाना

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाजपा की राजनीति पर परोक्ष टिप्पणी करते हुए कहा गया कि BSP का सामाजिक आधार स्वतंत्र है और पार्टी किसी के सहारे चुनाव नहीं लड़ती।

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 2007 की तरह पूर्ण बहुमत के लक्ष्य के साथ काम करें।

टाइप-8 बंगला विवाद: सुरक्षा का सवाल

दिल्ली में टाइप-8 बंगले के आवंटन पर उठे सवालों पर मायावती ने कहा कि 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड के बाद उनकी सुरक्षा श्रेणी में वृद्धि की गई थी।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के आधार पर ही उन्हें यह आवास दिया गया है। पहले कुछ अन्य विकल्प प्रस्तावित थे, लेकिन वे सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

उनका कहना था कि सुरक्षा जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक विवाद का रूप देना उचित नहीं है।

2027 की राह कितनी आसान?

1️⃣ क्या अकेले लड़ना रणनीतिक जोखिम है?

उत्तर प्रदेश की राजनीति पिछले एक दशक से बहुकोणीय मुकाबले में बदल चुकी है। ऐसे में अकेले चुनाव लड़ना BSP के लिए संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा होगी।

2️⃣ BSP का पारंपरिक वोट बैंक

BSP का कोर दलित वोट बैंक अब भी उसका मजबूत आधार है, लेकिन पिछले चुनावों में उसका वोट प्रतिशत घटा है। सवाल यह है कि क्या पार्टी नए सामाजिक समीकरण बना पाएगी?

2022 विधानसभा चुनाव में बसपा को केवल 1 सीट और लगभग 12.9% वोट शेयर मिला था। 2007 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाली पार्टी के लिए यह ऐतिहासिक गिरावट थी। ऐसे में 2027 में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा बसपा के लिए संगठनात्मक पुनर्निर्माण और सामाजिक समीकरणों के विस्तार की बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

3️⃣ गठबंधन की राजनीति बनाम स्वतंत्र पहचान

गठबंधन से इनकार पार्टी की स्वतंत्र पहचान को मजबूत करता है, लेकिन बहुकोणीय मुकाबले में वोट बँटवारे का खतरा भी रहता है।

4️⃣ टाइप-8 बंगला मुद्दा: प्रतीकात्मक राजनीति

सुरक्षा के आधार पर आवंटन का दावा अपनी जगह है, लेकिन विपक्ष इसे “विशेषाधिकार” बनाम “जनता की राजनीति” के फ्रेम में पेश कर सकता है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मायावती ने तीन स्पष्ट संकेत दिए—

• BSP गठबंधन के दबाव में नहीं आएगी।

• 2027 को मिशन की तरह लड़ा जाएगा।

• सुरक्षा और आवास को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए।

अब देखना होगा कि यह रणनीति जमीनी स्तर पर किस हद तक असर डालती है।

BSP का चुनावी प्रदर्शन (2007–2022)

वर्ष जीती सीटें वोट प्रतिशत राजनीतिक स्थिति

2007 – 206 ~30% पूर्ण बहुमत सरकार

2012 – 80 ~26% मुख्य विपक्ष

2017 – 19 ~22% बड़ी गिरावट

2022 – 1 ~12.9% ऐतिहासिक न्यूनतम

📈 BSP का चुनावी ग्राफ: 2007 से 2022 तक

2007: सामाजिक इंजीनियरिंग का चरम

Mayawati के नेतृत्व में “बहुजन + सवर्ण” समीकरण ने पूर्ण बहुमत दिलाया।

2012: सत्ता से बाहर, पर मजबूत उपस्थिति

सीटें घटीं, लेकिन वोट प्रतिशत 26% के आसपास रहा — यह दर्शाता है कि कोर आधार बना रहा।

2017: भाजपा लहर का असर

भाजपा की प्रचंड जीत के बीच BSP 19 सीटों पर सिमट गई।

2022: ऐतिहासिक गिरावट

केवल 1 सीट और लगभग 13% वोट शेयर — यह पार्टी के लिए बड़ा झटका था।

वोट शेयर पूरी तरह खत्म नहीं

हालाँकि 2022 में सीटें सिर्फ 1 रहीं, लेकिन 13% वोट शेयर अभी भी एक महत्वपूर्ण आधार है। बहुकोणीय मुकाबले में यह प्रतिशत निर्णायक बन सकता है।

सीट बनाम वोट का अंतर

BSP का वोट कई क्षेत्रों में दूसरे-तीसरे स्थान पर रहा, लेकिन सीट में तब्दील नहीं हो सका।

2027 का समीकरण

यदि BSP 13% वोट को 18–20% तक पुनर्स्थापित कर लेती है, तो वह कई सीटों पर निर्णायक मुकाबला दे सकती है।

क्या 2007 मॉडल दोहराया जा सकता है?

राजनीतिक परिस्थिति बदल चुकी है। 2007 में बहुकोणीय मुकाबला और सामाजिक इंजीनियरिंग का मॉडल सफल रहा।

आज मुकाबला अधिक ध्रुवीकृत है — इसलिए नई रणनीति की जरूरत होगी।

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