डा राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष निर्वाचित

भारत का संविधान कैसे बना : किश्त:-03

बुधवार 11 दिसम्बर सन् 1946 ई.

स्थायी सभापति/ अध्यक्ष का चुनाव 

आचार्य कृपालानी ने डॉ राजेन्द्र प्रसाद का नाम सभापति पद के लिए प्रस्तावित किया। इसका समर्थन श्री वल्लभभाई  पटेल ने किया। प्रस्ताव को डॉ प्रसाद ने अपनी सहमति दी थी। इस प्रस्ताव को अस्थायी अध्यक्ष ने नियमानुकूल बताया। 

अस्थायी अध्यक्ष ने स्थायी सभापति पद पर डॉ राजेन्द्र प्रसाद के निर्वाचित होने की घोषणा की. 

अस्थायी सभापति ने आचार्य कृपालानी तथा मौलाना अबुल कलाम आजाद से अनुरोध किया वे निर्वाचित स्थायी सभापति को मंच पर आसीन करें। इंकलाब ज़िंदाबाद तथा जयहिंद के नारों से निर्वाचित अध्यक्ष का स्वागत हुआ। 

निर्वाचित स्थायी सभापति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के सम्मान तथा गौरव में निम्न माननीय सदस्यों का भाषण हुआ; 

सर एस राधाकृष्णन

दीवान बहादुर सर एन गोपालस्वामी आयंगर 

श्री एफ आर एंथोनी 

सरदार उज्जल सिंह 

महाराजाधिराज दरभंगा नरेश सर कामेश्वर सिंह 

डॉ जोसफ अल्बान डिसूजा 

श्री वी आई मुनिस्वामी पिल्लई 

श्री खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान साहब 

श्री सी एम पुनाका

श्री एच वी कामत 

श्री सोमनाथ लाहिरी 

श्री जयपाल सिंह 

श्रीमति सरोजिनी नायडू 

सर डॉ सच्चिदानन्द सिन्हा, अस्थायी सभापति 

स्थायी सभापति/ अध्यक्ष को गौरवान्वित करने वाला उपरोक्त भाषणों के बाद डॉ राजेन्द्र प्रसाद से सभापति का आसन ग्रहण करने का अनुरोध अस्थायी सभापति ने किया। डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने आसन ग्रहण किए और पूरा सदन राजेन्द्र बाबू ज़िंदाबाद के नारे से गुंजायमान हो उठा। 

अस्थायी सभापति के प्रति आभार दर्शन का भाषण आचार्य कृपालानी का हुआ। 

इसके उपरांत सभापति डॉ राजेन्द्र प्रसाद का उद्बोधन हुआ। उन्होंने प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा कि आपने मुझे इस पद पर चुनकर एक इतनी बड़ी इज़्ज़त दी है जो हिंदुस्तान के किसी भी आदमी के लिए सबसे बड़ी इज़्ज़त हो सकती है। 

सभापति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने कार्य संचालन के लिए 15 सदस्यीय “नियम-निर्मातृ समिति” के लिए निम्न सदस्यों के निर्वाचन की घोषणा की;

1.  श्री जगजीवन राम,

2.  श्री शरतचंद्र बोस,

3.  श्री एफ आर एंथोनी,

4.  दीवान बहादुर सर अल्लादि कृष्णा स्वामी अय्यर,

5.  श्री बख़्शी सर टेकचंद,

6.  श्री रफीक अहमद किदवई,

7.  श्रीमति जी दुरगाबाई,

8.  डा जोसफ अल्बान डीसौजा,

9.  दीवान बहादुर सर एन गोपालस्वामी आयंगर,

10. श्री पुरूषोतम दास टंडन,

11.  श्री गोपीनाथ बारदोलोई,

12. डॉ पट्टाभि सीतारमैया,

13. श्री के एम मुंशी,

14. श्री मेहरचंद खन्ना,

15. सरदार हरनाम सिंह,

कल प्रातः 11 बजे तक के लिए सभा स्थगित की गई।

बृहस्पतिवार, 12 दिसम्बर सन् 1946 ई.

सभापति डा राजेन्द्र प्रसाद 

अब हम दूसरा मुद्दा लेते हैं, यह है पंडित जवाहरलाल नेहरु का प्रस्ताव। मैं समझता हूँ कि कुछ ऐसे सदस्य हैं जिनका ख़्याल है कि इस आवश्यक प्रस्ताव पर विचार करने के लिए उन्हें काफी समय नहीं मिला है। यदि सभा की राय हो, तो कल तक के लिए इस पर वाद विवाद मैं स्थगित कर दूँ। 

कई सदस्य: हां ।

इस प्रकार आज के सत्र मे पंडित जवाहरलाल नेहरु जी “ लक्ष्यमूलक प्रस्ताव “ की प्रस्तुति कल तक के लिए स्थगित किया। 

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स्रोत: संविधान सभा की कार्यवाही

संकलन, संक्षेपण: कुमार कलानंद मणि

“भारत का संविधान कैसे बना” यह जानकारी कई किश्तों में प्रस्तुत की जा रही है। हमारा प्रयास रहेगा कि संविधान की स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप से साझा किया जाएगा ।

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