जस्टिस यशवंत वर्मा महाभियोग केस : जली करेंसी से संसद तक

कैसे शुरू हुआ विवाद?

14 मार्च 2025 की रात दिल्ली के 30 तुगलक क्रेसेंट में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले के स्टोर रूम में अचानक आग लग गई। उस वक्त जस्टिस वर्मा खुद भोपाल में थे, लेकिन घर पर उनकी बेटी और बुजुर्ग मां मौजूद थीं।

दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जो देखा, उसने सबको चौंका दिया – बोरियों में भरे हुए ₹500 के जले और अधजले नोट। लाखों रुपये की करेंसी राख हो चुकी थी। फायर ब्रिगेड और पुलिसकर्मियों ने वीडियो और फोटो लिए, जो अब सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो रहे हैं।

इन-हाउस जांच और ट्रांसफर का फैसला

15 मार्च को दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इसकी जानकारी दी। 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया। साथ ही तीन जजों की जांच समिति बनाई गई।

64 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया कि:

 जली करेंसी  वर्मा के घर से ही बरामद हुई।

 स्टोर रूम पर उनका और उनके परिवार का नियंत्रण था।

और आग के बाद उनका आचरण “असामान्य” था।

जस्टिस वर्मा का बचाव – साज़िश या सच्चाई?

जस्टिस वर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है:

🔹 उन्हें और उनके परिवार को इस कैश के बारे में कोई जानकारी नहीं।

🔹 स्टोर रूम किसी के लिए भी खुला था।

🔹 पुलिस ने कोई औपचारिक जब्ती (Panchnama) नहीं बनाई।

🔹 इन-हाउस जांच में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला।

उन्होंने सीजेआई के इस्तीफा देने के सुझाव को भी ठुकरा दिया।

 सुप्रीम कोर्ट और संसद में महाभियोग की कार्यवाही

अब मामला फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है, जहाँ जस्टिस वर्मा ने जांच रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश को चुनौती दी है।

इधर संसद में 21 जुलाई को महाभियोग प्रस्ताव पेश हो चुका है।

 145 लोकसभा सांसद और 63 राज्यसभा सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।

 बीजेपी और कांग्रेस समेत कई पार्टियाँ साथ हैं।

 सिर्फ TMC और सपा ने दूरी बनाई है।

महाभियोग की प्रक्रिया क्या है?

👉 100 लोकसभा या 50 राज्यसभा सांसदों के साइन से प्रस्ताव लाना।

👉 तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन।

👉 दोनों सदनों में 2/3 बहुमत से पास कराना।

👉 राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जज को हटाया जाता है।

इतिहासमेंअबतककितनेमहाभियोग?

1️⃣ जस्टिस वी. रामास्वामी (1993) – प्रस्ताव गिर गया।

2️⃣ जस्टिस सौमित्र सेन (2011) – इस्तीफा दे दिया।

3️⃣ जस्टिस यशवंत वर्मा (2025) – प्रक्रिया जारी।

 न्याय पालिका की साख पर सवाल

जस्टिस वर्मा का मामला अब सिर्फ एक जज की कहानी नहीं है। यह भारत की न्यायपालिका की जवाबदेही, पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर भी बड़ा सवाल उठा रहा है। अगर महाभियोग सफल होता है, तो यह देश का पहला सफल न्यायिक महाभियोग होगा।

“क्या जस्टिस वर्मा बच पाएँगे या भारत गवाह बनेगा अपने पहले सफल न्यायिक महाभियोग का? अपनी राय नीचे कमेंट में लिखें।”

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