वफा नाम से ही, जहन डर गया है

तुम्हारा इशारा असर कर गया है
ज़ुबां से कहा, बेअसर कर गया है।

नहीं तुम से वादा कोई चाहिए अब
कि वादों इरादों से, दिल भर गया है।

फकत सांस लेना तो जीना नहीं है
कहीं मेरे भीतर, कोई मर गया है।

अदावत की उसने हदें लांघ दी सब
मुनासिब न था जो, वो भी कर गया है।

किसी हादसे ने असर ये किया है
वफ़ा नाम से ही, ज़हन डर गया है।

जहां साथ रहते थे अज़दाद मेरे
बिछड़ मुझसे अब वो, मेरे घर गया है।

ग़म ए दिल किसी को सुनाना बुरा है
सुनाया जिसे, वो हंसकर गया है।

अपर्णा पात्रिकर , भोपाल से

https://www.youtube.com/watch?v=T6dglHnXqA0&feature=youtu.be

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